Political Party

राजनीतिक दल किसे कहते हैं, राष्ट्रीय पार्टी क्या है, क्षेत्रीय पार्टी क्या है?

Explainer

भारत का निर्वाचन आयोग, देश में चुनाव लड़ने के लिए राजनीतिक दलों को पंजीकृत करता है और चुनाव में उनके प्रदर्शन के आधार पर उनको राष्ट्रीय या प्रदेश स्तरीय राजनीतिक दल के रूप में मान्यता प्रदान करता है. 15 अप्रैल 2019 की तारीख में चुनाव आयोग की वेबसाइट पर राष्ट्रीय दलों की संख्या 7, राज्य स्तरीय दलों की संख्या 35 और गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत राजनीतिक दलों की संख्या 2044 थी.

तीन तरह के राजनीतिक दल

भारतीय चुनाव आयोग ने किसी भी पार्टी को राष्ट्रीय या राज्य स्तर की पार्टी के रूप में मान्यता देने के लिए कुछ मानदंड निर्धारित किए हैं. भारत में तीन तरह के राजनीतिक दल हैं.

  1. राष्ट्रीय दल
  2. राज्य स्तरीय दल
  3. भारत में क्षेत्रीय दल

अप्रैल 2019 तक भारत में राष्ट्रीय पार्टियों की संख्या 7 है, राज्य के मान्यता प्राप्त दलों की संख्या 35 है और भारत में क्षेत्रीय दलों की संख्या लगभग 329 हैं.

भारत का निर्वाचन आयोग जिन राजनीतिक दलों को मान्यता देता है उनको कुछ विशेष अधिकार और सुविधाएँ भी देता है जैसे, पार्टी को चुनाव चिन्ह का आवंटन करना, निर्वाचन सूचियों को प्राप्त करने की सुविधा, चुनाव के कुछ समय पहले उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर टेलीविज़न और रेडियो प्रसारण करने की अनुमति देना ताकि वे अपनी बात को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहंचा सकें.

राष्ट्रीय पार्टी की मान्यता पाने के लिए क्या शर्तें हैं?

  1. यदि कोई पार्टी कम से कम 3 विभिन्न राज्यों को मिलाकर लोकसभा की 2% सीटें (2014 के चुनाव के अनुसार 11 सीटें) जीतती है. या
  2. यदि कोई पार्टी 4 लोकसभा सीटों के अलावा लोकसभा या विधान सभा चुनाव में चार राज्यों में 6% वोट प्राप्त करती है. या
  3. यदि कोई पार्टी चार या चार से अधिक राज्यों में क्षेत्रीय पार्टी के रूप में मान्यता रखती है.

राज्य स्तरीय दल की मान्यता पाने के लिए शर्तें क्या हैं?

  1. यदि कोई पार्टी राज्य विधानसभा की कुल सीटों में से कम-से-कम 3% सीट या कम-से-कम 3 सीटें, जो भी ज्यादा हो प्राप्त करती है. या
  2. यदि कोई पार्टी लोकसभा के लिए उस राज्य के लिए आवंटित प्रत्येक 25 सीटों या उस संख्या की किसी भिन्न के पीछे कम से कम 1 सीट प्राप्त करती है. या
  3. यदि कोई पार्टी लोकसभा या राज्य विधानसभा के चुनाव में कुल वैध मतों में से कम से कम 6% मत प्राप्त करती है और साथ ही कम से कम 1 लोकसभा सीट या 2 विधानसभा सीट जीतती है. या
  4. एक अन्य मापदंड के अनुसार यदि कोई पार्टी लोकसभा या राज्य विधानसभा के आम चुनाव में किसी राज्य में एक भी सीट जीतने में विफल रहती है लेकिन वह उस राज्य में डाले गए कुल वैध मतों में से 8% मत प्राप्त करती है, तो उस राज्य में उस पार्टी को क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा दिया जा सकता है.

गैर मान्यता प्राप्त दल

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि देश में अन्य पंजीकृत राजनीतिक दल भी हैं जिनको चुनाव आयोग के पास पंजीकृत तो किया जाता है लेकिन गैर मान्यता प्राप्त दल घोषित किया जाता है. देश में गैर मान्यता प्राप्त दलों की संख्या लगभग 2293 है.

