मलाला युसुफ़ज़ई के जीवन से जुड़ी 56 अनसुनी बातें !

मलाला युसूफजई एक ऐसी पाकिस्तानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं जिसने अपने कामों से पूरे विश्व में पाकिस्तान का नाम रोशन किया जो अब तब केवल एक आतंकवादी देश के रूप में जाना जाता था. मलाला सबसे कम उम्र में नोबल पुरस्कार पाने वाली  प्रथम व्यक्तित्व हैं. अपने सामजिक कार्यों की वजह से पूरे विश्व का ध्यान इस लड़की पर पड़ा जिसने पूरे विश्व में शान्ति की अलख को जगाया है.

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मलाला युसुफ़ज़ई के जीवन से जुड़ी 56 अनसुनी बातें.

तो चलिए आपको बताते हैं कि किस तरह मलाला कुछ की दिनों में पूरे विश्व में छा गयीं और उनके जीवन से जुड़े कुछ तथ्य….

1. मलाला युसूफजई का जन्म 12 जुलाई साल 1997 में पाकिस्तान के मिंगोरा प्रान्त में एक पश्तो परिवार में हुआ था. उसके पिता का नाम जियाउद्दीन और माँ का नाम तोर पेकई है.

2. मलाला ने जिस गाँव में जन्म लिया वहां पर लडकी के जन्म पर उत्सव नहीं मनाते. उसके बावजूद उसके पिता ने उसके जन्म पर खुशियां मनाई थी.

3. माता-पिता ने बच्ची का नाम मलाला रखा जो अफ़गानिस्तान की एक कलाकार का नाम था. उनकी पश्तो जाति पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच फ़ैली हुयी है.

4. पाकिस्तान में हुए एक युद्ध में मलालाई नाम की एक योद्धा लड़ते हुए वीरगती को प्राप्त हुई तो उसी शहीद के नाम पर मलाला का नाम रखा गया.

5. मलाला के दादाजी ने भी शहीद होने वाली मलालालाई के नाम पर मलाला का नाम रखने पर आपति थी लेकिन उसके पिता ने उसका वही नाम रखा था.

6. मलाला के पिता उसको मईवाड की मलालाई के किस्से सुनाया करते थे और उसे प्यार से “जानीमून” बुलाते थे. मतलब की जान से भी प्यारा. मलाला बचपन से ही बहुत शांत स्वभाव की थी और कबीले की अन्य बच्चियों की तरह शरारती नही थी.

7. जब मलाला का जन्म हुआ था तब उसके पिता ने एक स्कूल खुलवाया था. स्कूल के पास में ही उनका घर था जिसमे केवल दो कमरे थे.

8. एक कमरा मेहमानों के लिए हुआ करता था और दूसरे कमरे में पूरा परिवार एक साथ रहता था. उनके घर में शौचालय या रसोईघर कुछ नहीं था. चूल्हे पर ही खाना पकाया जाता था जो आंगन में था. पानी के लिए स्कूल के नल का ही इस्तेमाल किया जाता था.

9. पश्तूनी रिवाज में मेहमानों का बहुत आदर किया जाता था इसलिए उन्होंने एक कमरा हमेशा मेहमानों के लिए रखा था ताकि किसी भी मेहमान को कोई परेशानी ना हो.

10. मलाला के पिता जो स्कूल चलाते थे उससे उनके घर का खर्च भी बड़ी मुश्किल से चल पाता था. जब मलाला दो साल की हुयी तब उसके यहां एक छोटे भाई का जन्म हुआ.

11. मलाला के पिता ने अपने पुत्र का नाम खुशहाल खान खट्टक रखा जो एक महान योद्धा का नाम था. मलाला के परिवार के सभी लोग बहुत खुश थे क्योंकि लम्बे अरसे के बाद पुत्र का जन्म हुआ था. अब अपनी पुत्री मलाला के साथ पुत्र खुशहाल को भी उतना ही प्यार करने लगे थे. पांच साल मलाला के सबसे छोटे भाई अटल का जन्म हुआ.

12. मलाला के पिता ने मलाला को पश्तो, उर्दू और अंग्रेजी भाषा अच्छी तरह सिखाई थी. मलाला के पिता स्कूल चलाने के अलावा एक पर्यावरणविद भी थे जो पर्यावरण संरक्षण वाले कई समारोहों और जुलूसो में भाग लेते थे. इसी कारण कई मेहमान भी उनके घर पर अक्सर आया करते थे.

13. मलाला ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वो डॉक्टर बनना चाहती थी लेकिन उनके पिता ने उन्हें राजनीतिज्ञ बनने के लिए प्रेरित किया.

14. जब मलाला के दोनों भाई सो जाते थे तब वो मलाला को राजनीति के बारे में किस्से सुनाया करते थे जिसका मलाला के ऊपर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा था. मलाला के पिता मलाला को आजाद पंछी की तरह उड़ने की प्रेरणा दिया करते थे.

