क्या महिलाओं से ज्यादा पुरुषों को है कोविड-19 से खतरा

दुनियाभर में हुए एक रिसर्च से पता चला है कि कोविड-19 महामारी ने सबसे ज्यादा प्रभावित पुरुषों को किया है. इसके अलावा पुरुषों में इंफेक्शन रेट भी महिलाओं की अपेक्षा ज्यादा है. आर्थिक दृष्टिकोण से देखने पर पता चलता है कि महिलाओं से ज्यादा पुरुषों पर इसका असर पड़ा है. बड़ी संख्या में पुरुषों को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा तो वहीं बहुत से पुरुष डिप्रेशन और स्ट्रेस जैसी बिमारियों से जूझ रहे हैं.

कोरोना से पुरुषों को ज्यादा खतरा-

एक रिसर्च से पता चला है कि कोरोना से ज्यादा खतरा पुरुषों को है. फरवरी में चंडीगढ़ में हुए एक शोध से पता चला कि कोरोना के कुल मरीजों में 65 प्रतिशत मरीज पुरुष थे. वहीं एक चीनी शोधकर्ता ने दावा किया कि कोरोना से तकरीबन 70 प्रतिशत पुरुष प्रभावित हैं. साल 2003 में सार्स के दौरान भी पुरुष ही सबसे ज्यादा प्रभावित थे.

WHO ने बताया कि यूरोप में कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों में 63 प्रतिशत पुरुष थे. अस्पताल में भर्ती पुरुषों में 8 प्रतिशत पुरुषों की मौत हो गई. वहीं महिलाओं के मौत का आंकड़ा 5 प्रतिशत का था. आपको बता दे कि भारत में कोरोना से ग्रसित मरीजों की संख्या महिलाओ और पुरुषों के आधार पर अलग-अलग नहीं जारी किए जाते हैं और ना ही अमेरिका की सेंटर ऑर डिजीज कंट्रोल जारी करती है.

Source- The Economic times 2

वैज्ञानिक कारण-

महिलाओं के मुकाबले पुरुषों के खुन में एंजियोट्न्सिन कन्वर्टिंग एंजाइम 2 यानी ACE2 अधिक होते हैं, कोरोना वायरस ACE2 के मौजूदगी में ही कोशियाओं पर असर डालता है. पुरुषों में कोरोना होने का दूसरा कारण यह है कि उनके प्रतिरोधक क्षमता महिलाओं के मुकाबले कमजोर होता है. रिसर्च से पता चलता है कि महिलाओं में X क्रोमोसोम की वजह से उनकी इम्यूनिटी सिस्टम पुरुषों से मजबूत होता है.

हेल्थलाइन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक पुरुष महिलाओं के मुकाबले लापरवाह होते हैं. पुरुषों में स्मोकिंग, शराब, और अन्य लत ज्यादा होती है और ऐसे पुरुषों में कोविड-19 का संक्रमण होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है.

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कोविड-19 से उभरने के बाद पुरुषों की समस्याओं में वृद्धि-

इटली में हुई एक स्टडी से पता चला कि कोरोना से उभरने के बाद पुरुषों को अलग-अलग दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में स्ट्रेस लेवल बढ़ा है. इसके अलावा कुछ हद्द तक सेक्स लाइफ भी प्रभावित हुई है. रिपोर्ट में दावा किया कि पुरुषों में कार्डियोवास्कुलर सिस्टम समस्याएं आ रही हैं. वहीं कुछ पुरुष मानसिक बीमारीयों से ग्रसित हैं.