देश में राष्ट्रीय पार्टियां

भारतीय चुनाव आयोग के मुताबिक भारत में फिलहाल 7 राष्ट्रीय पार्टियां हैं.

  1. बहुजन समाज पार्टी (बसपा)
  2. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस)
  3. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)
  4. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा)
  5. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी माकपा
  6. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा)
  7. अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस

चुनाव चिन्ह का प्रयोग

जिन राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय या प्रदेश स्तरीय राजनीतिक दलों के रूप में मान्यता प्राप्त होती है उनके दिए गये चुनाव चिन्हों का प्रयोग कोई और राजनीतिक दल नहीं कर सकता है.

यहाँ पर शर्त यह है कि राज्य स्तर की पार्टी का चुनाव चिन्ह (जिस राज्य में वह राज्य पार्टी के रूप में रजिस्टर्ड है) उस राज्य में किसी अन्य पार्टी के द्वारा उपयोग नहीं किया जायेगा.

राष्ट्रीय पार्टियों को मिलने वाली सुविधाएं

भारत का निर्वाचन आयोग जिन राजनीतिक दलों को मान्यता देता है उनको कुछ विशेष अधिकार और सुविधाएँ भी देता है.

  1. राष्ट्रीय पार्टी को विशिष्ट चुनाव चिन्ह का आवंटन किया जाता है. राष्ट्रीय पार्टी के चुनाव चिन्ह को पूरे देश में किसी अन्य पार्टी के द्वारा प्रयोग नहीं किया जा सकता है.
  2. मान्यता प्राप्त `राज्य और` राष्ट्रीयदलों को नामांकन दाखिल करने के लिए केवल एक प्रस्तावक (proposer) की आवश्यकता होती है.
  3. मान्यता प्राप्त `राज्य और` राष्ट्रीयदलों को चुनाव आयोग की तरफ से (मतदाता सूची के संशोधन की दशा में) मतदाता सूची के दो सेट मुफ्त में दिए जाते हैं. साथ ही इन पार्टियों से चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को आम चुनावों के दौरान मतदाता सूची की एक प्रति मुफ्त मिलती है.
  4. इन दलों को अपने पार्टी कार्यालय स्थापित करने के लिए सरकार से भूमि या भवन प्राप्त होते हैं.
  5. उनके पास चुनाव प्रचार के दौरान 40 स्टार प्रचारक तक हो सकते हैं जबकि राज्य पार्टियाँ ’20 स्टार प्रचारकोंको रख सकतीं हैं. स्टार प्रचारकों का यात्रा खर्च उनकी पार्टी के उम्मीदवारों के चुनाव खर्च के हिसाब में नहीं जोड़ा जाता है.
  6. चुनाव के कुछ समय पहले उन्हें राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर टेलीविज़न और रेडियो प्रसारण करने की अनुमति देना ताकि वे अपनी बात को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहंचा सकें.

राष्ट्रीय पार्टियां और राज्य पार्टियों की समीक्षा

चुनाव आयोग ने 22 अगस्त, 2016 को एक नियम में संशोधन किया था, जिसके तहत अब यह पांच के बजाय हर 10 साल में राजनीतिक दलों की राष्ट्रीय और राज्य की स्थिति की समीक्षा की जाएगी. अर्थात 2016 तक जो दल राष्ट्रीय पार्टीज का दर्जा पा चुके हैं वे 2026 तक इसे बनाये रख सकेंगे हालाँकि नई पार्टियाँ इसमें जोड़ी जा सकेंगीं.

किसी पार्टी को रजिस्टर्ड पार्टी की लिस्ट से हटाने की मांग कानून मंत्रालय के पास पेंडिंग है लेकिन चुनाव आयोग ने आर्टिकल 324 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए उन कंपनियों का रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर दिया है जो कि बहुत समय से निष्क्रिय हैं और लंबे समय से चुनाव नहीं लड़ रही हैं.