Atharvaveda : अथर्ववेद से जुड़े रोचक तथ्य जानिये

हम सभी जानते हैं कि वेद 4 होते हैं, ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद और सामवेद. लेकिन इन सबके बारे में हम विस्तार से नहीं जानते हैं. आज हम आपको अथर्ववेद के बारे में बतायेंगे.

1. अथर्वा ऋषि द्वारा रचित इस वेद में कुल 731 मंत्र तथा लगभग 6000 पद्य हैं. इसके कुछ मंत्र ऋग्वैदिक मंत्रों से भी प्रचीनतर हैं.

2. ऐतिहासिक दृष्टि से अथर्ववेद का महत्व इस बात में हैं कि इसमें सामान्य मनुष्यों के विचारों तथा अंधविश्वासों का वितरण मिलता है.

Atharvaveda

3. पृथिवीसूक्त अथर्ववेद का प्रतिनिधि सूक्त माना जाता है इसमें मानव जीवन के सभी पक्षों- गृह निमार्ण, कृषि की उन्नति, व्यापारिक मार्गों का गाहन (खोज), रोग निवारण, समन्वय, विवाह तथा प्रणय गीतों, राजभक्ति, राजा का चुनाव, बहुत से वनस्पतियों एवं औषधियों,  शाप, वशीकरण, प्रायश्चित,  मातृभूमि महात्मय आदि का विवरण दिया गया है. कुछ मंत्रों में जादू टोने का भी वर्णन है.

4. अथर्ववेद में परीक्षित को कुरूओं का राजा कहा गया है तथा कुरू देश की समृद्धि का अच्छा चित्रण मिलता है.

5. इसमें सभा एवं समिति को प्रजापति की दो पुत्रियाँ कहा गया है.

6. वेदों की भी शाखाएँ है जो वैदिक अध्ययन और व्याख्या से जुड़े विभिन्न दृष्टिकोणों का प्रतिनिधित्व करती है.

7. शाकल शाखा ऋग्वेद से जुड़ी एकमात्र जीवित शाखा है. यजुर्वेद को शुक्ल यजुर्वेद और कृष्ण यजुर्वेद को दो शाखाओं में बाँटा गया है. माध्यन्दिन और काण्व शुक्ल यजुर्वेद अथवा वाजसनेय संहिता की शाखाएँ है.

8. कृष्ण यजुर्वेद से जुडी शाखाएँ – काठक, कणिष्ठल मैत्रायणी और तैयत्तिरीय है.

9. कौथुम, राणायनीय एवं जैमीनीय या तलववार सामवेद की शाखाएँ अथर्व वेद की शाखाएँ शौनक और पैप्पलाद है.

10. सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद एवं सबसे बाद का वेद अथर्ववेद है.