K R Narayanan

भारत के पहले दलित राष्ट्रपति के आर नारायाणन की कहानी

Vyakti Vishesh

के आर नारायणन का पूरा नाम कोच्चेरि रामना नारायणन था. उनका जन्म 5 फरवरी 1921 को केरल के त्रावणकोर में एक दलित परिवार में हुआ. नारायणन बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा के धनी थे. शुरुआती पढ़ाई लिखाई केरल के ही सरकारी स्कूल में हुई. त्रावणकोर विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी में स्नातक करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए वे लंदन चले गए. लंदन स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से पढ़ने के बाद के आर नारायणन भारतीय राजनयिक सेवा के लिए चयनित हुए.

प्रेम विवाह के लिए नया नियम

साल 1951 में के आर नारायणन को वर्मा की एक लड़की से प्रेम हो गया. दोनों उस समय एक ही दूतावास में काम कर रहे थे. उस समय के कानूनों को देखते हुए नारायणन जानते थे कि शादी नहीं हो सकती है. भारत का कानून किसी विदेशी से शादी करने की इजाजत नहीं देगा. नारायणन ने तुरंत उस वक्त के प्रधानमंत्री नेहरू से इसके लिए मदद मांगी.

जवाहरलाल नेहरू ने उनकी दरख्वास्त को स्वीकार करते हुए विवाह के कानून में संशोधन का प्रस्ताव पास करा दिया. इसके बाद के आर नारायणन ने अपनी प्रेमिका से शादी कर ली, विवाह के बाद प्रेमिका का नाम हुआ उषा नारायणन.

जेएनयू के कुलपति बने

ये बात तब की है जब कांग्रेस की सरकार जा चुकी थी और सत्ता में जनता पार्टी थी. दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के लिए सरकार एक योग्य कुलपति की तलाश कर रही थी. के आर नारायणन राजनयिक सेवा से रिटायर्ड हो चुके थे, सरकार ने उन्हें जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय का कुलपति बनाकर फिर से नई जिम्मेदारी दे दी. नारायणन इस पद पर 1980 तक रहे, इसके बाद नारायणन सक्रिय राजनीति में उतर आए.

साल 1984 के चुनाव में पहली बार नारायण केरल के ओट्टापलम सीट से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में पहुंचे। उन्हें राजीव गांधी सरकार में मंत्री भी बनाया गया. उन्होंने सरकार में योजना, विदेश और विज्ञान मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

नरसिम्हा राव की मदद

साल 1992 में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना था. कांग्रेस से उम्मीदवार थे खांटी कांग्रेसी शंकरदयाल शर्मा‌. नरसिम्हा राव चाहते थे कि शर्मा सभी पार्टी से समर्थन लेकर राष्ट्रपति बनें, लेकिन विपक्ष ने इस पर नया दांव खेल दिया . विपक्ष ने कहा कि शर्मा को तभी समर्थन दे सकते हैं, जब सरकार यह सुनिश्चित करा दे कि उपराष्ट्रपति कौन होगा?

नरसिम्हा राव और कांग्रेस ने आनन-फानन में के आर नारायणन को उपराष्ट्रपति उम्मीदवार घोषित कर दिया. घोषणा के साथ ही दोनों उम्मीदवार को विपक्ष का समर्थन भी मिल गया. के आर नारायणन देश के पहले दलित उपराष्ट्रपति बने.

गांधी का सपना पूरा हुआ

साल 1947 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने कहा था कि मैं राष्ट्रपति पद पर किसी दलित को देखना चाहता हूं और गांधीजी का यह सपना 50 साल बाद पूरा हो गया. साल 1997 में भारत राजनीति में उथल-पुथल मचा हुआ था. कम्युनिस्ट और जनता पार्टी की संयुक्त सरकार थी. इंद्रकुमार गुजराल देश के प्रधानमंत्री थे. अब सवाल था कि आगामी राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार कौन होगा?

हरकिशन सुरजीत उस समय संयुक्त मोर्चा के नेता थे. उन्होंने उपराष्ट्रपति के आर नारायणन का नाम राष्ट्रपति पद के लिए सुझाया. सुरजीत का तर्क था कि इससे कांग्रेस का समर्थन भी मिल जाएगा और हुआ भी वही.

नारायणन के विपक्ष में पूर्व चुनाव आयुक्त टी एन शेषण थे, लेकिन शेषण की कार्यप्रणाली से सभी राजनीतिक दल डरी हुई थी और नारायणन को इसका लाभ मिला. नारायणन भारत के दसवें राष्ट्रपति बनें. वे देश के पहले दलित राष्ट्रपति थे.

अटल सरकार के दो प्रस्ताव को लौटाए

साल 1998 में लोकसभा चुनाव हुए. अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी. 1999 में वाजपेई सरकार ने राष्ट्रपति भवन एक पत्र भेजा. पत्र में उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने का अनुरोध किया गया था, नारायणन ने यह पत्र सरकार को वापस लौटा दिया.

इसके बाद एक और प्रस्ताव नारायणन के पास आया, जिसे भी नारायणन ने वापस कर दिया. प्रस्ताव था, वीर सावरकर को भारत रत्न देने का. नारायणन का मानना था कि सावरकर जैसे विवादित लोगों को भारत रत्न देकर भारत रत्न की महत्ता को खत्म कर सकती है.

राष्ट्रपति चुनाव की दावेदारी वापस ली

साल 2002 में एक बार फिर 11वें राष्ट्रपति को लेकर चुनाव होना था. विपक्ष का मानना था कि नारायणन अपनी भूमिका अच्छे से निभा रहे हैं, इसलिए उन्हें ही दोबारा राष्ट्रपति होना चाहिए. नारायणन ने बयान जारी करते हुए कहा था कि वे सर्वसम्मति से अगर बनेंगे तो ही इस पद पर रहेंगे, लेकिन सत्तारूढ़ दल ने इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जिसके बाद उन्होंने अपनी दावेदारी वापस ले ली.

किताब लेखन

के. आर. नारायणन ने कई पुस्तकें भी लिखीं, जिनमें ‘इण्डिया एण्ड अमेरिका,  ‘एस्सेस इन अंडरस्टैडिंग’, ‘इमेजेस एण्ड इनसाइट्स’ और ‘नॉन अलाइमेंट इन कन्टैम्परेरी इंटरनेशनल निलेशंस’ उल्लेखनीय हैं. साल 2005 में के आर नारायणन का देहांत हो गया.

 

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