गुस्सैल और आशिक मिजाज जवाहरलाल नेहरू | Jawaharlal Nehru

पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर 1889 को प्रयागराज के आनंद भवन में हुआ था. उनके पिता मोतीलाल नेहरू एक जाने माने वकील और स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानी थे. नेहरू की प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा हैरॉ कॉलेज में हुई. उसके बाद वे आगे की पढ़ाई के लिए लंदन के मशहूर ट्रिनटी कॉलेज चले गए. नेहरू ने अपनी वकालत की डिग्री कैंब्रिज विश्वविद्यालय में पूरा किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद कुछ सालों तक नेहरू ने लंदन में ही वकालत का अभ्यास किया.

महात्मा गांधी के भारत आने के बाद जवाहर लाल नेहरू भी आजादी के आंदोलन के लिए भारत आ गए. गांधी और नेहरू की पहली मुलाकात 1916 में लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर हुई थी. यह मुलाकात भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास बन गई.

स्वतंत्रता संग्राम में जेल गए

जवाहरलाल नेहरू को स्वतंत्रता आंदोलन के कारण कई बार जेल जाना पड़ा. नेहरू आंदोलन के दौरान 1091 दिनों तक विभिन्न जेलों में रहे. नेहरू को 1922 में चौरीचौरा कांड के बाद जेल में रखा गया, जिसमें वे नौ दिनों के लिए रहे. नेहरू को अंग्रेजी सरकार कुल नौ बार जेल में रखा.

 बेटी के नाम पिता का खत

नैनीताल जेल और इलाहाबाद जेल में रहने के दौरान जवाहर लाल नेहरू ने अपनी बेटी इंदिरा को कई चिट्ठियां लिखीं. उस समय इंदिरा की उम्र सिर्फ १० साल थी. बाद में नेहरू के ये पत्र ‘विश्व इतिहास की झलक’ पुस्तक के रूप में प्रकाशित हुए.

कांग्रेस अध्यक्ष

 जवाहरलाल नेहरू आजादी से पहले तीन बार कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर रहे. साल 1929 में जवाहरलाल नेहरू पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष बने. इसी कार्यकाल में नेहरू ने भारतीय तिरंगा फहराया साथ ही पूर्ण स्वराज्य की मांग की. नेहरू दूसरी बार 1936 में कांग्रेस अध्यक्ष बनें और तीसरी बार 1946 में.

भारतीय कैबिनेट के पहले प्रधानमंत्री

 द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन ने भारत को आजाद करने के लिए क्रिप्स कमीशन का गठन किया. ‌इस गठन के बाद नेहरू पहली बार भारत के प्रधानमंत्री बने. आजाद भारत के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए हुई वोटिंग के बाद नेहरू को चुना गया. हालांकि कई लोगों का मानना है कि वोटिंग में नेहरू पिछड़ गए थे, लेकिन गांधी जी के कारण उन्हें प्रधानमंत्री पद मिला.

भारत बंटवारे और चीन युद्ध का दाग

इतिहास में नेहरू की दो कारणों से सबसे अधिक आलोचना की जाती है. एक भारत-पाक बंटवारा और दूसरा चीन भारत युद्ध में भारत की हार. कई दक्षिणपंथी इतिहासकारों का मानना है कि नेहरू के व्यक्तिगत सर्वार्थ के कारण ही भारत से पाकिस्तान का बंटवारा हुआ. वहीं चीन युद्ध में नेहरू के निर्णय लेने की क्षमता की आलोचना की जाती है.

एक दूरदर्शी प्रधानमंत्री

भारत के इतिहास में नेहरू सबसे ज्यादा दिनों तक प्रधानमंत्री पद पर रहे. वो साल १९४७ से लेकर १९६४ तक इस पद पर रहे. नेहरू एक दूरदर्शी प्रधानमंत्री थे. प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने इसरो, आईआईटी, आईआईएम जैसे संस्था बनाए तो वहीं जेएनयू जैसे समाजिक विवि की कल्पना की. नेहरू मिश्रित अर्थव्यवस्था लागू करने के लिए भी जाने जाते हैं .

लापारवाही बर्दाश्त नहीं करते थे

जवाहरलाल नेहरू के ग़ुस्से के बाबत पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने एक क़िस्सा सुनाया था कि एक बार नेहरू उनसे इस बात पर बहुत नाराज़ हो गए कि उन्होंने उनके नेपाल नरेश को लिखे गए पत्र को विदेश मंत्रालय के सेक्रेट्री जनरल को न दिखाकर अपनी आलमारी में रख लिया था.  उस ज़माने में नटवर कुछ सालों तक नेहरू  के सेक्रेट्री जनरल के सहायक हुआ करते थे. वो लिखते हैं,

शाम साढ़े छह बजे नेहरू का नेपाल नरेश महेंद्र को लिखा पत्र मेरे पास आया. मैंने सोचा कि सुबह इसे पढ़ूंगा. सुबह मैं सेक्रेट्री जनरल को छोड़ने हवाई अड्डे चला गया जो सरकारी यात्रा पर मंगोलिया जा रहे थे. वहां उनका विमान लेट हो गया.

पुस्तक लेखन

नेहरू ने इतिहास और वर्तमान विषयों पर कई किताबें लिखी है. भारत की एक खोज उनकी प्रमुख पुस्तक है. नेहरू को कविताएं भी बहुत पसन्द थी. वे प्रसिद्ध कवि रॉबर्ट फ्रॉस्ट की कविता के मुरीद थे. नेहरू की मृत्यु के बाद उनके टेबल पर फ्रॉस्ट की कविता रखी थी. नेहरू को प्रधानमन्त्री के पद पर रहने के दौरान ही भारत रत्न दिया गया.

निधन

दिल्ली के तीनमूर्ति भवन में २७ मई १९६४ को नेहरू का निधन हो गया. उनके निधन के बाद तीनमूर्ति भवन को लाइब्रेरी और म्यूजियम में तब्दील कर दिया गया.

 

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