कोरोना वैक्सीन के बाद क्यों जरूरी है बूस्टर डोज और कब लगवा सकते हैं यह डोज

कोरोना वैक्सीन को लेकर लोगों के मन में अलग-अलग सवाल आ रहे हैं जैसे वैक्सीन से उन्हें कब तक कोरोना से सुरक्षा मिल सकती है. क्या वैक्सीन कोरोना के नए वैरिएंट पर कारगर है. हालांकि वैज्ञानिक इस पर अभी भी रिसर्च कर रहें हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में कोरोना का ऐसा वैरिंएट भी आ सकता है जो मौजूदा वैक्सीन के असर को कम कर देगा. ऐसे में वैज्ञानिक इस दिशा में भी काम कर रहें हैं. वैज्ञानिक दो क्षेत्रों में काम कर रहें हैं. पहला वैक्सीन की दोनों डोज लगने के एक साल बाद तीसरी डोज इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में देना और दूसरा नए वैरिएंट के लिए खास वैक्सीन को तैयार करना.

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अमेरिका की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने बूस्टर तीसरी डोज यानी बूस्टर डोज का क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया है. इस ट्रायल में दूसरे समूह के वॉलटियर्स को बीटा वैरिएंट के लिए खास डोज दी जाएगी.

बार-बार फ्लू की वैक्सीन क्यों लगवाया जाता है?

अलग-अलग लोगों में इम्यूनिटी सिस्टम अलग-अलग होता है. खसरे का टीका में केवल एक बार लगता है और जीवनभर के लिए इंफेक्शन से सुरक्षा देती है, लेकिन बाकी वायरस या वैक्टीरिया के मामले में इम्यूनिटी सिस्टम कुछ संमय बाद कमजोर हो जाता है. टिटनेस वैक्सीन का असर केवल एक साल तक रहता है. सेंटर ऑर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) का मानना है कि लोगों को हर साल टिटनेस केटिके के लिए बूस्टर डोज लगवाए. कभी-कभी कुछ वायरस खुद को बहुत तेजी के साथ बदल लेते हैं जिससे नए डोज लगवाने की आवश्यकता पड़ती है.

क्या कोरोना वैक्सीन अन्य बीमारीयों की वैक्सीन के मुकाबले कम कारगर-

वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसा दावा नहीं किया जा सकता कि कोरोना की वैक्सीन अन्य बीमारीयों की वैक्सीन की तुलना में जल्दी ही बेअसर हो जाती है. डॉ कर्स्टन लाइक के मुताबिक क्लिनिकल ट्रायल्स में अभी तक यह भी पता नहीं लगाया जा सका है कि एक साल बाद शरीर का इम्यून रिस्पॉन्स कैसा रहेगा. हालांकि शुरुआती संकेत साकारात्मक रहे हैं.

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वैक्सीन के प्रभाव-

वैज्ञानिक बायोलॉजिक मार्कर यानी पैथोलॉजिकल जांच की तलाश करने में जुटें है. इससे यह पता चल पाएंगा कि वैक्सीन का असर कोरोना वायरस को कितने समय तक रोक सकती है. ऐसे में एंटीबॉडीज की एक निश्चित मात्रा का पता चल सकेगा. अगर स्तर उससे नीचे होता है तो ऐसा माना जाएगा कि शरीर में इन्फेक्शन का खतरा ज्यादा है.

बूस्टर डोज के समय वैक्सीन कंपनी बदलने का विकल्प-

रिसर्च से पता चलता है कि वैक्सीन बदलने से बूस्टर डोज की ताकत बढ़ जाती है. डॉ. कर्स्टन लाइक और इनके साथी कोरोना की बूस्टर डोज के लिए मिक्स मैच का ट्रायल कर रहे हैं. इसके लिए वे मार्डना, जॉनसन एंड जॉनसन और फाइजर-बायोएनटेक की दोनों डोज लगवा चुके लोगों पर प्रयोग कर रहें हैं. इन वॉलटियर्स को मॉडर्ना का बूस्टर डोज दिया जा रहा है. ब्रिटेन में एस्ट्रेजेनेका, क्योरवैक, जॉनसन एंड जॉनसन, मॉडर्ना, नोवावैक्स, फाइजर-बायोएनटेक के मिक्स एंड मैच के लिए बूस्टर डोज के रूप में ट्रायल कर रहे हैं.