Union Budget 2021 : संसद के सत्र से पहले राष्ट्रपति का अभिभाषण कितना जरूरी है, यहां जानिये

29 जनवरी को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण से संसद का सत्र शुरू हो गया. बजट सत्र की यह परंपरा रही है कि बजट पेश करने से एक दिन पहले राष्ट्रपति अभिभाषण देते हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या राष्ट्रपति के भाषण के बिना बजट सत्र शुरू किया जा सकता है? ऐसे ही तमाम सवालों के आज हम जवाब देने जा रहे हैं. गौरतलब है कि 1 फरवरी को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करेंगी.

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ब्रिटिश परंपरा-

संसद को संबोधित करने की परंपरा ब्रिटिश शासन की देन है. ब्रिटेन के इतिहास के मुताबिक यह परंपरा 16वीं शताब्दी से ज्यादा पुरानी है. 16वीं शताब्दी से पहले बिट्रेन में राजा या रानी सदन को संबोधित करते थे. लेकिन साल 1852 के बाद हर साल सदन को रानी संबोधित करती आ रही हैं.

भारतीय संसदीय प्रणाली ब्रिटेन से लिया गया है-

भारतीय संसदीय प्रणाली ब्रिटेन से ली गई है. ब्रिटेन की ज्यादात्तर संसदीय परंपराओं को भारत ने अपनाया है. ब्रिटेन में बजट सत्र की शुरुआत से पहले रानी संबोधित करती हैं, वहीं भारत में राष्ट्रपति बजट से पहले अभिभाषण देते हैं.

संविधान के मुताबिक सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के अभिभाषण से होती है. इसका प्रावधान भारत सरकार अधिनियम,1919 में किया गया है. संविधान के अनुच्छेद 86(1) के अनुसार राष्ट्रपति को यह अधिकार दिया गया है कि वह संसद के दोनों सदनों में अभिभाषण दे सकता है. वहीं संविधान के अनुच्छेद 87(1) में प्रावधान है कि आम चुनाव के बाद पहले सत्र में संसद के दोनों सदनों को राष्ट्रपति संबोधित करेंगे.

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राष्ट्रपति के अभिभाषण के बगैर सत्र की शुरुआत नहीं –

राष्ट्रपति का अभिभाषण संवैधानिक जरूरत है. राष्ट्रपति के अभिभाषण के बिना सत्र शुरू नहीं किया जा सकता. साल में तीन बार सत्र होते हैं. पहला- बजट सत्र, दूसरा- मानसून सत्र और तीसरा- शीतकालीन सत्र.

साल का पहला सत्र, बजट सत्र महत्वपूर्ण होता है. इसमें राष्ट्रपति दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित करते हैं. साल 1950 में संविधान लागू होने के बाद तीनों सत्रों को राष्ट्रपति संबोधित करते थे. लेकिन बाद में इसमें संशोधन किया गया. संशोधन के बाद राष्ट्रपति आम चुनाव के बाद पहले सत्र को संबोधित करने लगे. आम चुनाव के बाद संसद की कार्यवाही राष्ट्रपति के भाषण के बाद ही शुरू होता है. राष्ट्रपति जब-तक दोनों सदनों में अभिभाषण नहीं दे देते तब-तक कोई अन्य कार्य नहीं होता है.

क्या राष्ट्रपति का अभिभाषण जरूरी है

राष्ट्रपति संसद को संबोधित करते हुए, सरकार की नीतियों और कामकाजों के बारे में बताते हैं. गौरतलब है कि राष्ट्रपति का भाषण सरकार ही तैयार करती है. इसलिए इसमें सरकार के एक साल के कामकाजों का लेखा-जोखा होता है.

क्या संविधान में ऐसा कोई प्रावधान है जिसकी मदद से संसद के सदस्य राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सवाल उठा सकते हैं?

संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे संसद के सदस्य राष्ट्रपति के अभिभाषण पर सवाल खड़े कर सकें. लेकिन संसद के सदस्य धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस कर सकते हैं. लेकिन सदस्य बहस के दौरान राष्ट्रपति का नाम नहीं ले सकते हैं.