इरफान खान : रिश्तों में भरोसा और मोबाइल में नेटवर्क न हो तो लोग गेम खेलने लगते हैं

‘मोहब्बत है इसलिए जाने दिया, जिद होती तो बाहों में होती .’

‘सिर्फ इंसान गलत नहीं होता… वक्त भी गलत हो सकता है .’

‘चोट खाया हुआ दोस्त दुश्मन से ज्यादा खतरनाक होता है .’

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ये पढ़ कर समझ गए होंगे कि मैं किस अभिनेता की बात कर रहा हूं. अपनी फिल्मों से दर्शकों का दिल जीतने वाले इरफान खान भले ही आज हमारे बीच न हों पर उनके ये डायलॉग उन्हें हमेशा के लिए अमर बना देते हैं.

इरफान का जन्म 7 जनवरी साल 1967 में राजस्थान के टोंक में हुआ था. इनके पिता टायर का कारोबार करते थे. इरफान जब 16 साल के थे तब इनके पिता का देहांत हो गया. कम उम्र में ही घर की सारी जिम्मेदारी इरफान के ऊपर आ गयी थी. इरफान ने साल 1984 में NSD से यानी की नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय की बारीकियां सीखीं.

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इरफान की पहली फिल्म ‘सलाम बॉम्बे’ थी. ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा कमाल न कर सकी. साल 2003 में तिंग्माशू धूलिया ने अपनी फिल्म ‘हासिल’ में इरफ़ान ख़ान मौका दिया. ये फिल्म सुपरहिट रही और इसके बाद इरफान ने ‘रोग’, ‘मकबूल’, ‘पान सिंह तोमर’, ‘लाइफ इन ए मेट्रो’, ‘स्लमडॉग मिलेनियर’, ‘पान सिंह तोमर’, ‘द लंच बॉक्स’,और ‘हिंदी मीडियम’ जैसी बेहतरीन फिल्मों में काम करके लोगों का दिल जीता.
इरफान ने जुरासिक वर्ल्ड, स्पाइडरमैन, लाइफ ऑफ पाई, इनफर्नो जैसी हॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया.

नाम में 2 बार R

इरफान अपने नाम में दो आर लिखते थे. जब उनसे इसका कारण पूछा गया तो उन्होंने बताया कि दो आर लगाने से नाम की ध्वनि अच्छी लगती है और इसमें जीभ भी मुड़ती है.

इरफान से ‘खान’ अलग हुआ –

साल 2016 में इरफान ने अपने नाम से खान शब्द को हटा लिया था. एक इंटरव्यू में जब इसका कारण पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘मैं इरफान हूं, सिर्फ इरफान. मैंने कुछ समय पहले से अपने नाम से ‘खान’ हटा लिया है. दरअसल मैं अपने धर्म, अपने सरनेम या अपनी ऐसी किसी चीज की वजह से पहचाना जाना नहीं चाहता. मैं अपने पूर्वजों के काम की वजह से पहचान नहीं बनाना चाहता.’

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इरफान ऐसे एक्टर थे जो अपनी आंखों से ही अभिनय की एक अलग छाप छोड़ते थे. इरफान ने अपने करियर की शुरुआत टेलीविजन शो चाणक्य और चन्द्रकांता से की. चंद्रकांता में इनके किरदार ने बहुत वाह-वाही बटोरी.

इरफान खान को साल 2018 में न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर होने का पता चला था, इसके इलाज के लिए वे एक साल तक ब्रिटेन में रहे. 29 अप्रैल साल 2019 को इस महान अभिनेता ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया.

पुरस्कार-

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इरफान को साल 2004 में फिल्म हासिल के लिए सर्वश्रेष्ठ खलनायक का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. इसके अलावा साल 2018 फिल्म लाइफ इन ए मेट्रो के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला, साल 2016 में हिंदी मीडियम के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला. भारत सरकार ने साल 2011 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया.