राजस्थान के Bhilwara में अब एक भी कोरोना पॉजिटिव केस नहीं, आखिर क्या है Bhilwara Model?

Explainer Health

राजस्थान का भीलवाड़ा देश का इकलौता ऐसा इलाका था, जहां  कोरोना की थर्ड स्टेज ने सबसे पहले दस्तक दे दी थी. भीलवाड़ा में अब तक 28 केस आए थे, जिनमें से 26 ठीक हो गए जबकि 2 की मौत हो गई. लेकिन आज उसी भीलवाड़ा में एक भी कोरोना पॉजिटिव केस नहीं हैं. आखिर भीलवाड़ा ने क्या किया ऐसा, जिससे आज पूरे देश में इस वक्त कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए भीलवाड़ा मॉडल की चर्चा हो रही है.

राजस्थान सरकार की इस मॉडल को लेकर देशभर में तारीफ हो रही है. आइये जानते हैं, आखिर ये भीलवाड़ा मॉडल क्या है, भारत और कोरोना के इस जंग में यह उम्मीद की किरण क्यों साबित हो रहा है.

राजस्थान की राजधानी जयपुर से 250 किलोमीटर दूर एक जगह है भीलवाड़ा , ये जगह पिछले कुछ दिनों से देशभर के चिंता का विषय बना हुआ था , वो इसलिए क्योंकि वहां पर हॉस्पिटल में काम करने वाले एक डॉक्टर को कोरोना का इंफेक्सन था और उस डॉकटर ने जिले के तकरीबन 3000-4000 लोगों को चेक भी कर लिया था.

ये खबर तेजी से फैल गई और लोगों में डर बैठ गया कि अगर वो 3000-4000 लोग जिनका चेकअप उस डॉक्टर ने किया है, अब वे जिन जिन से मिलेंगे उन्हे भी वायरस से संक्रमित होने का खतरा हो सकता है. ऐसी स्थिति में राज्य सरकार ने तुरंत एक्शन लेते हुए राज्य के अंदर जो मॉडल अपनाया, उस मॉडल को अब पूरे देश में अपनाने की बात चल रही है. इस मॉडल के कारण कभी राजस्थान का हॉटस्पॉट माना जाने वाला भीलवाड़ा जिला आज ये सुर्खियां बटोर रहा है कि इस जिले में 7 दिनों में केवल 1 संक्रमित मरीज मिले है.

तो सवाल ये है कि आखिर भीलवाड़ा ने ऐसा क्या किया कि 20 दिन पहले तक देश भर की चिंता का विषय बना यह जिला आज पूरे देश को वहीं मॉडल अपनाने पर मजबूर कर रहा है, जो इसने अपनाया था. आइए जानते हैं-

अप्रैल के शुरुआती सप्ताह में सबसे पहले भीलवाड़ा में कोरोना पॉजिटिव का एक मरीज मिला . इससे पहले भी 2 संक्रमित केस मिल चुके थें. भीलवाड़ा देश के 10 कोरोना हॉटस्पॉट में शुमार था. राजस्थान में जब कोरोना के कुल 18 केस थे तब इनमें से 12 अकेले भीलवाड़ा में थे. लेकिन भीलवाड़ा जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने मिलकर स्थिति को संभाला.

सबसे पहले पूरे शहर में कर्फ्यू लगाया. ब्रजेश बांगड़ अस्पताल जहां पहला पॉजिटिव मरीज एक डॉक्टर का पता चला था उसके संपर्क में आए करीब छह हजार लोगों को लिस्ट बनाकर तलाशा गया. दो दिन के अंदर ही सभी की पहचान की गई और उन्हें आइसोलेट किया गया ताकि कोरोना की कड़ी टूट सके. प्रशासन ने घरों में जरूरी सामान की पहुंच निश्चित की. पुलिस ने कर्फ्यू तोड़ने वाले 600 वाहनों को जब्त भी किया.

बेहद सख्ती के साथ लॉकडाउन और कर्फ्यू के साथ-साथ पूरे जिले की करीब 30 लाख लोगों की तीन बार स्क्रीनिंग करवाई गई , भीलवाड़ा के एमजी अस्पताल के अधीक्षक अरुण गौड़ का कहना था कि हमने 25 कोरोना पॉजिटिव मरीजों को ठीक कर दिया है. इनमें से 15 को डिस्चार्ज भी कर दिया गया है और 10 मरीज जो जनरल वार्ड में शिफ्ट किए जा चुके हैं, उनकी तीसरी रिपोर्ट आना बाकी है. वहीं, 24 ऐसे मरीज भी भर्ती किए गए हैं, जिनमें थोड़े लक्षण दिखाई दिए हैं, लेकिन ये पॉजिटिव नहीं हैं. इनका इलाज चल रहा है.

गौड़ आगे बताते हैं, ‘भीलवाड़ा के हर विभाग के अधिकारियों से लेकर जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ता ने पूरे जज्बे और ईमानदारी से काम किया है.’

भीलवाड़ा के डीएम राजेन्द्र भट्ट के अनुसार लॉकडाउन का समय उन्होंने थोड़े दिन के लिए बढ़ाया. प्रशासन ही घरों तक दूध, दवाई और खाने की अन्य चीजें उपलब्ध करा रहा है. किसी को कोई समस्या नहीं हो रही. लोगों को अगर किसी भी चीज की जरूरत है, वे हमें कॉल कर रहे हैं. इसके लिए प्रशासन ने 5 कंट्रोल रूम भी बनाए हैं.

भीलवाड़ा प्रशासन ने हालातों को देखते हुए जिले के 42 अस्पताल, होटलों में क्वारंटीन करने के लिए 1551 बेड की व्यवस्था की. यही कारण है कि बीते 10 दिनों में यहां सिर्फ एक कोरोना पॉजिटिव मरीज पाया गया है. और आज ये मॉडल पूरे देश के लिए इंस्पिरेशन और उम्मीद दोनों का काम कर रहा है