SC ने केंद्र सरकार को फटकारा, कहा सरकार जैसे मामले को डील कर रही है उससे निराशा हुई

नये कृषि कानून के खिलाफ जारी प्रदर्शन के बीच आज देश की सर्वोच्च न्यायालय में आज इस अहम मुद्दे पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि हम बहुत निराश हैं, सरकार इस मसले को न जाने कितने दिन से डील कर रही है. इस कानून पर अभी तक दोनों पक्षों में सहमति नहीं बन पायी है. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि कृषि कानून बनाने से पहले एक्सपर्ट की टीम बनी थी और इस विषय पर कई लोगों के साथ चर्चा की गई थी.

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इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा की ये दलील किसी काम की नहीं है. सरकार को इसका हल निकालना चाहिए. हम अपना इरादा साफ करते हुए एक कमीटी बनाना चाहते हैं. इस पर सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस कानून से किसान संगठन को फायदा होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने अब तक कोई नहीं आया है जो ऐसा कहे कि कृषि कानून फायदेमंद है. अगर बड़ी संख्या में लोगों को लगता है कि कानून फायदेमंद है तो कमिटी को बतायें. हम आपके कानून पर रोक लगाएंगे. आप हल नहीं निकाल पा रहे हैं. लोग मर रहे हैं. आत्महत्या कर रहे हैं. महिलाएं और बूढ़े लोग भी आंदोलन पर बैठे हैं. हमें कमिटी बनानी चाहिए.

जब याचिकाकर्ता के वकील हरीश साल्वे ने कहा कि सिर्फ कानून के विवादित हिस्सों पर रोक लगे, तो इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे पूरे कानून पर रोक लगाएंगे, पर क्या रोक लगाने के बाद संगठन आदोंलन जारी रखेंगे या इसके बाद भी नागरिकों के लिए रास्ता छोड़ेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि उन्हें आशंका है कि किसी भी दिन हिंसा भड़क सकती है.

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एटॉर्नी जनरल ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि तमाम मामलों में कोर्ट ने संसद के कानूनों पर रोक नहीं लगाई है, तो इस बार भी कोर्ट को ऐसा नहीं करना चाहिए. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें उन मामलों की जानकारी है और एटॉर्नी जनरल को अपनी दलीलें देने को कहा.

एटॉर्नी जनरल ने जवाब में कहा कि किसान 26 जनवरी को राजपथ पर 2000 ट्रैक्टर दौड़ाने की बात कह रहे हैं. तब किसान संगठनों के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि किसान ऐसा नहीं करेंगे. इस पर एटॉर्नी जनरल ने कहा की इनसे इस बात का हलफनामा लेना चाहिए. अंत में सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी के प्रमुख बनाने के लिए जस्टिस लोढ़ा का नाम सुझाया है.

कृषि कानून को लेकर पिछले 46 दिनों से किसान केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों की मांग है कि सरकार तीनों कानून वापस ले. किसान चाहते हैं कि केंद्र सरकार किसी भी फसल की खरीद पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी दे. अब तक किसान और केंद्र सरकार के बीच केवल बातों पर सहमति बनी है. पहला पराली जलाने को अपराध न माना जाए और दूसरा बिजली पर सब्सिडी मिलता रहे. किसानों और सरकार के बीच अब तक आठ दौर की बातचीत हो चुकी है. अगली बातचीत 15 जनवरी को होगी.