Darbar move

Darbar Move: जम्मू और कश्मीर में होने वाला दरबार मूव क्या है?

Explainer

दरबार मूव लगभग डेढ़ शताब्दी पूर्व से चली आ रही एक प्रथा है. जिसे जम्मू कश्मीर के महाराजा रणबीर सिंह ने साल 1872 में शुरू की थी. महाराजा रणबीर सिंह, जम्मू और कश्मीर राज्य के संस्थापक राजा गुलाब सिंह के तीसरे बेटे थे. राजा, गर्मियों में अपनी राजधानी श्रीनगर और सर्दियों में जम्मू के बीच स्थानांतरित कर देते थे ताकि मौसम की मार से बचा जा सके. जम्मू कश्मीर की दो राजधानी है. सर्दियों में जम्मू और गर्मियों में श्रीनगर. यानी की जम्मू और कश्मीर की समर कैपिटल मई से अक्टूबर तक श्रीनगर में रहती है और विंटर कैपिटल, नवम्बर से अप्रैल तक जम्मू में रहती है. इस मूवमेंट को दरबार मूव कहा जाता है.

दरबार मूव में क्या होता है

दरबार मूव के तहत सभी प्रशासनिक सचिवों से लेकर इससे जुड़े करीब दस हजार कर्मचारी भी जम्मू से श्रीनगर शिफ्ट होते हैं, इस शिफ्टिंग में कई ट्रकों में फाइल्स ,कंप्यूटर, फर्नीचर और अन्य सामानों को भरकर ले जाया जाता जिसमें लगभग 5 करोड़ का खर्च आता है.

दरबार मूव क्यों होता है?

दरबार मूव के दो कारण हैं. पहला मौसम की विपरीत परिस्तिथियां और दूसरा कर्मचारियों का दबाव. शिफ्ट होने वाले कर्मचारियों में कई जम्मू के कर्मचारी होते हैं जो श्रीनगर शिफ्ट होते हैं, ऐसे ही श्रीनगर के कर्मचारियों के साथ भी होता है. यह दरबार मूव साल में दो बार इसलिए होता है क्योंकि यदि एक जगह पर राजधानी को फिक्स्ड कर दिया जायेगा तो जम्मू के कर्मचारी श्रीनगर में राजधानी का विरोध करेंगे और श्रीनगर के कर्मचारी जम्मू का विरोध करेंगे.

 दरबार मूव स्थगित

इस साल यानी की 2020 में दरबार मूव के तहत 24 अप्रैल को जम्मू में दरबार मूव के कार्यालय जिसमें नागरिक सचिवालय, राजभवन, पुलिस मुख्यालय सहित दरबार से संबंधित अन्य कार्यालय बंद होने हैं.

J&K केंद्र शासित प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में चार मई 2020 को सरकार का दरबार सजाने की तैयारी थी. लेकिन अब कोरोना वायरस की वजह से यह 148 साल पुरानी परंपरा इस साल संपन्न नहीं होगी. यानी अब जो कर्मचारी जहाँ पर है वहीं से काम करेगा.

 जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू ने कहा है कि कोरोना के कारण श्रीनगर सचिवालय के काम को तो 4 मई से शुरू कराने का फैसला कर दिया है, लेकिन कर्मचारियों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया 15 जून तक टाली गयी है.

सचिव फारूक अहमद लोन ने कहा है कि सभी कर्मचारी फिलहाल जहां से काम कर रहे हैं, वह आगे भी वहीं से अपना काम करते रहें. सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस साल श्रीनगर में सचिवालय खुलने के बावजूद जम्मू सचिवालय से कामकाज होता रहेगा या फिर ये कहें कि जम्मू सचिवालय का दरबार श्रीनगर मूव नही करेगा.

सरकार के इस फैसले का पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विरोध किया और कहा है कि जब श्रीनगर में अधिकारी नहीं होंगें, फाइल्स नहीं होंगी तो फिर श्रीनगर सचिवालय को खोलने का क्या मतलब है?