कोरोना से रिकवर मरीजों को लॉन्ग कोविड का खतरा

कोरोना से ठीक हुए मरीजों को तीन महीने बाद भी बुखार, सिरदर्द, थकान आदि की समस्या आ रही है. ज्यादात्तर लोग थकान की समस्या से परेशान हैं. वहीं कुछ लोगों में कोरोना के लक्षण इन्फेक्शन खत्म होने के बाद तक दिखाई दे रहे है. मे़डिकल रिसर्चर के अनुसार यह लॉन्ग कोविड है.

लॉन्ग कोविड शब्द का प्रयोग सबसे पहले लंदन की एलिसा पेरेगो ने किया था. वह पिछले साल कोरोना से संक्रमित थीं. लॉन्ग कोविड का मतलब है कि कोरोना से रिकवरी के बाद कुछ लक्षण शरीर के अंदर बने रहते हैं. लॉन्ग कोविड के दो स्टेज होते हैं.

स्टेज-1: स्टेज 1 में पोस्ट एक्यूट कोरोना के लक्षण 3 से 12 हफ्ते तक बने रह सकते हैं.

स्टेज-2:  स्टेट 2 में क्रॉनिक कोविड क लक्षण 12 हफ्ते बाद तक भी रह सकते हैं.

Source- Dailynews

लॉन्ग कोविड के लक्षण-

143 लोगों पर हुए स्टडी में पता चला कि 87.4 प्रतिशत मरीजों को कोरोना ठीक होने के बाद भी उनमें कम से कम एक लक्षण बरकरार रहता है. जिसमें से थकान सबसे आम लक्षण था. लॉन्ग कोविड के दूसरे लक्षण खांसी, स्किन पर रैशेज आना, धड़कन का तेज होना, सिरदर्द, डायरिया है. लॉन्ग कोविड की वजह से मरीजों को एंग्जाइटी और डिप्रेशन का भी शिकार हो रहे हैं. लैसेट साइकाइट्री में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक कोरोना से रिकवर लोगों में पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD) देखा गया है.

लॉन्ग कोविड हल्के या गंभीर लक्षणों वाले कोरोना मरीजों को हो सकता है. यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की एक रिपोर्ट में 3,171 ऐसे कोरोना मरीजों की गई जिन्हें अस्पताल में भर्ती नहीं किया गया था. उनमें से 69 प्रतिशत मरीजों को छः महीने के दौरान कम से कम एक बार डॉक्टरों के पास जाना पड़ा.

लॉन्ग कोविड को लेकर भारत की तैयारी-

लॉन्ग कोविड को लेकर भारत के पास कोई विस्तृत डेटा नहीं है. लॉन्ग कोविड पर ना ही सरकार नजर रख रही है और ना ही कोई स्टडी. ब्रिटेन को भी कोरोना की दूसरी लहर का सामना करना पड़ा. ब्रिटेन के नेशनल स्टेटिस्टिक्स ऑफिस के अनुसार 6 मार्च तक 11 लाख लोगों ने लॉन्ग कोविड के रिपोर्ट दर्ज कराए. जबकि उनमें से दो-तिहाई मामले 12 हफ्ते से पुराने थे. भारत के दूसरे लहर के आंकडों को देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां पर लॉन्ग कोविड का आंकड़ा बहुत अधिक होगा.