Indian Army Day : फील्ड मार्शल के एम करिअप्पा, जिन्होंने बहादुरी की मिसाल पेश की

भारतीय सेना आज राष्ट्रीय थल सेना दिवस मना रही है. 15 जनवरी की तारीख दो कारणों से महत्वपूर्ण है. 15 जनवरी साल 1949 को भारतीय सेना की स्थापना हुई थी और इसी दिन फील्ड मार्शल के एम करिअप्पा भारतीय थल सेना के कंमाडर इन चीफ बनाए गए थे. फील्ड मार्शल के एम करिअप्पा पहले ऐसे भारतीय थे जो कंमाडर इन चीफ बने थे. इससे पहले इंडियन आर्मी के कमांडिंग चीफ जनरल सर फ्रांसिस बटचर थे.

source- the hindu

प्रधानमंत्री ने भारतीय थल दिवस पर क्या कहा-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा -“मां भारती की रक्षा में पल-पल मुस्तैद देश के पराक्रमी सैनिकों और उनके परिजनों को सेना दिवस की हार्दिक बधाई. हमारी सेना सशक्त, साहसी और संकल्पबद्ध है, जिसने हमेशा देश का सिर गर्व से ऊंचा किया है. समस्त देशवासियों की ओर से भारतीय सेना को मेरा नमन.”

केएम करिअप्पा कौन हैं-

केएम करिअप्पा का जन्म 28 जनवरी साल 1899 को कर्नाटक के कुर्ग में हुआ था. करिअप्पा के दोस्त उन्हें चिम्मा नाम से पुकारते थे. इन्होंने अपनी पढ़ाई सेंट्रल हाई स्कूल और चेन्नई स्थित प्रेसिडेंसी कॉलेज से पूरी की. पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के समय सेना में भर्ती हो गए.

सेना में भर्ती होने के बाद ब्रिटिश सरकार ने करिअप्पा को डिप्टी चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के पद पर नियुक्त किया था. यह किसी भी भारतीय के लिए सर्वोच्च पद था. इसके बाद साल 1949 करिअप्पा थल सेना के प्रथम कंमाडर इन चीफ बने. करिअप्पा सेना से सेवानिवृत होने के बाद भारत की तरफ से ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में हाई-कमिश्नर के पद पर काम किया.

करिअप्पा के बेटे को जब पाकिस्तान आर्मी ने पकड़ लिया-

फील्ड मार्शल करिअप्पा भारतीय सेना से साल 1953 में रिटायर हो गए थे. करिअप्पा के बेटे केसी नंदा करिअप्पा भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पोस्ट पर थे. साल 1965 भारत- पाकिस्तान लड़ाई के वक्त केसी नंदा का विमान पाकिस्तान में प्रवेश कर गया था जिसे पाकिस्तानी आर्मी ने मार गिराया और करिअप्पा के बेटे को बंधक बना लिया.

1965 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान को जब इस बात का पता चला कि करिअप्पा के बेटे को आर्मी ने पकड़ लिया है तब राष्ट्रपति अयूब खान ने करिअप्पा को फोन करके कहा कि वे उनके बेटे को छोड़ रहे हैं. इस बात पर करिअप्पा ने सख्त लहजे में कहा कि वह मेरा बेटा नहीं बल्कि भारत मां का बेटा है.

करिअप्पा ने पुत्र मोह छोड़कर अयूब खान से कहा कि तुम उसके साथ वैसा ही व्यवहार करना जैसे युद्धबंदियों के साथ व्यवहार होता है. गौरतलब है कि अयूब खान, भारतीय सेना में करिअप्पा के साथ काम कर चुके थे. अयूब खान सेना में करिअप्पा के जूनियर थे.