सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को दी मंजूरी, जानिये क्या है सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने 2-1 के बहुमत से केंद्र सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया. इस परियोजना के तहत नए संसद भवन का निर्माण होगा. यह परियोजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है.

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के खिलाफ कई याचिकाएं दायर हुई थीं. जस्टिस खनविलकर और दिनेश माहेश्वरी ने सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को मंजूरी दी तो वहीं जस्टिस संजीव खन्ना ने इसके खिलाफ फैसला सुनाते हुए जमीन के इस्तेमाल में बदलाव को लेकर कड़ी आपत्ति जताई.

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सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट क्या है-

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत संसद भवन की नई इमारत बनाने का प्रस्ताव है. इस नए संसद भवन का आकार त्रिकोणीय होगा. राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक सरकारी भवनों का फिर से निर्माण होगा. इसके अंतर्गत प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति के नए भवन बनाए जाएंगे. इस नए संसद भवन की लोकसभा में 888 सीट और राज्यसभा में 384 सीट होगी. संयुक्त रूप से 1272 लोग बैठ सकेंगे. इसके अलावा राष्ट्रपति भवन के करीब प्रधानमंत्री और उपराष्ट्रपति आवास होगा.

सेंट्रल विस्टा की लागत –

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में अनुमानित खर्च 20 हजार करोड़ रुपये का है. इसमें करीब 971 करोड़ रुपये नए संसद भवन निर्माण में खर्च होंगे. यह परियोजना के साल 2024 तक पूरा होने का अनुमान है. वहीं नये संसद भवन का निर्माण देश के 75वें स्वतंत्रता दिवस यानी 2022 तक पूरा हो जाएगा. इसको बनाने की जिम्मेदारी टाटा प्रोजेक्टस लिमिटेड को मिली है. नए संसद भवन का नक्शा गुजरात के एचसीपी डिज़ाइन्स ने तैयार किया है.

वर्तमान संसद भवन का शिलान्यास साल 1921 में हुआ था और यह साल 1927 में बनकर तैयार हुआ था. इसका निर्माण तत्कालीन गवर्नर लॉर्ड इरविन ने कराया था. वर्तमान संसद भवन का खाका एडविन लुटियंस और हर्बर्ट बेकर ने बनाया था.

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर हंगामा क्यों है-

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 10 से ज्यादा याचिकाएं दायर की गई थी. जिसमें से एक याचिका वकील राजीव सूरी की थी. इन्होंने पूरे प्रोजेक्ट के निर्माण और जमीन के इस्तेमाल पर आपत्ति जतायी थी.

याचिका में कहा गया था कि नए संसद भवन के निर्माण पर होने वाले सरकारी पैसे के खर्च का अध्ययन नहीं किया गया है. इसके अलावा पर्यावरण को भी ध्यान में नहीं रखा गया है. इस पर भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए कहा था कि वर्तमान इमारत करीब 100 साल पुरानी है और इस पर दबाव भी ज्यादा है. नई संसद भवन भूकंपरोधी होगी. इसके अलावा नए संसद के निर्माण के वक्त एक ईट भी नहीं निकाली जाएगी.