मार्को पोलो की जीवन यात्रा से जुड़े 15 रोचक तथ्य !


मार्को पोलो का नाम विश्व इतिहास के मशहूर जहाजी और व्यापरियों में आता है जिसने सुदूर पूर्व की यात्रा करते हुए जीवन का अधिकांश हिस्सा गुजार दिया था. उसके वर्णन के आधार पर ही प्राचीन चीन से वर्षों तक यूरोपवासी परिचित रहे थे. उनका जीवनकाल 1254 से 1324 तक रहा था और इस दौरान उन्होंने एशिया के कई स्थानों का भ्रमण किया था. मार्को पोलो चीन पहुंचने वाला प्रथम यात्री तो नहीं था लेकिन चीन की पूरी जानकारी देना वाला प्रथम यात्री जरूर था. उसकी किताब से ही प्रेरित होकर कोलम्बस समुद्री यात्रा को निकला था जिसने अमेरिका के समुद्री मार्ग की खोज की थी. तो चलिए उसी मशहूर जहाजी मार्को पोलो की जीवन से कुछ बातें आपको बताते हैं…..

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मार्को पोलो की जीवन यात्रा से जुड़े 15 रोचक तथ्य.

1. मार्को पोलो का जन्म इटली के वेनिस शहर में सन् 1254 मे हुआ था. मार्को पोलो के पिता एक धनी व्यापारी थे. उन दिनों सिल्क रूट की काफी चर्चा थी.

2. वह कारोबारी मार्ग पूर्वी यूरोप से लेकर उत्तरी चीन तक फ़ैल हुआ था. इसके बीच में कई नगर और कारोबारी केंद्र थे. इस मार्ग को सिल्क रूट इसलिए कहा जाता था क्योंकि इसी मार्ग के जरिये चीन रेशमी कपड़ो का निर्यात करता था. अभी तक किसी जहाजी ने इस पुरे मार्ग की यात्रा नही की थी.

3. मार्को पोलो के पिता निकोलो और चाचा मफेयो कुछ अलग करना चाहते थे. वो सिल्क रूट से सफर कर चीन पहुंचना चाहते थे और सीधे वहीं से रेशमी वस्त्र लाना चाहते थे.

4. उन्हें ऐसा लगता था कि ऐसा करने से वो मालामाल हो सकते हैं. इस यात्रा की तैयारी करने में उन्हें नौ साल लग गये थे. इस दौरान मार्को पोलो के बचपन के जीवन के बारे में कोई जानकारी मौजूद नही है.

5. ऐसा माना जाता है कि मार्को पोलो की माँ का बचपन में ही देहांत हो गया था और उसके चाचा-चाची ने उसे पाला था.

6. सन् 1269 में निकोलो और मफेयो जब सफर से लौटे थे तब उन्होंने मार्को को पहली बार देखा था. इससे पता चलता है कि 15 साल की उम्र से मार्को पोलो के इतिहास को देखा जा सकत है.

7. 17 साल की उम्र में मार्को पोलो अपने पिता और चाचा के साथ चीन की यात्रा पर रवाना हुए थे. चीन पहुंचने के बाद उनकी मुलाक़ात मंगोल शाशक कुबलाई खान से हुयी थी.

8. शासक ने पोलो से कहा था कि कुछ दिनों बाद वो वापस स्वदेश लौट जायेंगे. कुबलई खान का आतंक चीन में चारों तरफ फैला हुआ था.

9. मार्को पोलो को चीन पहुंचने में तीन साल का वक़्त लगा था. रास्ते में उसने दिलचस्प शहरों और स्थानों को देखा था जिसमे येरुशलम, हिन्दुकुश के पर्वत, गोबी रेगिस्तान शामिल था. अपनी इस यात्रा में मार्को पोलो की मुलाकात भिन्न भिन्न प्रकार के लोगो से हुयी थी.

10. मार्को पोलो कई साल तक चीन में रहा और चीनी भाषा भी सिख गया. उसने समूचे चीन की यात्रा कुबलई खान के दूत और गुप्तचर के रूप में की थी.

11. उसने दक्षिण की दिशा में उन स्थानो की भी यात्रा की, जहां आज म्यांमार और वियतनाम स्थित है. इन यात्राओ के जरिये उसका साक्षात्कार विविध संस्कृतियों से हुआ. उसने ऐसे कई स्थानों अक भ्रमण किया, जहां उससे पहले कोई यूरोपीय यात्री नही आया था.

12. मार्को पोलो चीन की समृधि देखकर चौंक गया था. उसे यूरोप की तुलना में एक नये संसार से परिचित होने का मौका मिला था. राजधानी किन्सी विशाल और साफ़ सुथरा शहर था.

13. बीस सालो तक यात्रा करने के बाद मार्को पोलो ने अपने पिता और चाचा के साथ स्वदेश लौटने का फैसला किया. वो सन् 1271 में घर से निकले थे और सन् 1295 में वापस लौट आये थे. उनके स्वदेश लौटने के कुछ दिनों के बाद वेनिस का युद्ध जेनेवा नगर से हुआ था और मार्को पोलो को गिरफ्तार कर लिया गया.

14. कारावास में मार्को पोलो ने इस्टीचेलो नामक एक लेखक से कहकर अपनी यात्रा का विवरण लिखवाया. “The Travels of Marco Polo” नामक ये पुस्तक बहुत ज्यादा लोकप्रिय हुयी.

15. मार्को पोलो का देहांत 8 जनवरी सन् 1324 में हुयी थी. मार्को पोलो की किताब ने चीन के उस दौर के इतिहास को जीवंत किया था.

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