Rahul Gandhi

कांग्रेस के राजकुमार राहुल गांधी की जिंदगी से जुड़े राज जानिये

Vyakti Vishesh

राहुल गाँधी का बचपन अपनी दादी इंदिरा गाँधी के साथ बीता. 19 जून, 1970 को राहुल गांधी का जन्म हुआ. वो राजीव गांधी और सोनिया गांधी के बेटे और इंदिरा गांधी के पोते हैं. इंदिरा गांधी की जीवनी लिखने वालीं कैथरीन फ़्रैंक ने लिखा है कि

बचपन से ही प्रियंका और राहुल अक्सर सुबह उनके निवास के लॉन में होने वाले दर्शन दरबार में उनके साथ हुआ करते थे. इस दरबार में वो आम लोगों से मिलती थीं. रात में भी वो इन दोनों को अक्सर अपने ही शयन-कक्ष में सुलाती थीं.

राहुल गांधी की पढ़ाई

राहुल गांधी की शुरुआती पढ़ाई पहले दून स्कूल में हुई और फिर इसके बाद दिल्ली के मशहूर सेंट स्टीफेंस कॉलेज में.  इसके बाद वो अमेरिका चले गए जहाँ उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र के छात्र के रूप में दाख़िला लिया.  सुरक्षा कारणों से उन्हें हार्वर्ड से हट कर विंटर पार्क, फ़्लोरिडा के एक कॉलेज में दाख़िला लेना पड़ा. वहाँ से उन्होंने 1994 में अंतरराष्ट्रीय संबंधों में डिग्री ली.

इसके बाद वो केंब्रिज विश्वविद्यालय के मशहूर ट्रिनिटी कॉलेज चले गए. वहाँ से उन्होंने 1995 में डेवलपमेंट स्टडीज़में एमफ़िलकिया. इसके बाद वो लंदन में दुनिया में ब्रैंड स्ट्रेटेजीकी बड़ी कंपनी मॉनीटर ग्रुपमें नौकरी करने लगे. उन्होंने इस कंपनी में अपना नाम बदल कर तीन साल तक नौकरी की. जब तक वो वहाँ रहे उनके साथियों को इसकी भनक भी नहीं लग पाई कि वो इंदिरा गाँधी के पोते के साथ काम कर रहे हैं.

राहुल की भारत वापसी

वर्ष 2002 में राहुल वापस भारत लौटे. उन्होंने कुछ लोगों के साथ मिल कर मुंबई में एक कंपनी शुरू की, ‘बैकॉप्स सर्विसेज़ लिमिटेड.वर्ष 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में दिए गए हलफ़नामे में उन्होंने साफ़ लिखा कि इस कंपनी में उनके 83 फ़ीसदी शेयर हैं.

राजनीति में राहुल

राहुल जब पहली बार 2004 में राजनीति में आए तब वो भारतीय राजनीति के हिसाब से बच्चे ही थे. हालांकि तब उनकी उम्र 34 साल की हो चुकी थी. हालांकि गांधी परिवार के अधिकतर शख्स शुरुआती उम्र में ही राजनीति में आए. जब इंदिरा गाँधी कांग्रेस की अध्यक्ष बनी थीं तो वो सिर्फ़ 42 साल की थीं. संजय गांधी ने जब अपना पहला चुनाव 30 साल की उम्र में लड़ा. राजीव गांधी जब राजनीति में आए तब सिर्फ 36 साल के थे.

राहुल गांधी ने अपने पिता राजीव गांधी की सीट अमेठी से 2004 लोकसभा चुनाव लड़ा और वहां एक लाख से भी ज्यादा वोटों के अंतर से जीते. उनकी मां सोनिया गांधी पहले इस सीट से लड़ती थीं. राहुल गांधी के आने के बाद सोनिया ने बगल की राय बरेली सीट से चुनाव लड़ा.

2009 लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी फिर से अमेठी सीट से चुनाव लड़े और 3 लाख 70 हजार से भी ज्यादा वोटों के अंतर से चुनाव जीते. उस साल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस ने 80 में से 21 लोकसभा सीटें जीतीं. राहुल गांधी ने छह हफ्तों में 121 चुनावी रैलियां की. कांग्रेस फिर सत्ता में आई और इसका श्रेय राहुल गांधी को दिया गया. 2009 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 543 में से 206 सीटें जीती थीं.

राहुल की गिरफ्तारी

मई 2011 में उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें भट्टा परसौल गांव में गिरफ्तार कर लिया. वो किसानों के प्रदर्शन का समर्थन करने पहुंचे थे.

लोकसभा चुनाव 2014

2014 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस इतिहास का सबसे बुरा चुनाव था. 543 लोकसभा सीटों में पार्टी को सिर्फ 44 सीटें ही मिलीं. सीटों की संख्या इतनी कम थी की पार्टी को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद भी नहीं मिला. राहुल गांधी अमेठी सीट से चुनाव लड़े और एक लाख 7 हजार वोटों से उन्होंने बीजेपी की स्मृति ईरानी को चुनाव हराया. इस चुनाव में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में सिर्फ दो सीटें ही मिलीं. अमेठी और राय बरेली. यानी की सिर्फ राहुल गांधी और सोनिया गांधी जीते. UPA गठबंधन ने भी काफी बुरा प्रदर्शन किया. 2009 में 262 सीट जीतने वाली यूपीए ने सिर्फ 59 सीटें जीतीं.

