बीजेपी में जाने के बाद क्या जितिन प्रसाद जीत पाएंगे चुनाव, लगातार दो बार लोकसभा और एक बार विधानसभा चुनाव में मिली है हार

साल 2022 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे ठीक पहले कांग्रेस के दिग्गज नेता जितिन प्रसाद ने बीजेपी का हाथ थाम लिया है. मनमोहन सिंह की सरकार में जितिन प्रसाद मंत्री भी चुके हैं. हाल ही में पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले राज्य प्रभारी बनाए गए थे. इसके साथ ही वे अंडमान निकोबार के भी प्रभारी थे. लेकिन पिछले कुछ सालों से जितिन प्रसाद कुछ खास प्रभाव नहीं छोड़ पा रहे हैं. यहां तक कि वह अपनी सीट भी नहीं संभाल पा रहे हैं. लगातार दो बार लोकसभा और एक बार विधानसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा है.

पश्चिम बंगाल के प्रभारी की भूमिका में-

हाल ही में जितिन प्रसाद को पश्चिम बंगाल का प्रभार दिया गया था. लेकिन वह इसमें पूरी तरह फेल रहे. इनके प्रभारी रहते ही राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का पूरी सफाया हो गया. कांग्रेस 44 से 0 सीट पर आ गई. वहीं उत्तर प्रदेश की बात करें तो इन्हें लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है. शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, बरेली समेत रुहेलखंड इलाके में जो दबदबा कांग्रेस पार्टी और उनके पिता जितेंद्र प्रसाद का था वो अब खत्म हो गया है. हाल में हुए पंचायत चुनाव में जितिन प्रसाद की भाभी राधिका प्रसाद भी चुनाव हार गयी.

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कांग्रेस के युवा नेता छोड रहे पार्टी-

राहुल गांधी के सहयोगी ज्योतिरादित्या सिंधिया ने साल 2019 के लोकसभा चुनाव में गुना सीट से हार गए. इसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए. हालांकि उनके बीजेपी में शामिल होने का कोई खास फायदा बीजेपी को नहीं हुआ. बीजेपी मध्य प्रदेश में हुए उपचुनाव हार गई.

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जितिन प्रसाद का राजनीतिक करियर-

जितिन प्रसाद ने 2001 में राजनीतिक करियर की शुरुआत की. कांग्रेस ने उन्हें भारतीय युवा कांग्रेस का सचिव बनाया.
साल 2004 और 2009 में लगातार दो बार लोकसभा चुनाव जीते. लेकिन साल 2014 और साल 2019 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. वहीं साल 2017 में विधानसभा चुनाव में शाहजहांपुर स्थित तिलहर से मैदान में उतरे लेकिन ये चुनाव भी वह हार गए.

साल 2008 में जितिन प्रसाद को केंद्रीय राज्य इस्पात मंत्री नियुक्त किया गया. साल 2009 से 2010 तक सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, साल 2011 से साल 2012 तक पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और 28 अक्टूबर 2012 से मई 2014 तक मानव संसाधन एवं विकास मंत्री का कार्यभार संभाला.

कांग्रेस से है पुराना नाता-

जितिन प्रसाद के परिवार का कांग्रेस से पुराना नाता है. उनके दादा ज्योति प्रसाद कांग्रेसी नेता थे जबकि पिता जितेंद्र प्रसाद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी और पी.वी. नरसिम्हा राव के राजनीतिक सलाहकार थे. वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं.

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जितिन प्रसाद के पिता जितेंद्र प्रसाद ने साल 2000 में सोनिया गांधी के लगातार पार्टी अध्यक्ष बने रहने का विरोध किया था. उन्होंने सोनिया गांधी के खिलाफ अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ा था. हालांकि उन्हें इस चुनाव में करारी हार मिली. सोनिया गांधी को 7,542 वोट मिले तो वहीं जितेंद्र कुमार को केवल 94 वोट मिले.