Zoom App

Zoom App क्या है, भारत सरकार ने इसे लेकर क्या एडवाइजरी जारी की है?

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वीडियो मीट ऐप Zoom ने मौजूदा समय में काफी पॉप्युलैरिटी हासिल कर ली है. अब यह ऐप हैकर्स के भी निशाने पर है. यह ऐप हाल ही में भारत में टिकटॉक और वॉट्सऐप को पछाड़ते हुए प्ले स्टोर पर नंबर 1 फ्री ऐप बना था. Lockdown के दौरान बड़ी संख्या में लोग इस ऐप इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत में इस ऐप को 5 करोड़ से ज्यादा बार डाउनलोड किया जा चुका है. आज आपको अपने वीडियो में बताएंगे आखिर ये zoom ऐप क्या है ? इसके फीचर्स क्या हैं? और चर्चा में क्यों है?

ऐसे समय में जब देश में लॉकडाउन चल रहा है और कंपनियों ने अपने कर्मचारियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ दे रही है. तो कम्पनियाँ अपने कर्मचारियों से ओफिसिअल वर्क के सिलसिले में Video Conferencing, Skype,WhatsApp इत्यादि के माध्यम से कनेक्टेड रहना चाहतीं हैं. कंपनियों की इन्हीं जरूरतों को पूरा करने के लिए Zoom App काफी मददगार साबित हो रहा है. Zoom App का उपयोग 500,000 से अधिक ग्राहक संगठनों द्वारा किया जा रहा है.

Zoom App एक Video Conferencing ऐप है. जिसमें एक साथ फ्री में 100 लोग Video Conferencing के जरिए बात कर सकते हैं, पैसे देने पर 1000 से ज्यादा लोग एकसाथ जुड़ सकते हैं. इस ऐप के माध्यम से one to one मीटिंग और ग्रुप कॉलिंग की सुविधा 40 मिनट के लिए उपलब्ध है. इसका उपयोग करना बिल्कुल आसान है. इसे एंड्राइड मोबाइल पर फ्री डाउनलोड करें, “होस्ट ए मीटिंग” पर क्लिक करें और 100 लोगों को शामिल होने के लिए आमंत्रित करें.

अब जानते हैं कि Zoom App चर्चा में क्यों है:-

ऐप ज़ूम के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से एडवाइज़री जारी की गई है, जिसमें कहा गया है कि ये ऐप सुरक्षित नहीं है, ऐसे में लोग इसका सावधानी से इस्तेमाल करें. गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया कि सरकार ने पहले भी 6 फरवरी, 30 मार्च को इसको लेकर जानकारी दी थी, ऐसे में लोग इसपर सतर्कता बरतें.

ज़ूम पर बात करने के लिए गृह मंत्रालय ने ये सुझाव दिए हैं, जिनका पालन कर सतर्कता बरती जा सकती है:

  • हर मीटिंग के लिए नई यूजर आईडी, पासवर्ड का इस्तेमाल करें.
  • वेटिंग रूम को एनेबल करें, ताकि कोई भी यूजर तभी कॉल में शामिल हो सके जब कॉन्फ्रेंस करने वाला अनुमति दे.
  • ज्वाइन ऑप्शन को डिसऐबल कर दें.
  • स्क्रीन शेयरिंग का ऑप्शन सिर्फ होस्ट के पास रखें.
  • किसी व्यक्ति के लिए रिज्वाइन का ऑप्शन बंद रखें.
  • फाइल ट्रांसफर के ऑप्शन का कम से कम इस्तेमाल करें.

बता दें कि दफ्तर से लेकर स्कूल कॉलेज के बच्चों के लिए मददगार साबित हुआ इस ऐप की सीक्योरिटी पर सवाल उठने लगें हैं . भारत की कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम और राष्ट्रीय साइबर-सुरक्षा एजेंसी ने कुछ दिन पहले जूम की सिक्योरिटी को लेकर लोगों को आगाह किया था और कहा था कि जूम एप साइबर हमलों का जरिया बन सकता है. इस एप के जरिए साइबर अपराधी सरकारी और निजी कार्यालयों से डाटा चोरी करके उसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं. सीईआरटी ने कहा है कि जूम एप के साथ डाटा लीक का खतरा है.

इसके अलावा ,दि सिटिज़न लैब की टीम ने भी पाया है कि ज़ूम ऐप में कई महत्वपूर्ण कमियां हैं और ये मीटिंग के दौरान संवेदनशील जानकारी शेयर करने के लिए सुरक्षित नहीं है.
इस टीम ने अपने रिसर्च में पाया है कि ज़ूम ऐप एक नॉन-स्डैंडर्ट तरीके का एंक्रिप्शन यूज़ करता है जो सभी जानकारी चीन को भेजता है.

इस रिपोर्ट के आधार पर दि सिटिज़न लैब का कहना है कि ज़ूम ऐप का इस्तेमाल, सरकारों को नहीं करना चाहिए, स्वास्थ्य कर्मचारियों को नहीं करना चाहिए जो संवेदनशील जानकारियों से डील करते हैं, इसके साथ ही मीडिया कर्मचारियों, वकीलों और एक्टिविस्ट को भी इसका इस्तेमाल ना करने की सलाह दी गई है.

जूम के सीईओ एरिक एस युआन ने अपने एक ब्लॉग में बताया है कि दिसंबर 2019 में जूम के डेली एक्टिव यूजर्स की संख्या 10 मिलियन एक करोड़ थी जो मार्च 2020 में 200 मिलियन यानी 20 करोड़ हो गई है. उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनियाभर के 20 देशों के 90,000 से अधिक स्कूल भी जूम एप का इस्तेमाल कर रहे हैं. सीईओ एरिक एस युआन ने सिक्योरिटी को लेकर उठ रहे सवाल पर कहा है कि कंपनी मामले की जांच कर रही है और अगले 90 दिनों में सिक्योरिटी के मसले को हल किया जाएगा. सिक्योरिटी पैच के लिए अपडेट जारी किया जाएगा.

हाल ही में जूम एप के पांच लाख अकाउंट्स के हैक होने की खबर आई है. ब्लीपिंग कंप्यूटर ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि जूम के पांच लाख अकाउंट को हैक कर लिया गया है और डार्क वेब पर मामूली कीमत में लोगों का निजी डाटा बेचा जा रहा है. जूम एप यूजर्स का डाटा हैकर्स फोरम पर बिक रहा है. इसके बारे में सबसे पहले एक अप्रैल को साइबर सिक्योरिटी फर्म Cyble ने जानकारी दी थी

रिपोर्ट के मुताबिक डार्क वेब पर जूम एप यूजर्स का डाटा मामूली कीमत $0.0020 यानी करीब 0.15 प्रति अकाउंट बिक रहा है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यह हैकिंग बकायदा पासवर्ड और आईडी के जरिए हुई है यानी कि हैकर्स को इसके बारे में पहले से जानकारी थी.