15. मलाला ने सितम्बर साल 2008 से ही शिक्षा के अधिकार पर बोलना शूरू कर दिया था जब उसके पिता उसको पेशावर लोकल प्रेस क्लब लेकर गये तब उसने एक ब्यान दिया था “तालिबान कैसे मेरे शिक्षा के अधिकार को छीन सकते है”. उसके इस ब्यान को स्थानीय अखबारों और न्यूज़ चैनलों के माध्यम से पूरे पाकिस्तान में फैला दिया गया था.

16. साल 2009 में मलाला Institute for War and Peace Reporting’s Open Minds Pakistan youth programme में शिक्षा लेने लगी जो सामाजिक मुद्दों पर युवा पीढ़ी के लोगों को बोलने के लिए प्रेरित करता है.

17. मलाला पहली बार अपनी मार्मिक डायरी के माध्यम से सार्वजनिक रूप से लोगों के सामने आयी जिसे बीबीसी उर्दू पर प्रकशित किया गया. उस डायरी में उसने बार-बार शिक्षा पाने और लडकियों को शिक्षा दिलाने की बात कही.

18. जब स्वात में तालिबानियों का प्रभाव बढ़ता जा रहा था. तब बीबीसी उर्दू वेबसाइट के अमार अहमद खान और उनके साथी यह चाहते थे कि कोई स्कूली लड़की अपने स्वात के जीवन के बारे में ब्लॉग पर बताये. इसके लिए अहमद खान ने पेशावर में अपने प्रवक्ता अब्दुल ककर को ऐसी लडकी ढूंढने का काम दिया.

19. इसके लिए वो मलाला के पिता जियाउद्दीन से मिले लेकिन उन्हें स्कूल में कोई ऐसी लड़की नही मिली क्योंकि उनके परिवार को तालिबानियों द्वारा खत्म कर दिए जाने का डर था. जब मलाला के पिता को कोई लड़की नही मिली तब उन्होंने अपनी 11 वर्षीय बेटी मलाला को इस काम के लिए चुना.

20. उस समय तालिबानी आतंकवादी मौलाना फज़ुलाह स्वात घाटी में टीवी, संगीत, औरतों के बाजार जाने और लडकियों की शिक्षा को बंद करवाने में लगे हुए थे. लोगों में डर पैदा करने के लिए आतंकवादियों ने शहर के बीच में धड़ अलग किये हुए पुलिसकर्मीयो को टांग दिया था.

21. शुरुआत में स्कूल से आयशा नामक एक लड़की राजी हुयी थी लेकिन उसके पिता ने तालिबानियों के डर से अपनी बेटी को रोक दिया था. अब एकमात्र विकल्प मलाला बची थी जो उस समय 7वीं कक्षा में पढ़ रही थी.

22. बीबीसी प्रवक्ता भी राजी हो गये. अब मलाला की सुरक्षा के लिहाज से बीबीसी ने उन्हें अपना नाम बदलने का सुझाव दिया तब उनका ब्लॉग “गुल मकई” नाम से प्रकाशित हुआ जो एक पश्तो लोक गाथा से लिया गया था.

23. अब 3 जनवरी साल 2009 को मलाला ने अपने हाथों से लिखे नोट्स को रिपोर्टर तक भेजा जिसने स्कैन कर बीबीसी को ईमेल कर दिया. इस ब्लॉग की वजह से स्वात घाटी में लड़ाई छिड गयी जिसके कारण स्कूल बंद हो गया.

24. 15 जनवरी साल 2009 को तालिबान ने एक फतवा जारी किया जिसके अनुसार कोई लड़की स्कूल नहीं जा पायेगी. इस दल ने पहले ही काफी लड़कियों को डरा दिया और बैन के एक दिन पहले मलाला को गोलियों की आवाजें सुनाई दी थीं.

25. अगले दिन मलाला के ब्लॉग की खबरें स्थानीय अखबारों में भी छप गयी थीं. बैन के बाद भी तालिबान ने उस इलाके में स्कूलों को तबाह करना शुरू कर दिया था.

26. पांच दिन बाद मलाला ने अपने ब्लॉग में लिखा “हमारी वार्षिक परीक्षा अभी बाकी है लेकिन ये तभी सम्भव है जब तालिबानी लड़कियों को स्कूल जाने दें, हमने परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी लेकिन पढाई में मन नही लग रहा है”.

27. फरवरी साल 2009 तक गर्ल्स स्कूल बंद हो गये थे लेकिन बॉयज स्कूल चल रहे थे. 7 फरवरी को जब मलाला और उसका भाई वापस अपने पैतृक गाँव मिंगोरा में आये तो उन्होंने देखा कि सड़कें सूनी पड़ी थीं और एकदम सन्नाटा छाया हुआ था.

