World Tuberculosis Day : 2025 तक यूपी को TB मुक्त करने का वादा, टीबी क्या है, कैसे होता है, लक्षण और बचाव क्या है?

विश्व क्षय रोग(World Tuberculosis Day) दिवस के मौके उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीतापुर स्थित कमलापुर के विद्याज्ञान स्कूल द्वारा आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करने पहुंचे. इस मौके पर मुख्यमंत्री ने दावा किया कि साल 2025 से पहले उत्तर प्रदेश टीबी मुक्त हो जाएगा. उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2030 तक दुनिया को टीवी मुक्त करने का लक्ष्य तय है. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2025 तक भारत को टीवी मुक्त करने का संकल्प लिया है. प्रधानमंत्री के संकल्प के अनुरूप यूपी निर्धारित समय सीमा में टीबी मुक्त राज्य बन जाएगा.

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि साल 1882 में पहली बार टीवी के जिवाणु की पहचान हुई थी, लेकिन इतने सालों के बाद भी दुनिया इससे मुक्त नहीं हो पाई है. मुख्यमंत्री ने पांच जिलों के जिला क्षय रोग अधिकारियों को टीबी उन्मूलन में बेहतरीन काम करने के लिए सम्मानित किया. इसमें रामपुर के प्रदीप वार्ष्णेय, सोनभद्र के विनोद अग्रवाल, उन्नाव के नरेंद्र सिंह, चंदौली के दीनानाथ मिश्र और महराजगंज के विवेक श्रीवास्तव को सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया दिया.

टीबी एक जानलेवा बीमारी-

टीबी का पूरा नाम ट्यूबरक्लोसिस है. यह संक्रामक बीमारी मायक्रोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस नामक बैक्टीरिया से होता है. इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभाव फेफडों पर पड़ता है. फेफड़ों के अलावा टीबी मुंह, लीवर, किडनी, गला, ब्रेन आदि में हो सकता है. टीबी के मरीजों के छींकने या खांसने से टीबी के बैक्टीरिया एक इंसान से दूसरे इंसान में चले जाते हैं. आपको बता दें कि केवल फेफड़ों के अलावा दूसरी कोई टीबी हवा के माध्यम से नहीं फैलती है. टीबी सामान्यतः दो प्रकार की होती है.

Source- KNCV

पल्मोनरी टीबी (Pulmonary Tuberculosis) 

जब टीबी के बैक्टीरिया केवल फेफड़ों को संक्रमित करते हैं तो इसे पल्मोनरी टीबी कहते हैं. इस टीबी में सीने में दर्द, बलगम के साथ खांसी आना सामान्य लक्षण हैं. करीब 25 प्रतिशत मरीजों में यह लक्षण नहीं दिखता है लेकिन कभीकभी खांसते समय मुंह से खून निकलता है.

एक्ट्रापल्मोनरी टीबी (Extra Pulmonary Tuberculosis)

जब टीबी के बैक्टीरिया फेफड़ों के अलावा कहीं और संक्रमण फैला रहे हैं तो इसे एक्ट्रापल्मोनरी टीबी कहते हैं. इसके लक्षण हैंआमतौर पर बुखार होना, रात में पसीना आना, भूख न लगना आदि. टीबी के संक्रमण के 20 प्रतिशत मामले फेफड़ों के बाहर फैलता है. इसके ज्यादातर मामले कम इम्युनिटी वाले व्यक्तियों में दिखाई देता है. जबकि एड्स के मरीजों में 50 प्रतिशत तक एक्ट्रापल्मोनरी टीबी होने के मामले सामने आते हैं.

टीबी से बचाव

  1. अगर किसी व्यक्ति को दो हफ्ते से ज्यादा खांसी हो रही है तो वह तुरंत डॉक्टर को दिखाए. डॉक्टर से बिना पुछे कोई दवा न ले.
  2. खांसी या छिक आने की स्थिति में मुंह पर रुमाल रख लें.
  3. पौष्टिक खाना खाए.
  4. धुम्रपान न करें.
  5. भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें.
  6. बच्चे के जन्म के बाद बीसीजी का टीवा अवश्य लगवाएं.

विश्व टीबी दिवस मनाने का उद्देश्य

हर साल 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस मनाया जाता है. 24 मार्च साल 1882 को जर्मन माइक्रो बायोलॉजिस्ट रॉबर्ट कॉच ने टीबी के जीवाणु माइको बैक्टीरियम ट्यूबरक्लोसिस की खोज की थी. उनके इस खोज के कारण आगे चलकर टीबी के इलाज में मदद मिली. इिस योगदान के लिए राबर्ट कॉच को साल 1905 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया.

टीबी दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य दुनियाभर में टीबी के प्रति लोगों को जागरुक करना है. यहीं वजह है कि हर साल टीबी दिवस के मौके पर जागरुकता अभियान चलाया जाते हैं. इस बार विश्व टीबी दिवस 2021 का थीम द क्लॉक इज टिकिंग (The clock is ticking) है.

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विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक रोज टीबी से मरने वालों की संख्या करीब 4 हजार है. साल 2018 में देश में टीबी से संक्रमित मरीजों की संख्या में 21 लाख 1 हजार 82 थी. वहीं साल 2019 में 24 लाख 1 हजार 589 थी और साल 2020 में टीबी के मरीजों की संख्या में गिरावट दर्ज की गई. पिछले साल देश में टीबी के 18 लाख 11 हजार 105 मरीजों की पुष्टि हुई