7 बार नेशनल अवॉर्ड विजेता देशभक्त गायक येसुदास से संबंधित 14 बातें!


1-दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक में अपने सुरों की धाक जमाने वाले पार्श्व गायक येसुदास का जन्म आजादी से 7 साल पहले 10 जनवरी, 1940 में केरल के कोच्चि शहर में हुआ था.

2-उन्होंने मलयालम, तमिल, कन्नड़, हिंदी सहित कई भाषाओं के गीतों को अपनी आवाज दी है.

3- येसुदास ने बहुत ही कम उम्र में संगीत को अपना लिया. उनके गाये गीत सरहदों के पार चले गये.लोगों ने उन्हें, वो चाहे विदेश हो या अपना देश हर जगह सम्मान दिया.

4-शुरआती संगीत अपने पिता से सीखने के बाद येसुदास ने आगे की शिक्षा कोच्चि और चेन्नई में कई बड़े संगीतज्ञों से हासिल की.  येसुदास हमेशा से ही शीर्ष गायक रहे और कई पुरस्कार अपनी झोली में डाले.

5- उच्च शिक्षा के लिए श्री स्वातिरुनाल अकादमी गए, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह वहां की पढ़ाई पूरी न कर सके.

6-..लेकिन येसुदास ने हार नहीं मानी इसलिये उनकी क्षमता का इनाम उन्हें 1961 में मिला, जब उन्होंने अपना पहला गाना रिकार्ड कराया.

7- येसुदास ने एम.जी. रामचंद्रन, एन.टी. आर और अभिताभ बच्चन जैसे कलाकारों के लिए अपनी आवाज दी है.

8-येसुदास को 1968 में सोवियत सरकार ने आमंत्रित किया. जहां उन्होनें रूस के रेडियो काजाखिस्तान के लिये गीत गाया और काफी चर्चा बटोरी.

9-पार्श्व गायन के लिए केरल सरकार ने उन्हें रिकॉर्ड 23 बार अवार्ड दिया.इसलिये येसुदास ने 1987 में राज्य सरकार से गुहार लगाई की वह भविष्य में उन्हें यह अवार्ड न दे. 

10-गायकी में महारथ हासिल करने वाले येसुदास के अंदर देशप्रेम कूट-कूटकर भरा था. सन् 1965 में जब भारत और चीन के बीच युद्ध हुआ तो येसुदास ने कई जगह गाना गाकर युद्ध के लिए फंड जुटाया.

11-सन् 1971 में भी जब बांग्लादेश को पाकिस्तान से आजाद कराने के लिए भारत ने युद्ध शुरू किया तो येसुदास सड़कों पर उतर आए और खुले ट्रक में गाना गाकर देस के लिये फिर से फंड जुटाना शुरु कर दिया..

12-तत्कलीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी उनके देश-प्रेम से बहुत प्रभावित हुयीं. इसलिये वो पुरस्कृत भी किये गये.

13-येसुदास को सात बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिला और 1977 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से भी नवाजा. 

14-‘गोरी तेरा गांव बड़ा प्यारा’, ‘सुरमई अंखियों में’, ‘जब दीप जले आना’,जैसे गानों को गाकर येसुदास ने बॉलीवुड को अच्छे और बेहतरीन गानों से अलंकृत किया.

Loading...


Comments

comments