Home Religion क्या सचमुच हुआ था समुद्र मंथन? यहां जानें…

क्या सचमुच हुआ था समुद्र मंथन? यहां जानें…

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अमृत का नाम सुनते ही आपको दिमाग में उस पौराणिक घटना स्मरण हो जाता है जिसे समुद्र मंथन कहा जाता है. मंथन करते देवतागण और राक्षस. जिसके बाद समुद्र से अमृत निकता है और राक्षस उसे लेकर भाग जाते हैं. कुछ ऐसा ही टीवी के धावाहिकों में दिखाया जाता है. लेकिन क्या इसका कोई साक्ष्य मौजूद है? क्या इसमें कोई सच्चाई है कि समुद्र मंथन सच में हुआ था? क्या अमृत का सत्य तलाशने की कोशिश की गई है? कुछ ऐसे ही सवाल हमारे दिमाग में बसे हैं जिनका जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है. कई लोगों की अपनी-अपनी थ्योरी है तो कई की अपनी ही सोच. तो आज हम आपको बतातें हैं कि आखिर क्या है अमृत और क्या इसे हासिल करना आज भी संभव है?

समुद्र मंथन का प्राचीन चित्र

क्या है अमृत? अमर होने का मतलब यह है कि अनंतकाल तक का जीवन. अमरता के बल पर कोई भी दुनिया पर राज कर सकता है और जो चाहे वो कर सकता है. महाभारत में 7 चिरंजीवियों का उल्लेख किया गया है. चिरंजीवी का मतलब होता है अमर व्यक्ति. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन क्षीरसागर में हुआ था. 27 अक्टूबर 2014 की खबर के अनुसार आर्कियोलॉजी और ओशनोलॉजी डिपार्टमेंट ने सूरत जिले के पिंजरात गांव के पास समुद्र में मंदराचल पर्वत होने का दावा किया था. आर्कियोलॉजिस्ट मितुल त्रिवेदी के अनुसार बिहार के भागलपुर के पास भी एक मंदराचल पर्वत है, जो गुजरात के समुद्र से निकले हुए पर्वत का हिस्सा है.

समुद्र मंथन के बारे जानकारी इकट्ठा करते वैज्ञानिक

एक हिंदी वेबसाइट की खबर के मुताबिक त्रिवेदी ने बताया कि बिहार और गुजरात में मिले दोनों पर्वतों का निर्माण एक तरह के ग्रेनाइड से हुआ है. इस तरह ये दोनों पर्वत एक ही हैं. जबकि आमतौर पर ग्रेनाइड पत्थर के पर्वत समुद्र में नहीं पाए जाते हैं. खोजे गए पर्वत के बीचो बीच नाग आकृति है जिससे यह सिद्ध होता है कि यही पर्वत मंथन के दौरान इस्तेमाल किया गया होगा. गौरतलब है कि पिंजरात गांव के पास के समुद्र में 1988 में किसी प्राचीन नगर के अवशेष भी मिले थे. लोगों का यह मानना है कि वे अवशेष भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका के हैं, वहीं शोधकर्ता डॉ. एसआर राव का कहना है कि वे और उनके सहयोगी 800 मीटर की गहराई तक अंदर गए थे तो पता चला कि इस पर्वत पर घिसाव के निशान भी हैं.

गुजरात में स्थित मंदराचल पर्वत के अवशेष

बड़ा सवाल यह है कि क्या आज के समय में भी अमृत प्राप्त किया जा सकता है? क्या इस काल में समुद्र मंथन करने कोई तकनीक है? और क्या आज भी मंथन करके अमृत निकल सकता है? जल में ऐसे क्या तत्व हैं जिससे अमृम निकल सकता है. शोध के अनुसार पता चला है कि गंगा के जल में ऐसे गुण हैं, जिससे कि उसका जल कभी नहीं सड़ता है. ऐसा जल पीना अमृत के समान है. समुद्र का जल पीने लायक नहीं होता है. नदी का जल ही पीने के लायक होता है. लोगों की मान्यता यह भी है कि ग्रहों और नक्षत्रों की विशेष स्थिति में धरती की नदियों का जल अमृत के समान हो जाता है. लेकिन आजकल के प्रदूषण ने गंगा और अन्य नदियों को पुरी तरह से प्रदूषित कर दिया है, उनकी प्राकृतिकता को नष्ट कर दिया है.

भारत की गंगा नदी
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