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सरकारी बॉन्ड क्या है, इलेक्टोरल बॉन्ड क्या है ?

Explainer

बॉन्ड एक डेब्ट सिक्योरिटी है जो IOU यानी की इंस्ट्रूमेंट ऑफ अंडरस्टैंडिग जैसी ही है. निवेशक पैसा जुटाने के लिए बॉन्ड जारी करते हैं. जो एक निश्चित समय के लिए होता है. जब आप बॉन्ड खरीदते हैं तो आप जारी करने वाले को पैसे उधार दे रहे होते हैं. जो कि एक सरकारसंस्था या कोई कंपनी भी हो सकती है.

इलेक्टोरल बॉन्ड क्या है

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वित्त बिल, 2017 में इलेक्टोरल बॉन्ड को पेश किया था. इलेक्टोरेल बॉन्ड राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने के लिए लाया गया था. इसके जरिये आम आदमी राजनीतिक पार्टियों को चंदा दे सकेगा.

सरकार की ओर से आरबीआई ये बॉन्ड्स जारी करेगा. दान देने वाला बैंक से बॉन्ड खरीदकर किसी भी पार्टी को दे सकता है. फिर राजनीतिक पार्टी अपने खाते में बॉन्ड भुना सकेगी. बॉन्ड से पता नहीं चलेगा कि चंदा किसने दिया.

बॉन्ड में तीन खिलाड़ी

पहला डोनरजो राजनीतिक दलों को फंड डोनेट करना चाहता है. जो व्यक्तिसंस्था या कंपनी हो सकती है.

दूसरा देश के राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीतिक दल.

तीसरादेश का केन्द्रीय बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया.

ये बॉन्ड भारतीय स्टेट बैंक से मार्चअप्रैलमईजुलाई और अक्टूबर में खरीदे गए. इसकी छठी किश्त नवंबर में बिकनी शुरू होगी. बॉन्ड की मियाद 15 दिनों की हैयानी खरीदने के 15 दिन बाद पॉलिटिकल पार्टी को बॉन्ड दे देना है वो भी पंजीकृत राजनीतिक दल को. पार्टी भी इन्हें सिर्फ अधिकृत बैंक खाते के जरिए ही भुना सकेगी. खरीदने वाले का KYC जरुरी होगा. ये बॉन्ड उन्हीं पंजीकृत राजनीतिक दलों को दिए जा सकेंगे जिन्हें पिछले चुनाव में कम से कम एक फीसदी वोट मिला.

इलेक्टोरल बॉन्ड कहां मिलेंगे

इलेक्टोरल बॉन्ड भारतीय स्टेट बैंक की चुनिंदा शाखाओं से मिलेंगे. जिन 29 शाखाओं से बॉन्डस खरीदे जा सकते हैं, वे नई दिल्ली, गांधीनगर, चंडीगढ़, बैंगलोर, भोपाल, मुंबई, जयपुर, लखनऊ, चेन्नई, कलकत्ता और गुवाहाटी में हैं. इन बॉन्ड्स को भारत का कोई भी नागरिक, कंपनी या संस्था चुनावी चंदे के लिए खरीद सकेंगे. ये बॉन्ड एक हजार, दस हजार, एक लाख और एक करोड़ रुपये तक हो सकते हैं.

अब तक कितने बॉन्ड बिके

एक आर टी आई के जवाब बैंक द्वारा उपलब्ध करवाए गए ब्यौरे के अनुसारमार्च 2018 में बैंक ने 222 करोड़ रुपये से अधिक के बांड बेचे. अप्रैल में ये बिक्री 114.9 करोड़ रुपये रही.

बॉन्ड खरीदने से फायदा

अगर आप इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदते हैं तो उस अमाउंट पर टैक्स में छूट भी मिलेगी. इसके लिए मार्च 2018 में RPA एक्ट यानी की रिप्रजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट में संशोधन किया गया. यदि किसी राजनीतिक पार्टी को 2000 रुपये से ज्यादा का चुनावी बॉन्ड मिलता है तो पार्टी को चुनाव आयोग को बताना होगा. हालांकि दूसरे बॉन्ड की तरह इस पर आपको कोई रिटर्न नहीं मिलेगा. ये राजनीतिक पार्टियों को दिये गये दान की तरह ही है.

इलेक्टोरल बॉन्ड पर चुनाव आयोग

इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 12 अप्रैल 2019 को फैसला सुनाया. कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें केंद्र ने चुनाव तक इसमें हस्तक्षेप करने की मांग की थी.

अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी राजनीतिक दलों को इलेक्शन कमीशन के समक्ष इलेक्टोरल बॉन्ड्स की जानकारी देनी होगी. इसके साथ राजनीतिक दलों को बैंक डीटेल्स भी देना होगा. अदालत ने कहा है कि राजनीतिक दलआयोग को एक सील बंद लिफाफे में सारी जानकारी दें.

यानी की उन्हें किस व्यक्ति ने कितने पैसे का चुनावी बॉन्ड दिया है. कोर्ट ने आदेश दिया की राजनीतिक दल 30 मई से पहले चुनाव आयोग को ये जानकारी दें.