Abhijit Banerjee (अभिजीत बनर्जी)

नोबल पुरस्कार विजेता अभिजीत विनायक बनर्जी कौन हैं

Vyakti Vishesh

अभिजीत बनर्जी का पूरा नाम अभिजीत विनायक बनर्जी है. ५८ साल के अभिजीत बनर्जी ने साल १९८१ में कलकत्ता विश्व विद्यालय के प्रेसिडेंसी कॉलेज से स्नातक किया.  इसके बाद उन्होंने 1983 में दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए किया.

हालांकि ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि अभिजीत बनर्जी, जेएनयू में पढ़ने के दौरान तिहाड़ जेल भी गये. वीसी के विरोध करने की वजह से उन्हें जेल जाना पड़ा था. बाद में सभी धाराएं वापस ले ली गईं.

जेएनयू से एमए करने के बाद अभिजीत बनर्जी साल १९८८ में हॉवर्ड यूनिवर्सिटी गये जहां उन्होंने सूचना अर्थशास्त्र में निबंध विषय पर पीएचडी किया.

उन्होंने साल 1988 में प्रिंस्टन विश्वविद्यालय में पढ़ाना शुरू किया. साल 1992 में उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में भी पढ़ाया. इसके बाद 1993 में उन्होंने एमआईटी में पढ़ाना और शोध कार्य शुरू किया जहां पर वह अभी तक अध्यापन और रिसर्च का काम कर रहे हैं.

वैश्विक गरीबी खत्म करने की दिशा में काम

अभिजीत बनर्जी ने ऐसी आर्थिक नीतियों पर रिसर्च किया, जो वैश्विक गरीबी को कम करने में मददगार बनीं. 2003 में उन्होंने एस्तेय डिफ्लो और सेंडहिल मुलैंटन के साथ मिलकर अब्दुल लतीफ जमील पावर्टी ऐक्शन लैब (JPAL) की बुनियाद रखी. 2009 में JPAL को डिवेलपमेंट को-ऑपरेशन कैटिगरी में बीबीवीए फाउंडेशन का फ्रंटियर नॉलेज अवॉर्ड मिला.

यह लैब एक नेटवर्क का काम भी करती है जिससे दुनिया के विश्वविद्यालयों के 181 प्रोफ़ेसर जुड़े हुए हैं.

2003 में ही बनर्जी को अर्थशास्त्र का फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन इंटरनेशनल प्रोफ़ेसर बनाया गया.

अभिजीत ने कितनी किताबें लिखीं

अभिजीतन बनर्जी अब तक पाँच किताबें लिख चुके हैं और छठी किताब आने वाली है जिसका नाम ‘व्हाट द इकोनॉमिक्स नीड नाउ’ है. इसके अलावा उनकी एक किताब गोल्डमैन सैक्स बिज़नेस बुक ऑफ़ द ईयर का ख़िताब जीत चुकी है. अभिजीत बनर्जी ने दो डॉक्युमेंट्री फ़िल्मों का निर्देशन भी किया है.

पुअर इकनॉमिक्सको मिला था बिजनस बुक ऑफ इयर का खिताब

बनर्जी ने 2011 में आई अपनी किताब ‘पुअर इकनॉमिक्स’ में लिखा है, ‘मोरक्को का कोई शख्स जिसके बाद खाने के लिए पैसे नहीं हो, वह टीवी क्यों खरीदेगा? गरीब इलाकों में स्कूल जाने के बावजूद बच्चों को सीखने में इतनी कठिनाई क्यों होती है? क्या कई बच्चे होने से लोग और गरीब हो जाते हैं? अगर हम वाकई वैश्विक गरीबी को कम करना चाहते हैं तो ऐसे सवालों का जवाब ढूंढना जरूरी है.’

अभिजीत बनर्जी की अर्थशास्त्र के कई क्षेत्रों में रुचि है जिसमें से चार अहम हैं. पहला आर्थिक विकास, दूसरा सूचना सिद्धांत, तीसरा आय वितरण का सिद्धांत और चौथा मैक्रो इकोनॉमिक्स है.

