मैक्सिकों में साल भर में 2127 घंटे काम करते हैं युवा

हाल में ही चीन के लोगों ने अपनी सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की. दरअसल यहां युवाओं से रोजाना 12 घंटे काम सप्ताह के 6 दिन लिया जा रहा है. वैसे आपको बता दे कि चीन दुनिया का इकलौता देश नहीं है जहां कर्मचारियों से ज्यादा काम लिया जा रहा है. यूरोपीय संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) के सर्वे से पता चलता है कि अधिकारिक तौर पर सबसे ज्यादा काम मैक्सिको के युवाओं से लिया जाता है.

मैक्सिकों में साल भर में 2127 घंटे काम करते हैं युवा-

यूरोपीय संगठन ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इकनॉंमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) की रैंकिग के मुताबिक मैक्सिकों सबसे उपर है. य़हां साल भर में एक कर्मचारी 2127 घंटे काम करता है. यहां कंपनियां अपने कर्मचारियों को छुट्टी भी कम देती हैं. बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के अनुसार यहां एक साल में 10 छुट्टियां देने का प्रावधान है. 26.6 प्रतिशत कर्मचारी ज्यादा काम की शिकायत लगातार करते आए हैं. लेकिन इसे लेकर अभी तक मैक्सिकों में कोई सख्त कानून नहीं बना है.

Source- silicon republic

कोस्ट रिका-

मध्य अमेरिका में बसा देश कोस्ट रिका दूसरे स्थान पर आता है. यहां कर्मचारी सालभर में 2060 घंटे काम करते हैं. पहले काम लेने की इस श्रेणी में दक्षिण कोरिया आता था. लेकिन साल 2018 में सरकारी नियामानुसार काम के घंटो को कम कर दिया गया. हालांकि अभी भी दक्षिण कोरिया में हफ्ते में 52 घंटे काम करना पड़ता है.

रूस-

इस श्रेणी में रूस का भी नाम आता है. रूस के युवा भी ज्यादा-ज्यादा घंटे काम करते हैं. यहां सप्ताह में 40 घंटे कर्मचारियों से काम लिया जाता है. अगर कोई व्यक्ति ओवरटाइम करना चाहता है तो उसे 50 घंटे से ज्यादा काम ना लेने का प्रावधान है. इसके अलावा ज्यादात्तर रूसी नागरिक घर से काम करते हैं ताकि वे पैसे बचा सके. रूस में सार्वजनिक छुट्टी के अलावा अलग से 28 छुट्टियां मिलती हैं.

कई देशों ने काम के घंटे को कम करने का दिया निर्देश-

ज्यादा काम की वजह से कर्मचारी अपने परिवार पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं. इससे जन्मदर भी बहुत तेजी के साथ कम हुई है. जिसके कारण दक्षिण कोरिया 3 दशकों के भीतर ही बुजुर्गो का देश बनने की श्रेणी में आ गया है.

काम का दबाव-

चीन की मुख्य ई-कॉमर्स कंपनी पिंडुओडुओ (Pinduoduo) में काम के दबाव के कारण दो कर्मचारियों की मौत हो गई. एक कर्मचारी रात के डेढ़ बजे तक काम करते-करते एकाएक गिर गया जिससे उसकी मौत हो गई. यह खबर मीडिया में आने से पहले ही दबा दी गई.

Source- BBC

समय के पाबंद माने जाने वाला देश जापान में कर्मचारी छुट्टी ही नहीं लेतें हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि कही उनके छुट्टी के चक्कर में कंपनी को नुकसान ना हो जाए. वहां कर्मचारी एक दिन में औसतन 16 घंटे काम करते हैं.

कर्मचारियों को दी जा रही है छुट्टी-

लगातार काम करने वाले कर्मचारियों को साल में 10 पेड लीव मिलता है लेकिन ओवरटाइम के चक्कर में वे छुट्टियां नहीं ले रहे हैं. सरकार ने कर्मचारियों को छुट्टी देने के लिए एक निश्चित समय में छुट्टियों पर भेजना शुरू कर दिया है. साल 2020 में कोरोना के समय भी कंपनियों ने कर्मचारियों के काम में लगभग 20 प्रतिशत तक की कटौती की थी ताकि वे अपने-अपने परिवार को वक्त दे सके. इसके अलावा बोनस के तौर पर प्रत्येक कर्मचारी को 940 डॉलर भी दिया जा रहा था.