बॉक्सिंग, शूटिंग और पैराग्लाइडिंग के शौकीन

भारतीय खेल प्राधिकरण ने 2008 की गर्मियों में उस समय के भारत के सबसे बड़े बॉक्सिंग कोच और द्रोणाचार्य अवॉर्ड विजेता ओम प्रकाश भारद्वाज को फोन किया. उनसे कहा गया कि 10, जनपथ से एक साहब आपको फोन करेंगे. कुछ देर बाद ही पी माधवन ने उन्हें फोन किया और राहुल गांध को बॉक्सिंग सिखाने के लिए कहा. ओम प्रकाश भारद्वाज राजी हो गये.

जब फ़ीस की बात आई तो भारद्वाज ने सिर्फ़ ये मांग की कि उन्हें उनके घर से पिककरा लिया जाए और ट्रेनिंग के बाद उन्हें वापस उनके घर छोड़ दिया जाए. भारद्वाज ने 12 तुग़लक लेन के लॉन पर राहुल गांधी को मुक्केबाज़ी की ट्रेनिंग दी.

राहुल ने तैराकी, स्क्वॉश, पैराग्लाइडिंग और निशानेबाज़ी में भी महारत हासिल की.

कुंवारे क्यों हैं राहुल

अभी 48 साल की उम्र तक राहुल गाँधी ने शादी नहीं की है. इस विषय पर बात करने से वो बचते रहे हैं. वर्ष 2004 में वृंदा गोपीनाथ से बात करते हुए उन्होंने पहली बार स्वीकार किया था कि उनकी महिला मित्र का नाम वेरोनीक है न कि ज्वानिता.

उन्होंने बताया, “वो स्पैनिश हैं न कि वेनेज़ुएला निवासी. वो वास्तुविद् हैं न कि किसी रेस्तराँ में वेटरेस. हालांकि, वो अगर वेटरेस भी होतीं, तो मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. वो मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी हैं.”

उसके बाद से उनकी गर्ल फ़्रेंडके बारे में कयास तो लगते रहे हैं, लेकिन कोई बात खुल कर सामने नहीं आई है.

पप्पू कैसे बनें?

शुरुआती दौर में जब राहुल गांधी राजनीति में आए तब वो ज्यादा बोलते नहीं थे. उनकी चुप्पी की वजह से ही इन अफ़वाहों को भी बल मिला कि उनमें कोई स्पीच डिफ़ेक्टहै, हालांकि ये बात पूरी तरह से ग़लत थी.

इंटरनेट तेजी से बढ़ रहा था और दक्षिणपंथी विरोधियों ने उन्हें पप्पू कहकर मजाक उड़ाना शुरू किया. उस ज़माने में ही बॉलीवुड की एक फ़िल्म आई थी और पप्पू पास हो गया.‘ 2008 में ही एक और बॉलीवुड फ़िल्म का एक गाना बहुत मशहूर हुआ था पप्पू कान्ट डांस…

उसी साल दिल्ली विधानसभा के चुनाव के मौके पर चुनाव आयोग ने एक मुहिम चलाई थी पप्पू कान्ट वोट.इनका मतलब ये था कि पप्पू एक ऐसा शख़्स है जो ज़रूरी काम करने के बजाए फ़ालतू की चीज़ें करता रहता है.

उनके नेतृत्व में कांग्रेस बीजेपी से एक के बाद एक राज्य हारती चली जा रही थी. बीजेपी के हलकों में एक मज़ाक भी प्रचलित हो चला था, “हमारे तो तीन प्रचारक हैं, मोदी, अमित शाह और राहुल गाँधी.”

राहुल की राजनीतिक अपरिपक्वता

19 मार्च 2007 में उन्होंने देवबंद में एलान किया कि अगर 1992 में नेहरू परिवार सत्ता में होता तो बाबरी मस्जिद को कभी नहीं गिराया जा सकता था.उस समय नरसिम्हा राव की कांग्रेस सरकार केंद्र में सत्ता में थी.

राहुल ने आगे कहा

मेरे पिता ने मेरी माँ से कहा था कि अगर कभी बाबरी मस्जिद को गिराने की बात आएगी, तो मैं उसके सामने खड़ा हो जाऊंगा. उन्हें बाबरी मस्जिद को गिराने से पहले मुझे मारना होगा.” 

उस समय के विश्लेषकों की नज़र में राहुल गाँधी का ये बयान राजनीतिक अपरिपक्वता का एक नमूना था.

कांग्रेस अध्यक्ष

16 दिसंबर साल 2017 को राहुल गांधी ने बतौर कांग्रेस अध्यक्ष पद संभाला. उन्होंने सोनिया गांधी की जगह ली. कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने अपने व्यक्तित्व में काफी परिवर्तन किया. अब वो मंदिर जाते हैं. कैलाश मानसरोवर जाते हैं. जनेऊ दिखाते हैं. यानी की उन्होंने नरम हिंदुत्व को प्रदर्शित किया.

राष्ट्रीय राजनीति में स्वीकार्यता

साल 2018 राहुल गांधी के लिए राहत भरा रहा. उन्होंने बीजेपी से तीन बड़े राज्य छीन लिये. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में उन्होंने जीत कर इतिहास रच दिया. उन्होंने कर्नाटक में बीजेपी के मुंह से सत्ता छीन ली. इन राजनीतिक जीतों ने राष्ट्रीय राजनीति में राहुल गांधी की स्वीकार्यता को बढ़ा दिया.