बजट से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण शब्द, जिनके मतलब जानना जरूरी है

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में बजट पेश किया. निर्मला सीतारमण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में तीसरी बार बजट पेश करने जा रही हैं. बजट का असर पूरे देश पर पड़ता है ऐसे में बजट को अच्छी तरह समझना बेहद जरूरी है. बजट में कई ऐसे शब्द होते हैं जिसका मतलब बहुत ही कम लोगों को समझ में आ पाता है. आज हम बजट से जुड़े कुछ ऐसे ही शब्दों के मतलब बताने जा रहे हैं.

वित्त विधेयक –

बजट पेश होने के बाद सरकार संसद में वित्त विधेयक प्रस्तुत करती है. जिसमें राजस्व की कमाई की जानकारी होती है.

source- The National

‌‌विनियोग विधेयक –

वित्त विधेयक के साथ विनियोग विधेयक भी पेश किया जाता है, जिसमें सरकार के खर्च की जानकारी या ब्यौरा होता है.

बजट अनुमान –

आने वाले वित्त वर्ष में सरकार की कमाई और खर्च के अनुमान को बजट अनुमान या बजट एस्टिमेट कहते हैं.

संशोधित अनुमान –

सरकार ने पिछले साल जो कमाई और खर्च का अनुमान लगाया था, अगर उसी बजट अनुमान को दोबारा संशोधित करके सरकार पेश करती है, तो इसे संशोधित अनुमान कहते हैं.

एक्चुअल(वास्तविक)-

सरकार ने दो साल पहले जितना कमाया और खर्च किया उसे ही एक्चुअल कहते हैं.

राजकोषीय घाटा-

यदि सरकार की वित्त वर्ष में कमाई कम है और खर्च ज्यादा है तो उसे राजकोषीय घाटा कहते हैं.

source-Orfonline.org

राजकोषीय मुनाफा-

राजकोषीय घाटे का उल्टा राजकोषीय मुनाफा होता है यानी सरकार की कमाई ज्यादा है और खर्च कम है. इस स्थिति में सरकार फायदे में होती है.

राजस्व घाटा-

सरकार ने वित्त वर्ष में जितनी कमाई का लक्ष्य तय किया था अगर उतनी कमाई नहीं हुई है तो उसे राजस्व घाटा कहते हैं.

टैक्स-

बजट का सबसे महत्वपूर्ण शब्द है टैक्स. टैक्स दो प्रकार के होते हैं.

डायरेक्ट टैक्स- सरकार जब जनता से सीधे टैक्स लेती है तो उसे डायरेक्ट टैक्स कहते हैं. जैसे इनकम टैक्स, प्रॉपटी टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स आदि.

इनडायरेक्ट टैक्स- इनडायरेक्ट टैक्स में सरकार जनता से अप्रत्क्ष रूप से टैक्स लेती है जैसे- कस्टम ड्यूटी, एक्साइज ड्यूटी, उपहार कर इत्यादि.

source- GST

कॉर्पोरेट टैक्स-

कॉर्पोरेट सेक्टर की कंपनियों को अपनी कमाई पर टैक्स देना पड़ता है. इसी टैक्स को कॉर्पोरेट टैक्स कहते हैं.

एक्साइज ड्यूटी-

देश के अंदर निर्मित वस्तुओं पर जो टैक्स लगता है उसे उत्पादन शुल्क या एक्साइज ड्यूटी कहते हैं. इसे अब GST में शामिल कर लिया गया है. लेकिन पेट्रोलियम और शराब पर अब भी एक्साइज ड्यूटी लगती है.

कस्टम ड्यूटी-

किसी वस्तु के आयात और निर्यात पर लगने वाले टैक्स को कस्टम ड्यूटी कहते हैं.

समेकित कोष-

सरकार जितना वित्त वर्ष में कमाती है उसे समेकित कोष यानी कंसोलिडेटेड कहते हैं.

राजस्व व्यय-

किसी देश को चलाने के लिए जितने धन की आवश्यकता होती है, उसे रेवेन्यू एक्सपेंडिचर या राजस्व व्यय कहते हैं. जैसे- सब्सिडी, सैलरी, कर्ज देने आदि पर खर्च होने वाला धन.

पूंजीगत व्यय –

पूंजीगत व्यय उसे कहते हैं जिससे सरकार की कमाई होती है. इस कमाई से सरकार स्कूल- कॉलेज, सड़क आदि बनाने में खर्च करती है.

शॉर्ट टर्म गेन –

जब कोई शेयर बाजार में एक वित्त वर्ष से कम समय में पैसा लगाकर उस पर ज्यादा मुनाफा कमा लेता है तो इसे शॉर्ट टर्म कैपिटल कहते हैं.

लॉन्ग टर्न गेन –

जब कोई व्यक्ति शेयर बाजार में एक साल से ज्यादा समय के लिए पैसा लगाकर उस पर मुनाफा कमाता है तो उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल कहते हैं.

विनिवेश-

जब सरकार कुछ सरकारी कंपनियों की शेयर बेच कर जो कमाई करती है उसे विनिवेश कहते है.