Pragya Singh Thakur

प्रज्ञा सिंह ठाकुर कौन हैं, मालेगांव ब्लास्ट से सासंद बनने तक का सफर

Vyakti Vishesh

साध्वी प्रज्ञा का पूरा नाम प्रज्ञा सिंह ठाकुर है. साध्वी प्रज्ञा का जन्म मध्यप्रदेश के भिंड में हुआ था, उनके पिता आर्युवेदिक डॉक्टर हैं. साध्वी प्रज्ञा के पिता संघ से जुड़े थे, जिस वजह से साध्वी का भी झुकाव संघ की तरफ रहा. बाद में साध्वी राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ की छात्र ईकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ीं. धीरे-धीरे साध्वी की पहचान बढ़ी और उन्होंने विद्यार्थी परिषद छोड़कर साध्वी बनने का फैसला किया.

साध्वी प्रज्ञा पहली बार सुर्खियों में कब आईं?

साध्वी प्रज्ञा पहली बार साल 2008 में हुए मालेगांव ब्लास्ट मामले के बाद सुर्खियों में आईं. महाराष्ट्र के मालेगांव में अंजुमन चौक और भीकू चौक के बीच शकील गुड्स ट्रांसपोर्ट के सामने 29 सितंबर 2008 की रात 9.35 बजे बम धमाका हुआ था जिसमें छह लोग मारे गए और 101 लोग घायल हुए थे.

इस धमाके में एक मोटरसाइकिल इस्तेमाल की गई थी. एनआईए की रिपोर्ट के मुताबिक यह मोटरसाइकिल प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर थी. महाराष्ट्र एटीएस ने हेमंत करकरे के नेतृत्व में इसकी जांच की और इस नतीजे पर पहुँची कि उस मोटरसाइकिल के तार गुजरात के सूरत और अंत में प्रज्ञा ठाकुर से जुड़े थे.

हालांकि साध्वी ने ये दावा किया कि इस बाइक को उन्होंने 2004 में ही बेच दिया था. 24 अक्टूबर 2008 को साध्वी प्रज्ञा की गिरफ्तारी हुई, 4 नवंबर 2008 को एटीएस ने सेना के एक अधिकारी कर्नल श्रीकांत पुरोहित और सेवानिवृत मेजर रमेश उपाध्याय को अरेस्ट किया. उनका आरोप था कि अभिनव भारत संगठन से वो जुड़े थे, इस संगठन ने हथियार और गोला बारुद खरीदे जिसका इस्तेमाल मालेगांव ब्लास्ट में किया गया था. सथ ही सुधाकर द्विवेदी उर्फ दयानंद पांडेय को भी गिरफ्तार किया गया.

मोटरसाइकिल से प्रज्ञा का कनेक्शन

एटीएस चार्जशीट के मुताबिक प्रज्ञा ठाकुर के ख़िलाफ़ सबसे बड़ा सबूत मोटरसाइकिल उनके नाम पर होना था. इसके बाद प्रज्ञा को गिरफ़्तार किया गया. उन पर महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण क़ानून यानी की मकोका लगाया गया. चार्जशीट के मुताबिक जांचकर्ताओं को मेजर रमेश उपाध्याय और लेफ़्टिनेंट कर्नल पुरोहित के बीच एक बातचीत पकड़ में आई जिसमें मालेगांव धमाके मामले में प्रज्ञा ठाकुर के किरदार का ज़िक्र था.

मामले की शुरुआती जांच महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते ने की थी, जिसे बाद में एनआईए को सौंप दी गई थी. एनआईए की चार्जशीट में उनका नाम भी डाला गया.

मालेगांव ब्लास्ट की जांच में सबसे पहले 2009 और 2011 में महाराष्ट्र एटीएस ने स्पेशल मकोका कोर्ट में दाखिल अपनी चार्जशीट में 14 अभियुक्तों के नाम दर्ज किये थे. एनआईए ने जब मई 2016 में अपनी अंतिम रिपोर्ट दी तो उसमें 10 अभियुक्तों के नाम थे.

इस चार्जशीट में प्रज्ञा सिंह को दोषमुक्त बताया गया. साध्‍वी प्रज्ञा पर लगा मकोका (MCOCA) हटा लिया गया और कहा गया कि प्रज्ञा ठाकुर पर करकरे की जांच असंगत थी. इसमें लिखा गया कि जिस मोटरसाइकिल का ज़िक्र चार्जशीट में था वो प्रज्ञा के नाम पर थी, लेकिन मालेगांव धमाके के दो साल पहले से कलसांगरा इसे इस्तेमाल कर रहे थे.

कैसे मिली थी साध्वी प्रज्ञा को बेल?

मालेगांव ब्लास्ट मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने कर्नल पुरोहित और साध्वी प्रज्ञा समेत 14 लोगों को आरोपी बनाया था. 2017 में साध्वी प्रज्ञा को बॉम्बे हाईकोर्ट से जमानत मिली थी.

कोर्ट से साध्वी को जमानत मिलने की बड़ी बजह थी कि वो ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित हैं. करीब 8 साल तक जेल में रहने के दौरान वो इस बीमारी की शिकार हुईं. उस वक्त जो उनकी मेडिकल रिपोर्ट दी गई थी, उसमें दावा किया गया था कि वो बिना सपोर्ट के चल भी नहीं सकती हैं. वहीं साध्वी के खिलाफ पर्याप्त सबूत भी नहीं मिले थे, जिससे उनको जमानत मिलने में आसानी हुई.

भोपाल से सांसद

2019 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल से चुनाव मैदान में उतारा. उनके खिलाफ कांग्रेस के दिग्विजय सिंह चुनाव लड़ रहे थे. दिग्विजय सिंह ने ही भगवा आतंक की थ्योरी दी थी. इसलिए मुकाबला कड़ा माना जा रहा था लेकिन प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने आसानी से जीत हासिल कर ली.