कोरोना के बाद बर्ड फ्लू का खतरा, हजारों पक्षियों की मौत, जानिए क्या है बर्ड फ्लू?

कोरोना वायरस के बाद इंसानों को अब बर्ड फ्लू का डर सता रहा है. देश के अलग-अलग हिस्सों में बर्ड फ्लू से पछियों की मौत की खबरें आ रहीं हैं. बर्ड फ्लू को एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस यानी H5N1 के नाम से भी जाना जाता है. बर्ड फ्लू का पहला मामला साल 1997 में हांगकांग में आया था. बर्ड फ्लू का संक्रमण ज्यादातर मुर्गे, बत्तख, कौवे जैसे पछियों में होता है. संक्रमित पछियों के संपर्क में आने से सामान्यतः इंसान भी इस वायरस से संक्रमित हो जाता है. इंसानों के भीतर यह नाक, कान और मुंह  के जरिए फैलता है.

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बर्ड फ्लू के लक्षण-

इंसानों में बर्ड फ्लू सामान्य संक्रमण जैसा ही होता है. बर्ड फ्लू होने पर सांस लेने में दिक्कत होने लगती है इसके अलावा उल्टी, कफ बनना, नाक बहना, सिर में दर्द रहना, मांसपेशियों में दर्द, डायरिया, गले में सूजन, जैसी समस्या उत्पन्न होने लगती है.

बचाव-

संक्रमित और मरे हुई पछियों से दूर रहे. अगर आपके इलाके में बर्ड फ्लू का संक्रमण बढ़ रहा है तो उस वक्त शाकाहारी खाना खाए. अगर मांस खरीद रहे हैं तो उस वक्त साफ-सफाई का ध्यान दे. संक्रमित जगहों पर मास्क पहन कर निकलें.

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भारत में इस समय तेजी से बर्ड फ्लू का खतरा बढ़ रहा है. अब तक देश के पांच राज्यों से बर्ड फ्लू की ख़बरें आ चुकी हैं. राजस्थान, केरल, हिमाचल, मध्य प्रदेश और हरियाणा में बर्ड फ्लू के मामले मिले हैं.

हिमाचल प्रदेश के पोंग झील अभयारण्य में 1800 प्रवासी पछियों की मौत की पुष्टि हुई है. कांगडा जिले के जिलाधिकारी ने जिले में अंडा, चिकन, मांस के बिक्री पर रोक लगा दी है. राजस्थान में  471 कौवों की बर्ड फ्लू की वजह से मौत हुई है.

केरल के कुछ जिलों में बर्ड फ्लू फैलने की जानकारी सामने आई है. केरल के प्रभावित जिलों के आस-पास एक किलोमीटर के दायरे में बर्ड फ्लू के संक्रमण को रोकने के लिए प्रशासन ने 40 हजार पछियों को मारने का आदेश दिया है. कोट्टायम जिला प्रशासन के अनुसार नींदूर में एक बत्तख पालन केंद्र में 1500 बत्तख फ्लू से मर चुके हैं. इससे पहले साल 2016 में केरल में बड़े पैमाने पर बर्ड फ्लू फैला था.