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पहला मोबाइल फोन बनाने वाले डॉ. मार्टिन कूपर के जीवन से जुड़ी 20 रोचक बातें !

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मोबाइल फोन आज के समय की जरूरत बन चुका है. आज के ज्यादातर युवा काम ही अच्छे और महंगे मोबाइल को खरीदने के लिए करते हैं. दुनिया के आधे से ज्यादा लोग मोबाइल को अपनी दुनिया बनाकर उसी में खोये रहते हैं. लेकिन ज़रा सोचिए कि अगर हमारे पास एक दिन भी मोबाइल फोन नहीं हो तो हम कैसे बैचैन हो जाते हैं लेकिन शायद आप इस बैचैनी को बढ़ाने वाले और वायरलेस communication के जनक के बारे में नही जानते होंगे.

70 के दशक में कूपर ने पहला handheld मोबाइल फ़ोन बनाया जिसके बाद से संचार के क्षेत्र में एक ऐसी क्रांति आ गयी जो आज तक रुकने का नाम नहीं ले रही है.

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source : Encyclopedia Britannica

तो चलिए आज हम आपको अपने इस पोस्ट में संचार क्षेत्र में क्रांति लाने वाले मार्टिन कूपर के बारे में कुछ बातें बताते हैं….

1. डॉ. मार्टिन कूपर का जन्म 26 दिसम्बर साल 1928 को संयुक्त राज्य अमेरिका के शिकागो शहर में हुआ था.

2. कूपर का बचपन शिकागो में ही बीता और उनकी शुरुआती पढ़ाई भी वहीं हुयी थी. Illinois Institute of Technology से साल 1957 में उन्होंने Electrical Engineering में मास्टर डिग्री हासिल की थी.

3. उसके बाद ही साल 1954 में उन्होंने मोटोरोला में काम करना आरम्भ कर दिया था. यहां उन्होंने पोर्टेबल वस्तुओं के उत्पादन पर काम आरम्भ कर दिया था.

4. इसी दौरान उन्होंने शिकागो पुलिस के लिए एक पोर्टेबल दस्ती पुलिस रेडियो बनाया जिसे साल 1967 में पुलिस विभाग को सौंप दिया.

5. इसके बाद उन्होंने मोटोरोला की सेलुलर रिसर्च को आगे बढ़ाया. 3 अप्रैल, 1973 को उन्होंने पहला सेलफोन बनाया और इसे बनाने वाले पहले व्यक्ति बन गये.

6. सेलफोन बनाने की प्रेरणा डॉ. कूपर को Star Trek टीवी सीरियल से मिली थी, जिसमें हाथ में पकड़ी डिवाइस से बातचीत करते दिखाया गया था.

7. सेलफोन बनाने के बाद डॉ. कूपर ने उसके अनेक टेस्ट किये और लोगों की उस मान्यता को तोड़ दिया कि फ़ोन केवल लैंडलाइन से ही किये जा सकते हैं.

8. इसके बाद मजे की बात यह रही कि उन्होंने अपने सेलफोन से पहली कॉल अपने विरोधी जोएल एंजेल को की, जो AT&T Bell Labs में काम करता था.

9. जब जोएल ने अपना लैंडलाइन फ़ोन उठाया तो कूपर ने कहा कि वो अपने पोर्टेबल फ़ोन से बात कर रहे हैं. यह फ़ोन 850 ग्राम वजनी था और ऐसा लगता था मानो ईंट उठा रखी हो.

10. साल 1983 में मोटोरोला ने डायनाटेक फोन बनाये, जो पहले से आधे वजनी थे. इनकी कीमत 3500 डॉलर थी. इसके बाद सेलफोन और हल्के-सस्ते होते चले गये.

11. साल 1983 में डॉ. कूपर ने मोटोरोला कम्पनी छोड़ दी और अपनी एक नई कम्पनी बनाई, जो सेलुलर इंडस्ट्री के लिए सॉफ्टवेर और बिलिंग सिस्टम तैयार करती थी.

12. इस फर्म को बेचने के बाद साल 1986 में उन्होंने एरेकॉम कम्पनी खड़ी करनी आरम्भ की, जो साल 1992 में शुरु हुयी.

13. इससे वे “स्मार्ट एंटेना” और तेज ब्रॉडबैंड टैक्नोलॉजी पर काम करने लगे, जो सेलफोन यूजर्स को सस्ती और तेज इन्टरनेट सेवा उपलब्ध कराती थी.

14. कम्पनी में उनकी पत्नी एरलेज हैरिस भी सहयोगी थीं. जो स्वयं स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से निकली इंजिनियर थीं.

15. साल 2003 में एरेकोम ने एक ब्रॉडबैंड वायरलेस सिस्टम iBurst विकसित किया, जिसका ऑस्ट्रेलिया के कई भागों में आज भी सफलतापूर्वक उपयोग किया जाता है.

16. डॉ. कूपर का सपना था कि सेलफोन पर जैसे बातें की जा सकती है वैसे ही सबको तेज और सस्ती इन्टरनेट सुविधा उपलब्ध हो.

17. कूपर चाहते थे कि वे तेज ब्रॉडबैंड लेकर आये और उनकी कम्पनी एरेकोम आज भी इस दिशा में ओर तेजी लाने के लिए सक्रियता से जुटी हुयी है.

18. डॉ. कूपर के मुताबिक सेलफोन बनाने में लगभग 10 लाख डॉलर का खर्चा आया था.

19. डॉ. कूपर का कहना है कि वे मोबाइल फ़ोन की दुनिया खुद को हर क़दम पर जोड़ कर रखना चाहते हैं, और किसी भी नई चीज़ को समझने के लिए उसका इस्तेमाल करना बहुत ज़रूरी होता है, इसीलिए मैं महीने दो महीने में नया फ़ोन ले लेता हूँ”.

20. डॉ. कूपर को सेलफोन बनाते समय इसका अंदाजा नहीं था कि एक दिन उनको इस पहल क अपार सफलता मिलेगी.

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