ताशकंद समझौता! एक ऐसा समझौता जिसने लील ली हमारे प्रधानमंत्री की जान..!

10 जनवरी वही दिन है जिस दिन करोड़ों भारतीयों के मन-मस्तिष्क को आघात लगा था. दरअसल बात ये है कि आज ही के दिन सन् 1966 में ताशकंद (रूस) में यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका और सोवियत संघ के दबाव में आकर भारत को पाकिस्तान से समझौता करना पड़ा जबकि अपने देश से ताशकंद की उड़ान भरते समय तत्कालीन प्रधानमंत्री ने लाला बहादुर शास्त्री ने देशवासियों से वादा किया था कि वो किसी के दबाव में नहीं आयेंगे. 

अयूब खान और लाल बहादुर शास्त्री

इस समझौते के बाद प्रधानमंत्री जी की मौत संदेहात्मक स्थिति में होने के कारण इस समझौते को आज भी भारतीय संदेह की नज़र से देखते हैं क्योंकि इस समझौते के कुछ ही घंटों के बाद लाल बहादुर शास्त्री जी का देहांत हो गया और रिपोर्ट के अनुसार ये बताया गया कि उनका निधन दिल का दौर पड़ने के कारण हुआ है.

लाल बहादुर शास्त्री

इस समझौते के बाद भारत को अपनीतमाम वो ज़मीने जो उसने युद्ध में जीती थी, पाकिस्तान को लौटानी पड़ीं.और दोनों देशों को 1949 में तय की गयी सीमा रेखा पर लौटना पड़ा.आपकी जानकारी के लिये बता दें कि उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री अयूब खान थे.

ताशकंद समझौता

 इस समझौते पर कौन-कौन से बिंदु थे-

1-भारत और पाकिस्तान शक्ति का प्रयोग नहीं करेंगे और अपने-अपने झगड़ों को शान्तिपूर्ण ढंग से तय करेंगे.
2-दोनों देश 25 फ़रवरी 1966 तक अपनी सेनाएँ 5 अगस्त 1965 की सीमा रेखा पर पीछे हटा लेंगे.
3-इन दोनों देशों के बीच आपसी हित के मामलों में शिखर वार्ताएँ तथा अन्य स्तरों पर वार्ताएँ जारी रहेंगी.
4-भारत और पाकिस्तान के बीच सम्बन्ध एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने पर आधारित होंगे.
5-दोनों देशों के बीच राजनयिक सम्बन्ध फिर से स्थापित कर दिये जाएँगे.
6-एक-दूसरे के बीच में प्रचार के कार्य को फिर से सुचारू कर दिया जाएगा.
7-आर्थिक एवं व्यापारिक सम्बन्धों तथा संचार सम्बन्धों की फिर से स्थापना तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान फिर से शुरू करने पर विचार किया जाएगा.
8-ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न की जाएँगी कि लोगों का निर्गमन बंद हो.
9-शरणार्थियों की समस्याओं तथा अवैध प्रवासी प्रश्न पर विचार-विमर्श जारी रखा जाएगा तथा हाल के संघर्ष में ज़ब्त की गई एक दूसरे की सम्पत्ति को लौटाने के प्रश्न पर विचार किया जाएगा

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