भारतीय वैक्सीन को WHO ने बताया असरदार, साउथ अफ्रीका ने वैक्सीन पर लगाई थी रोक

10 फरवरी को WHO के एक पैनल ने कहा कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी है. इस वैक्सीन के इस्तेमाल के लिए लोगों को जागरुक करने की जरूरत है.यह वैक्सीन 65 साल से ऊपर के लोगों पर भी असरदार है. गौरतलब है कि वैक्सीन के प्रभाव को लेकर साउथ अफ्रीका ने संदेह जताया था. इस कोरोना वैक्सीन का निर्माण एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने किया है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्ट्रैटजिक एडवायजरी ग्रुप ऑफ एक्सपर्ट्स ऑन इम्यूनाइजेशन (SAGE) ने बताया कि वैक्सीन की दो डोज आवश्यक है जो 8 से 12 सप्ताह के अंतराल पर लगाई जानी चाहिए. यह वैक्सीन 65 साल से अधिक उम्र के लोगों को भी दिया जा सकता है.

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SAGE के प्रमुख ऐलेजेंद्रो क्रोविओटो ने बताया कि कोरोना वैक्सीन एस्ट्राजेनेका को लेकर दक्षिण अफ्रीका में सवाल उठ रहे थे. SAGE प्रमुख ने आगे बताया कि जहां कोरोना वायरस का नए वैरिएंट मिले हैं वहां वैक्सीन ने कम असर दिखाया है. लेकिन इन देशों में वैक्सीन के इस्तेमाल में रोक नहीं लगाई जानी चाहिए.

कोरोना वायरस का नया वैरिएंट 501Y.V2 के खिलाफ एस्ट्राजेनेका वैक्सीन कम असरदार साबित हुई. WHO के इम्युनाइजेशन एक्सपर्ट केट ओ ब्रायन ने बताया कि साउथ अफ्रीका से एस्ट्राजेनेका वैक्सीन से संबंधित बातचीत की जा रही है.

कुछ दिन पहले ही साउथ अफ्रीका ने एस्ट्राजेनेका वैक्सीन के कम असरदार होने के कारण रोक लगा दी थी. क्योंकि कुछ एक छोटे ट्रायल के डेटा से यह बात सामने आई थी कि एस्ट्राजेनेका वैक्सीन कोरोना के नए स्ट्रेन से बचाव नहीं कर पा रहा है. साउथ अफ्रीका के अलावा फ्रांस और जर्मनी ने भी 65 साल से अधिक लोगों को यह वैक्सीन देने से रोक लगाई है.