राहुल के जन्मदिन पर जानिए उनके बारे में 10 रोचक बातें….

राहुल द्राविड आज अपना 45 वां जन्मदिन मना रहे हैं. भारत के सलामी बज्जेबाज के तौर पर राहुल को कभी भुलाया नहीं जा सकता है. टेस्ट क्रिकेट में सचिन के बाद अगर किसी बल्लेबाज को याद किया जाता है तो वो हैं राहुल द्राविड. हम आपको बता रहे हैं राहुल के बारे कुछ रोचक बातें….

Image: thecelebritynetworth.com

1. राहुल ने भारतीय क्रिकेट के लिए सभी इंटरनेशनल फॉर्मेट में एक साल में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है.

2. उन्होंने 1999 में अपने बल्ले से 2626 रन बनाए और साल 1999 के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बने.

3. राहुल ने साल 1999 में सिर्फ दो फॉर्मेट यानि कि वनडे और टेस्ट मिलाकर ये रन बनाए थे.

4. राहुल द्राविड टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में चौथे पायदान पर हैं उन्होंने 13288 रन अब तक अपने टेस्ट करियर में बनाए हैं, जबकि वनडे में उन्होंने अब तक 10889 रन बना कर टॉप टेन बल्लेबाजों में अपनी जगह बनाई है.

5. लम्बे समय तक बल्लेबाजी करने की उनकी क्षमता के कारण उन्हें दीवार के रूप में जाना जाता है, द्रविड़ ने क्रिकेट की दुनिया में बहुत से रिकॉर्ड बनाये हैं. द्रविड़ बहुत शांत व्यक्ति है. “दीवार“ के रूप में लोकप्रिय द्रविड़ पिच पर लम्बे समय तक टिके रहने के लिए जाने जाते हैं.

6. द्रविड़ के कैरियर की शुरुआत एक निराशाजनक तरीके से हुई जब मार्च 1996 में विश्व कप के ठीक बाद सिंगापुर में सिंगर कप के लिए श्री लंका की क्रिकेट टीम के खिलाफ एक दिवसीय मैच खेलने के लिए उन्हें विनोद काम्बली की जगह लिया गया. इसके बाद उन्हें टीम से हटा दिया गया.

7. 2001 में कोलकाता में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीन टेस्ट मैच की श्रृंखला के दूसरे टेस्ट में द्रविड़ ने वीवीएस लक्ष्मण के साथ मिलकर खेल के इतिहास में सबसे बड़ी जीत की वापसी की. इस जोड़े ने मैच की दूसरी पारी में पांचवें विकेट के लिए 376 रन बनाए. द्रविड़ ने 180 का स्कोर बनाया जबकि लक्ष्मण ने 281 रन बनाये.

8. वे एकमात्र भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्होंने विश्व कप में दो बेक टू बेक शतक बनाये. उन्होंने केन्या के खिलाफ 110 रन बनाये और इसके बाद टाउनटन में एक मैच में 145 रन बनाये. जहाँ बाद में उन्होंने विकेट कीपिंग की.

9. 2003 के विश्व कप के दौरान वे उपकप्तान रहे जिसमें भारत फाइनल तक पहुँचा, उन्होंने अपनी टीम के लिए दोहरी भूमिका निभाई एक बल्लेबाज की और एक विकेट कीपर की, एक अतिरिक्त बल्लेबाज का काम भी किया, भारत के लिए यह बहुत फायदे की बात थी.

10. एक मजबूत तकनीक के साथ, वह भारतीय क्रिकेट टीम के लिए रीढ़ की हड्डी साबित हुए. उनकी प्रारम्भिक छवि एक रक्षात्मक बल्लेबाज की बन गई थी जिसे केवल टेस्ट क्रिकेट तक ही सीमित होना चाहिए, उन्हें एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों से हटा दिया गया क्योंकि उनकी रन बनाने की गति बहुत धीमी थी.

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