UAE

UAE यानी की संयुक्त अरब अमीरात कैसे बना, UAE में कितने अमीरात हैं

Explainer

अमीरात अरबी भाषा का शब्द है. इसका मतलब रियासत या राज्य होता है. अमीरात के राजा को अमीर कहा जाता है. इन अमीरातों में अरबी भाषा बोली जाती है. संयुक्त अरब अमीरात में सात अमीरात हैं. इन अमीरातों में अलग अलग अमीर होते हैं. सब अमीरात को मिलाकर एक राष्ट्रपति होता है.

इन सभी सातों अमीरातों पर साल १९७१ तक अंग्रेजों का शासन था. दिसंबर 1971 में अमीरातों को अंग्रेजों से आजादी मिली. तब छह अमीरातों ने एक होकर नया देश बनाया. एक अमीरात रास अल खइमाह 1972 में संयुक्त अरब अमीरात में शामिल हुआ. यूएई अरब देशों में सबसे उदारवादी देश माना जाता है.

 सातों अमीर मिलकर एक काउंसिल बनाते हैं जो प्रधानमंत्री की नियुक्ति करती है. प्रधानमंत्री ही उपराष्ट्रपति भी होता है. फिलहाल यूएई के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन राशिद अल मकदूम हैं. अबू धाबी के अमीर खलीफा बिन जायद अल नह्यान यूएई के राष्ट्रपति हैं.

दुबई

इन अमीरातों में सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला अमीरात दुबई है. दुबई का क्षेत्रफल 3,885 वर्ग किलोमीटर है. दुबई की जनसंख्या करीब 42 लाख है. दुबई के अमीर का नाम शेख मोहम्मद है.

अबू धाबी

अबू धाबी क्षेत्रफल के आधार पर सबसे बड़ा अमीरात है. इसका क्षेत्रफल 67,340 वर्ग किलोमीटर है. अबू धाबी की जनसंख्या करीब 28 लाख है. यहां के अमीर शेख खलीफा है.

शारजाह

तीसरा सबसे बड़ा अमीरात शारजाह है. शारजाह का क्षेत्रफल 2,590 वर्ग किलोमीटर और जनसंख्या करीब 24 लाख है. यहां के अमीर शेख सुल्तान हैं

अजमान

जनसंख्या के आधार पर चौथा सबसे बड़ा अमीरात अजमान है. अजमान की जनसंख्या करीब पांच लाख और क्षेत्रफल 259 वर्ग किलोमीटर है. यहां के अमीर शेख हुमैद हैं.

रास अल खइमाह

जनसंख्या में पांचवा सबसे बड़ा अमीरात रास अल खइमाह है. यहां करीब चार लाख लोग रहते हैं. इसका क्षेत्रफल 1,684 वर्ग किलोमीटर है. इसके अमीर शेख सऊद हैं.

फुजैराह

फुजैराह  छठा बड़ा अमीरात है. इसमें करीब डेढ़ लाख लोग रहते हैं. इसका क्षेत्रफल 1,165 वर्ग किलोमीटर है. यहां के अमीर शेख हमद हैं.

उम अल कुवैन

सबसे छोटा अमीरात उम अल कुवैन है. यहां करीब 72 हजार लोग रहते हैं. यहां का क्षेत्रफल 777 वर्ग किलोमीटर है. यहां के अमीर का नाम शेख सऊद है.

सबसे ज्यादा भारतीय

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़ यूएई की कुल आबादी 90 लाख है और इसमें दो तिहाई प्रवासी हैं. इन प्रवासियों में 26 लाख भारतीय हैं. यह कुल आबादी का 30 फ़ीसदी है और यह प्रवासियों का सबसे बड़ा हिस्सा है.

अगर समुदायों की बात करें तो यूएई में सबसे ज्यादा भारतीय रहते हैं. वहां 27.8 प्रतिशत भारतीय, 12 प्रतिशत अमीराती, 10.2 प्रतिशत पाकिस्तानी, 9.5 प्रतिशत बांग्लादेशी, 6.1 प्रतिशत फिलिपीनी, 4.76 प्रतिशत ईरानी, 4.23 प्रतिशत मिस्र के लोग, 2.2 प्रतिशत चीनी और करीब 14.1 प्रतिशत दूसरे देशों के रहने वाले हैं.

भारत और यूएई का रिश्ता

यूएई दुनिया का दूसरा देश है जहां भारत का सबसे ज़्यादा निर्यात है. 2017 में जब यूएई के क्राउन प्रिंस भारत के 68वें गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनकर आए थे तो दोनों देशों ने अगले पांच सालों में द्विपक्षीय व्यापार में 60 फ़ीसदी बढ़ोतरी करने का फ़ैसला किया था.

गल्फ़ न्यूज़ के अनुसार भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हर हफ़्ते 1,076 फ़्लाइट्स की आवाजाही है. दोनों देशों के बीच पर्यटन भी लगातार बढ़ रहा है. यूएई ने भारतीयों के लिए वीज़ा के नियमों में भी कई तरह की छूट दे रखी है. भारत ने भी 2015 से यूएई के नागरिकों के लिए ई-वीज़ा की व्यवस्था की है.

हाल के आंकड़ों के मुताबिक़ दुबई जाने वाले पर्यटकों में सबसे ज़्यादा भारतीय हैं. दुबई स्थित कंपनी डीपी वर्ल्ड और एमार का भारत में बड़ा निवेश है तो दूसरी तरफ़ भारतीय कंपनियों ने भी दुबई को अपना केंद्र बना रखा है.

संयुक्त अरब अमीरात के विकास में भारतीय प्रवासियों की अहम भूमिका रही है. यहां कंस्ट्रक्शन वर्कर से लेकर सर्विस स्टाफ़ और टेक्नोक्रेट्स सबसे ज़्यादा भारतीय हैं.

2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद यूएई और सऊदी से संबंधों में और गर्माहट आई है. मोदी भारत के एकलौते नेता हैं जिन्हें सऊदी ने अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया है. चीन और अमरीका के बाद भारत यूएई का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है.