अभिजीत को मिले पुरस्कार

अभिजीत बनर्जी साल 2004 में अमेरिकन एकेडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंसेज़ के फेलो रह चुके हैं और उन्हें 2009 में सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में इन्फोसिस पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है. पुअर इकोनॉमिक्स नामक किताब के लिए उन्हें 2012 में अर्थशास्त्र के क्षेत्र में प्रतिष्ठित गेराल्ड लोएब अवॉर्ड से भी नवाज़ा गया था.

एस्थर,  बनर्जी की दूसरी पत्नी हैं

अभिजीत बनर्जी के साथ जिन दो और लोगों को अर्थशास्त्र का नोबल पुरस्कार मिला है उसमें से एक अभिजीत की पत्नी ही हैं. एस्थर, अभिजीत बनर्जी की दूसरी पत्नी हैं. अभिजीत की पहली पत्नी डॉ. अरुंधती तुली बनर्जी थीं जो साहित्य की प्रोफेसर थीं. दोनों का एक बेटा भी था. बाद में दोनों का तलाक हुआ.

बाद में अभिजीत अपनी को-रिसर्चर और नोबेल की सह विजेता एस्थर डफलो के साथ रहे और साल 2012 में दोनों के एक संतान भी हुई. एस्थर की पीएचडी के, को सुपरवाइज़र बनर्जी ही थे और बनर्जी की तरह ही एस्थर भी गरीबी उन्मूलन से जुड़े अर्थशास्त्र की प्रोफेसर हैं. एस्थर के साथ 2015 में बनर्जी ने औपचारिक रूप से शादी की थी.

NYAY का सिद्धांत

साल 2019 लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की मैनिफेस्टो में शामिल NYAY कार्यक्रम के पीछे था अभिजीत बनर्जी का ही दिमाग था. कांग्रेस ने अपनी इस स्कीम में सभी गरीबों को ६ हजार रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था. अभिजीत बनर्जी नोटबंदी के भी आलोचक रहे हैं. उन्होंने कहा था कि अर्थव्यवस्था को इससे शुरुआती अनुमान से ज्यादा नुकसान होगा.

विरासत में मिला अर्थशास्त्र

अभिजीत बनर्जी को अर्थशास्त्र का ज्ञान विरासत में मिला है. उनके पिता दीपक बनर्जी कोलकाता के प्रेजिडेंसी कॉलेज में अर्थशास्त्र के विभागाध्यक्ष थे. उनकी मां निर्मला बनर्जी भी कोलकाता के सेंटर फॉर स्टडीज इन सोशल साइसेंज में अर्थशास्त्र की प्रफेसर रह चुकी हैं.

एस्तेय डिफ्लो भी MIT में हैं प्रफेसर

अभिजीत बनर्जी के साथ-साथ उनकी पत्नी एस्तेय डिफ्लो को भी अर्थशास्त्र का नोबेल मिला है. डुफ्लो का जन्म 1972 में पैरिस में हुआ था. डिफ्लो भी MIT में हैं और पॉवर्टी एलेविएशन ऐंड डिवेलपमेंट इकनॉमिक्स की प्रफेसर हैं.

फ्रांसीसी मूल की अमेरिकी अर्थशास्त्री डिफ्लो ने हिस्ट्री और इकनॉमिक्स से ग्रेजुएशन के बाद 1994 में पैरिस स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स (तब DELTA नाम से जाना जाता था) से मास्टर डिग्री हासिल की. 1999 में उन्होंने MIT से इकनॉमिक्स में PhD किया. MIT में उन्होंने अभिजीत बनर्जी की देखरेख में ही अपनी PhD पूरी की क्योंकि बनर्जी इसके जॉइंट सुपरवाइजर थे. दोनों में प्रेम हुआ और दोनों एक साथ रहने लगे. 2015 में दोनों ने औपचारिक तौर पर शादी कर ली.