लैब में तैयार किया गया ब्रेस्ट मिल्क, जल्द ही बाजारों में होगा उपलब्ध

नवजात बच्चों के लिए मां के दूध को सर्वोत्तम माना गया है. इसी कारण कई मां बच्चें के जन्म के काफी बाद तक शिशु को दूध पिलाती रहती हैं. लेकिन कई बार उचित आहार ना लेने के कारण मां के भीतर ब्रेस्ट मिल्क नहीं बन पाता है. लेकिन अब तकनीकी की मदद से प्रयोगशाला में ब्रेस्ट मिल्क को तैयार किया जा सकेगा. प्रयोगशाला में बने इस दूध में वह सारे पोषक तत्व होंगे जो ब्रेस्ट मिल्क में होता है.

अमेरिका में हुए रिसर्च से पता चला है कि मां की दूध की तरह ही पौष्टिक दूध लैब में तैयार किया जा सकता है. वैज्ञानिकों ने इसे बॉयोमिल्क नाम दिया है. वैज्ञानिकों के अनुसार बॉयोमिल्क की लैब-टैस्टिंग से पता चला कि इसमें मां के दूध में मौजूद प्रोटिन, फैटी एसिड और अन्य वसा के बराबर ही पोषक तत्व होते हैं. वहीं कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि इसमें मौजूद पोषक तत्व ब्रेस्ट मिल्क से अधिक हैं.

Source- Navbharat Times

बॉयोमिल्‍क को बनाने वाली कंपनी की सह संस्‍थापक और मुख्‍य विज्ञान अधिकारी लैला स्ट्रिकलैंड ने फोर्ब्स मैंगजीन से बात करते हुए बताया कि भले ही लैब में बने दूध में एंटीबॉडी ना मौजूद हो लेकिन बायोमिल्र्क की न्यूट्रीशनल और बायोएक्टिव कम्पोजीशन अन्य के मुकाबले अधिक है. लैला स्ट्रिक ने बताया कि उन्हें ब्रेस्टमिल्क के विकल्प पर काम करना था. उन्हें बायोमिल्क का विचार तब आया जब उनका बेबी समय से पहले ही पैदा हो गया था. तब तक उनके शरीर में दूध बनना शुरू नहीं हुआ था. ऐसे समय में वे अपने बेटे को समय से ब्रेस्ट मिल्क मुहैया नहीं करा पाती थीं. इसके बाद वह साल 2013 में स्तन कोशिकाओं पर काम करने लगीं. उन्हें इसे लेकर कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. इसके बाद उन्होंने साल 2019 में खाद्य वैज्ञानिक मिशेल एगस के साथ एक स्टार्टअप की भी शुरुआत की थी. इस कंपनी के फांउडर ने बताया की उनका उद्देश्य ब्रेस्टफिडिंग को खत्म करना नहीं है बल्कि ब्रेस्टफिडिंग के विकल्प के रूप में इसे देखा जाना चाहिए. खबरों के मुताबिक बायोमिल्क को बाजार तक आने में 3 साल का वक्त लगेगा.

बायोमिल्क बनाने वाली कंपनी का मानना है कि किसी भी बच्चे की देखभाल के कई तरीके हो सकते हैं और हर किसी को अपने फायदे के लिए बेहतर फैसले लेना का अधिकार है. इस प्रॉडक्ट के सहारे लोगों को ज्यादा विकल्पों का चुनाव करने की आजादी होगी.