पिछले एक साल में भारतीयों ने इम्यूनिटी बढ़ाने वाली दवाओं पर खर्च किए 15 हजार करोड़ रुपये

पिछले एक साल से इम्यूनिटी शब्द सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. इम्यूनिटी का शाब्दिक अर्थ प्रतिरोधक क्षमता है. इम्यूनिटी ही हमारे शरीर में वायरस से लड़ने में मदद करती है. ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्टे्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक साल में भारतीयों ने प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए विटामिन सप्लीमेंट्स और इम्यूनिटी बूस्टर्स पर 15 हजार करोड़ रुपये खर्च किए. ये आंकड़े साल 2019 के मुकाबले पांच गुना ज्यादा है.

इम्यूनिटी बूस्टर्स का अर्थ-

प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं को इम्यूनिटी बूस्टर्स कहा जाता है. इम्यूनिटी बूस्टर्स दवाओं में मल्टी विटामिन, मिनरल्स, जिंक जैसे आदि पोषक तत्व होते हैं. कोरोनाकाल के दौरान दुनियाभर में लोगों ने इम्यूनिटी को बढ़ाने वाली दवाओं को प्राथमिकता देने लगे. कोरोना से बचने के लिए लोगों ने काढ़ा पीना शुरू किया. कोरोना इम्यूनिटी सिस्टम को प्रभावित करता है. इस लिहाजा लोगों ने इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत बनाने वाली दवाओं की मांग ज्यादा करने लगे.

Source- Amar Ujala

पिछले एक साल में फर्मा कंपनियों ने जमकर की कमाई-

जून 2020 में ग्लेनमार्क फार्मा ने एंटीवायरल ड्रग फेविपिराविर (फेबीफ्लू) दवा से 975 करोड़ रुपये कमाए. वहीं कुल 1220 करोड़ रुपये की दवा बेची गयी.

कोरोनाकाल में रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग में उछाल आया. ब्लैक में ये इंजेक्शन 25 हजार 30 हजार रुपये तक का बिक रहा था. पिछले एक साल में रेमडेसिविर की कुल ब्रिकी 833 करोड़ रुपये की हुई. सिप्ला ने 309 करोड रुपये और कैडिला कंपनी ने 215 करोड़ रुपये रेमडेसिविर इंजेक्शन से कमाए.

Source- The Hindu

एक साल में एजिथ्रोमाइसिन की ब्रिकी में 38 प्रतिशत का इजाफा हुआ. इस दवा की कुल 992 करोड़ रुपये की ब्रिकी हुई. वहीं रिवाइटल और प्रोटिनेक्स का ब्रिकी में रिकॉर्ड 52 प्रतिशत और 64 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली.

(इस रिपोर्ट में वे आंकड़े शामिल नहीं किए गए हैं जो फार्मा कंपनियों ने सीधे अस्पतालों को बेची हैं.)

ज्यादा इम्यूनिटी बूस्टर्स लेने के नुकसान-

कोरोना की डर से लोगों ने कई तरह की इम्यूनिटी बढ़ाने वाली दवाओं का सेवन करने लगें. जिसकी वजह से ये दवाएं शरीर में ओवरडोज होने लगीं और दूसरी बीमारियों की समस्या उत्पन्न हो गई. ज्यादा इम्यूनिटी की दवा लेने से खुजली, किडनी की समस्या, डिप्रेशन आदि की समस्या उत्पन्न हो सकती है. अलग-अलग लोगों की शरीर की बनावट और शारीरिक गतिविधि अलग-अलग होती है. अगर बिना सोचे समझें इम्यूनिटी की दवाएं लेने लगें तो यह फायदे की जगह नुकसान करने लगेगी.

इम्यूनिटी को सही रखने के लिए खानपान की स्थिति में सुधार लाना होगा. न ज्यादा खाएं और न ही कम खाए. तेल वाली वस्तुओं को न खाए. अपने डाइट में मौसमी सब्जियों और लिक्विड को शामिल करें.