28. जब वो सुपरमार्केट अपनी माँ के लिए गिफ्ट खरीदने गये तब वो भी बंद था. दूसरी कई दुकाने भी बंद थी और उनका घर भी लूट लिया गया था और उनकी टीवी भी चोरी हो गयी थी.

29. वहां पर कोई भी co-education स्कूल नही था जिसके कारण तालिबान ने केवल लड़कियों के पढ़ने पर पाबंदी लगाई थी. मलाला ने अपने ब्लॉग में बताया था कि 700 नामांकित बच्चो में से केवल 70 ही स्कूल जा रहे थे.

30. 15 फरवरी को मिंगोरा की सडकों पर गोलियों की आवाजें सुनाई दीं लेकिन मलाला के पिता ने समझाया कि ये शांति के लिए गोलियां चलाई जा रही हैं. अगले दिन आतंकवादियों और सरकार के बीच शान्ति पर समझौता हुआ.

31. इस शांति समझौते के अनुसार तालिबानी आतंकवादियो ने लड़कियों के स्कूल जाने ले प्रतिबन्ध को हटा लिया लेकिन 17 मार्च को होने वाली परीक्षा तक स्कूल जाने की अनुमति दी और उन्हें केवल बुर्खा पहनने को कहा गया.

32. 25 फरवरी को मलाला ने अपने ब्लॉग में स्कूल के बच्चों के साथ खेलने की बात लिखी थी. 1 मार्च को उसके स्कूल में 27 में से 19 बच्चे उपस्थित थे.

33. तालिबानी आतंकवादी अभी भी उस इलाके में सक्रिय थे और लोगों की हर गतिविधि पर नजर लगाये हुए थे. 2 दिन बाद ही फिर से तालिबानियों और सेना के बीच मुठभेड़ हो गयी जिससे फिर उस क्षेत्र में अशांति छा गयी.

34. मलाला ने अपने ब्लॉग में बताया कि कुछ लोग कह रहे थे कि शांति समझौता स्थाई नही है ये तो केवल एक ब्रेक था. 9 मार्च को मलाला ने अपने विज्ञान के पेपर के अच्छे होने की बात लिखी थी.

35. 12 मार्च साल 2009 को उसका ब्लॉग खत्म हो गया. ब्लॉग खत्म होते ही मलाला और उसके पिता न्यू यॉर्क टाइम्स के रिपोर्टर एडम के पास documentary फिल्माने की बात करने के लिए गये.

36. स्वाट घाटी की दूसरी लड़ाई में पाकिस्तानी सेना ने उस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया. अब पाकिस्तानी सेना ने मिंगोरा को खाली करा दिया और मलाला के परिवार को भी वहा से हटा दिया गया. अब उसके पिता विरोध और सहायता के लिए पेशावर गये जो कि अपने रिश्तेदारो के साथ अपने गाँव में ही रहना चाहते थे.

37. मलाला के पिता ने एक प्रेस कांफ्रेंस में आतंकवादियो की आलोचना की जिससे उनको तालिबानी कमांडर से रेडियो पर मौत की धमकियां आने लगी.

38. मलाला अपने पिता की इस सक्रियता से काफी प्रेरित हुयी थी. उसी समय से उसने डॉक्टर बनने के बजाय नेता बनने का विचार किया ताकि अपने प्रदेश को आतंकवादियो से मुक्त करा सकें.

39. जुलाई तक शरणार्थी कैंप भर गये थे. कई दिनो के इंतजार के बात प्रधानमंत्री ने स्वाट घाटी में वापस लौटने को सुरक्षित बताया. पाकिस्तानी सेना ने तलिबानियों को शहर से खदेड़ दिया था.

40. 24 जुलाई साल 2009 को मलाला वापस अपने परिवार के साथ गांव लौट आयी. वापस लौटने पर उन्होंने देखा कि उनके घर को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ और उनकी स्कूल को भी हल्का सा नुकसान हुआ है. documentary के बाद मलाला ने कई न्यूज चैनलों पर इंटरव्यू दिए और महिला शिक्षा की ओर ज़ोर देने को कहा.

41. साल 2011 में उसे International Children’s Peace Prize दिया गया जो ये पुरस्कार पाने वाली प्रथम पाकिस्तानी थीं. अब उसका पब्लिक प्रोफाइल बढ़ता जा रहा था और इसे National Youth Peace Prize से नवाजा गया.

42. साल 2012 से मलाला अपनी संस्था “मलाला एजुकेशन फाउंडेशन” की योजना बनाने लग गयी थी जिसका उद्देश्य गरीब लडकियों को शिक्षा देना था.

