सीपीसीबी की नयी गाइडलाइन जारी, डेयरी फार्म खोलने वालों को पानी की बर्बादी रोकने के लिए करने होंगे उपाय

दिल्ली-एनसीआर में डेयरी फार्म और गौशाला खोलने के नियमों में संशोधन करते हुए नियमों को और सख्त किया गया है. डेयरी फार्म खोलने वालों को जल-वायू प्रदूषण रोकने के साथ पानी की बर्बादी भी रोकने के उपाय करने होंगे. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने इस संबंध नें 51 पन्नों का दिशा-निर्देश जारी किया है. इससे पहले सीपीसीबी ने साल 2020 में दिशा-निर्देश जारी किया था.

सीपीसीबी की नई गाइडलाइन के मुताबिक डेयरी फ़ार्मो और गौशालाओं में दूषित पानी की निकासी पर रोकने और रिफाइन करने के लिए ट्रीटमेंट फ्लांट लगाना होगा. इसके अलावा पशुओं के गोबर के भंडारण और उपयोग की व्यवस्था सुनिश्चित करना होगा जिससे प्रदूषण न फैले. इसके लिए बायोगैस प्लांट, कंपोस्ट खाद जैसे कार्य किए जा सकते हैं. यह नियम पूरे देश पर लागू होंगे और स्थानीय स्तर पर डेयरी फार्म और गौशालाओं को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है.

Source- Krishi jagran

इसके साथ ही स्कूल-कॉलेज और रिहायशीं इलाकों से डेयरी फार्म और गौशाला की दूरी 200 से घटाकर 100 मीटर और जलाशयों से 100 मीटर से बढ़ाकर 200 मीटर कर दी गई है.

डेयरी फार्मों और गौशालाओं के लिए पानी के आवंटन की मात्रा भी कम कर दिया गया है. पहले गाय और भैंस के लिए प्रतिदिन नहाने और पीने के लिए 150 लीटर पानी आवंटित करने का नियम था. लेकिन इसे घटाकर अब भैंस के लिए 100 लीटर और गाय के लिए 50 लीटर कर दिया गया है.

नए नियमों का पालन के लिए स्थीन निकायों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डो की भूमिका मजबूत की जाएगी. हर 6 महीने में दो डेयरी फार्म और दो गौशालाओं का ऑडिट तकाना अनिवार्य कर दिया गया है. इसके साथ गी प्रत्येक डेयरी और गौशाला को स्थानीय स्तर पर पंजीकृत करने के लिए जागरुकता अभियान चलाया जाएगा.