Sonia Gandhi

Sonia Gandhi और राजीव गांधी कब और कैसे मिले, इंदिरा से मुलाकात कैसी रही

Vyakti Vishesh

सोनिया गांधी का जन्म इटली के लुसियाना प्रांत में हुआ. उनके बचपन का नाम एंटोनियो माइनो था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा इटली में ही हुई लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए वे लंदन आ गईं. उन्होंने लंदन के ट्रिनटी कॉलेज में दाखिला लिया. यहीं पर उनकी मुलाकात एक दिन राजीव गांधी से हुई.

 जब पहली बार राजीव से मिलीं

राजीव गांधी और सोनिया गांधी की प्रेम कहानी भी कम दिलचस्‍प नहीं है. दोनों की मुलाकात कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के एक ग्रीक रेस्‍त्रां में हुई थी. राजीव गांधी के लिए यह पहली नजर का प्यार था. राजीव गांधी ने तब रेस्‍त्रां के मालिक से सोनिया के करीब वाली सीट देने की रिक्‍वेस्‍ट भी की थी. रेस्‍त्रां के मालिक ने एक इंटरव्यू में इस बात का खुलासा किया था.

इंदिरा से पहली मुलाकात 

इंदिरा गांधी अपने करीबी पुपुल जयकर के साथ लंदन गईं थी. वहीं पर राजीव गांधी ने अपनी मां इंदिरा गांधी से सोनिया से मिलने का आग्रह किया. इंदिरा पहले तो मिलने के लिए राजी नहीं हुईं लेकिन आखिर में उन्हें अपने बेटे के सामने झुकना पड़ा.

सोनिया गांधी ने एक बार बताया था कि पहली मुलाकात में वो इंदिरा के सामने काफी नर्वस थीं. इंदिरा ने सोनिया का हाथ पकड़कर‌ कहा ,

 “नर्वस होने या डरने की बात नहीं है. मुझे भी प्यार हुआ था. मैं भी एक लड़की रही हूं.

सोनिया नहीं चाहती थी, राजीव पीएम बनें

साल 1984 में इंदिरा गांधी के निधन के बाद कांग्रेस में प्रधानमंत्री पद के लिए उम्मीदवार ढूंढा जाने लगा. कांग्रेस ने अंत में तय किया कि राजीव गांधी ही प्रधानमंत्री होंगे. इस फैसले के बाद सोनिया गांधी रोने लगीं. सोनिया ने एक साक्षात्कार में बताया था कि वो नहीं चाहती थीं कि अब राजीव भी पीएम बनें. उन्हें डर था कि उनके पति राजीव गांधी की भी हत्या हो जाएगी.  राजीव ने सोनिया को समझाते हुए कहा था कि अगर मैं पीएन नहीं भी बनता हूं तब भी मार दिया जाऊंगा.

पीएम बनने से इनकार

देश में गिने-चुने नेता होंगे जो यह दावे के साथ कह सकते हैं कि उन्हें पीएम बनने का मौका मिला था और वो नहीं बने. सोनिया गांधी इनमें से एक हैं, जिन्हें दो बार पीएम बनने का मौका मिला, लेकिन वो नहीं बनीं. पहली बार सोनिया गांधी को 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद प्रधानमंत्री बनने को कहा गया, लेकिन सोनिया ने मना कर दिया.

दूसरी बार 2004 में यूपीए सरकार बनने के बाद भी सोनिया ने पीएम बनने से इनकार कर दिया.

कांग्रेस अध्यक्ष 

साल 1996 में कांग्रेस पार्टी में टूट फूट शुरू हो गई. कई दिग्गज पार्टी छोड़ कर जाने लगे थे. ऐसे वक्त में कांग्रेस के कुछ नेताओं ने सोनिया गांधी से आग्रह किया कि वे पार्टी को संभालें. काफी मान-मनौव्वल के बाद सोनिया अध्यक्ष बनने के लिए राजी हुई.

साल 1998 में कांग्रेस कार्यसमिति ने सोनिया गांधी को सर्वसम्मति से अध्यक्ष पद के लिए चुन लिया, लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष सीताराम केसरी ने अपना पद छोड़ने से इनकार कर दिया. सोनिया ने ऐसे स्थिति में इस्तीफे का दांव चला और अंततः केसरी को अध्यक्ष पद छोड़ना पड़ा. सोनिया गांधी सबसे ज्यादा समय तक यानी करीब १९ साल तक कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं.

नेता प्रतिपक्ष के रूप में 

1999 के चुनाव के बाद सोनिया गांधी के नेतृत्व में पार्टी को हार का मुंह देखना पड़ा. सोनिया ने उसके बाद खुद नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई. 13वीं लोकसभा में सोनिया गांधी नेता विपक्ष के रूप में संसद में मौजूद रहीं.

भ्रष्टाचार का आरोप 

सोनिया गांधी वर्तमान में जमानत पर हैं. उन पर हेराल्ड हाउस केस मामले में भ्रष्टाचार का आरोप है. सोनिया गांधी, उनके पुत्र राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव मोतीलाल बोरा पर एसोसिएट जर्नल के फंड में धोखाधड़ी करने का आरोप है.

तीसरी सबसे शक्तिशाली महिला 

साल 2013 में फोर्ब्स पत्रिका ने सोनिया गांधी को दुनिया की तीसरी सबसे शक्तिशाली महिला बताया. वहीं 2019 में फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोनिया गांधी दुनिया की चौथी सबसे अमीर महिला हैं.

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष 

2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की करारी हार के बाद राहुल गांधी ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद सोनिया गांधी को कांग्रेस कार्यसमिति ने पार्टी का अंतरिम अध्यक्ष नियुक्त किया.