43. अब जैसे-जैसे मलाला की लोकप्रियता बढ़ती जा रही थी उस पर खतरा मंडराना शुरू हो गया था. उसके फेसबुक अकाउंट पर उसको जान से मारने की धमकियां आने लगी थीं लेकिन मलाला इन धमकियों से नही डर रही थी.

44. जब तालिबानियों को लग गया कि ये लड़की ऐसे नही मानने वाली है तो तालिबानी नेता ने उसे मारने की योजना बनाई. 9 अक्टूबर साल 2012 को जब वो परीक्षा देकर वापस अपने घर लौट रही थी तब एक नकाबपोश आतंकवादी गाडी में चढ़ गया और जोर से चिल्लाया “तुम में से मालाला कौन है…?, जल्दी बताओ वरना मै तुम सबको गोली मार दूंगा’. तभी मलाला पूरे साहस के साथ खड़ी हुयी और बोली “मै मलाला हुं”.

45. आतंकवादियों ने तुंरत गोलियां चलाना शुरू कर दिया जिसमें से एक गोली मलाला की बाई भौंह के पास लगी जो खोपड़ी भेदने के बजाय चमड़ी के नीचे से होते हुए कंधे में जा घुसी. इस हमले में दो दूसरी लडकियां भी घायल हो गयी थी लेकिन उन्होंने हमले की सारी घटना रिपोर्टर्स को बताई.

46. गोलीबारी के बाद मलाला को पेशावर के मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया और पांच घंटे के ऑपरेशन के बाद बुलेट को उसके शरीर से निकाल दिया गया, लेकिन फिर भी उसकी हालत नाजुक थी और वो कोमा में चली गयी.

47. इसलिए पाकिस्तानी और ब्रिटिश डॉक्टर्स का दल उसको रावलपिंडी ले गया जहां पर डॉक्टर्स ने उसके बचने की सम्भावना 70 प्रतिशत बताई.

48. अब मलाला को मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए यूनाइटेड किंगडम भेजा गया जहां पर डॉक्टर्स के साथ उनका परिवार भी गया. मलाला की बीमारी का सारा खर्च पाकिस्तानी सरकार ने दिया था.

49. 17 अक्टूबर साल 2012 को मलाला कोमा से बाहर आ गयी और ब्रेन डैमेज हुए बिना पूरी तरह तैयार होने की सम्भावना थी अब वो थोडा हिलने डुलने लगी थी और 8 नवम्बर को उसकी बेड पर बैठे फोटो सामने आयी.

50. 3 जनवरी साल 2013 को मलाला को हॉस्पिटल से छुट्टी से दी गयी. 2 फरवरी को उसके पांच ऑपरेशन हुए जिससे उसके सुनने की शक्ति समेत पूरी तरह तैयार किया गया.

51. इस घटना की जानकारी पूरे विश्व में पहुंची और मलाला के प्रति लोगों की सहानुभूति बढ़ गयी. गोलीबारी के विरोध में पाकिस्तान में विरोध प्रदर्शन हुए और 2 मिलियन लोगों ने Right to Education अभियान याचिका पर हस्ताक्षर किये.

52. पाकिस्तान ने हमलावरों का पता बताने वाले को 10 मिलियन रूपये देने की घोषणा की. इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद भी मलाला के पिता ने देश छोड़ने से मना कर दिया और तालिबान के खिलाफ आवाज उठाई. इसके बाद से मलाला फण्ड में कई बड़ी बड़ी हस्तियों ने पैसे दान किये जिससे मलाला गरीब लडकियों को पढ़ाने वाली थी. भारतीय डायरेक्टर अमजद खान ने मलाला पर फिल्म बनाने की बात भी कही.

53. कुछ समय बाद मलाला एकदम स्वस्थ्य हो गयी और जुलाई साल 2013 में यूनाइटेड नेशन में रानी एलिज़ाबेथ द्वितीय से मिली.

54. सितम्बर 2013 में उसने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भाषण दिया और अक्टूबर 2013 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके परिवार से मिली. साल 2014 में World Children’s Prize मिलने के बाद उसने 50,000 डॉलर राशि गाजा में 65 स्कूलो के पुनर्निर्माण के लिए दिए.

55. 12 जुलाई साल 2013 को यूनाइटेड नेशन ने मलाला के 16वें जन्मदिन पर “मलाला डे” मनाने की घोषणा की जिसका उद्देश्य पूरे विश्व में शिक्षा का प्रसार करना है.

56. 10 अक्टूबर 2014 को मलाला को नोबल पुरस्कार से सम्मनित किया गया और ये पुरस्कार पाने वाली वे सबसे कम उम्र की लड़की बनी. इसके बाद से उन्हें विश्व भर से बहुत सम्मान मिला और उसके नाम पर कई पुस्तकें छपी जो “I am Malala” बहुत प्रसिद्ध हुयी.

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