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Rajendra Kumar : कंजूसी के लिए मशहूर रहा ये एक्टर क्यों फूट-फूटकर रोया था ?

बॉलीवुड में जुबली हीरो के नाम से मशहूर यह एक्टर अपनी एक्टिंग के अलावा कंजूसी के लिए भी जाना जाता था. हम बात कर रहे हैं कई सुपरहिट फिल्मों में काम कर चुके राजेंद्र कुमार की. Rajendra kumar को भले आज के पीढ़ी के लोग न पहचाने लेकिन पुरानी पीढ़ी के लोग उन्हें बहुत अच्छे से जानते होंगे.

Rajendra Kumar अपने अभिनय से ज्यादा अपनी कंजूसी के लिए मशहूर थे. वे न तो खुद पर पैसे खर्च करते थे, और न अपने दोस्तों पर. उनकी इस कंजूसी की वजह से इंडस्ट्री के दोस्त उन्हें कंजूस कुमार कहकर बुलाते थे.

करना पड़ा काफी संघर्ष-

Acting की दुनिया में अपना सिक्का जमाने के लिए Rajendra Kumar को काफी संघर्ष करना पड़ा था. जब वह हीरो बनने का सपना लेकर मुंबई आये थे उस दौरान उनकी जेब में सिर्फ 50 रुपये थे. जो उनके पिता ने उन्हें अपनी घड़ी बेचकर दिए थे. उन्हें बॉलीवुड में पहला ब्रेक साल 1950 में आई जोगन में मिला था. इस फिल्म में उनके साथ ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार भी थे.

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इससे पहले उन्होंने गीतकार राजेंद्र कृष्ण की मदद से डायरेक्टर एचएस रवैल के साथ सहायक के तौर पर काम किया था. इस दौरान उनकी सैलरी 150 रुपये थी. साल 1957 तक वो फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करते रहे. 1957 में आई मदर इंडिया में उन्हें एक छोटा सा रोल किया. रोल भले छोटा था, लेकिन दर्शकों को उनका अभिनय काफी पसंद आया.

Rajendra Kumar से बने जुबली कुमार-

मदर इंडिया में उनके अभिनय को काफी सराहा गया और इस वजह से उन्हें कई फिल्मों के ऑफर भी मिलने लगे. 1959 में आई फिल्म गूंज उठी शहनाई लीड एक्टर के तौर पर उनकी पहली सफल फिल्म थी. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के एक बाद हिट फ़िल्में देते चले गए.

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Rajendra Kumar ने धूल का फूल, मेरे महबूब, आई मिलन की बेला, संगम, आरजू, और सूरज जैसी कई हिट फ़िल्में दी. उनके अभिनय और सफलता को देखते हुए लोग उन्हें जुबली कुमार के नाम से बुलाने लगे.

जब बंगला बिकने पर फूट फूट कर रोये-

70 के दौर में जुबली कुमार का स्टारडम गिरने लगा. उनकी आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गयी कि उन्हें अपना लकी बंगला बेचना पड़ा. राजेन्द्र कुमार ने अपने बंगले Dimple को 3.5 लाख रुपये में राजेश खन्ना को बेचा था. यह बंगला उन्होंने 1960 में एक्टर भारत भूषण से 60 हजार रुपये में ख़रीदा था.
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Rajendra Kumar इसे खुद के लिए लकी मानते थे. इस बंगले में आते ही उन्हें फिल्मों में सफलता मिलनी शुरू हो गयी थी. ऐसा कहा जाता है कि जिस रात उन्होंने राजेश खन्ना को अपना बंगला बेचा था. उस रात वो फूट फूट कर बहुत रोये थे.

सायरा बानो से था अफेयर –

Rajendra Kumar ने सबसे ज्यादा हिट फ़िल्में सायरा बानो के साथ दी थी. उन्होंने उनके साथ ‘आई मिलन की बेला’ (1964), ‘झुक गया आसमान’ (1968), ‘अमन’ (1967) की थी. Rajendra Kumar के बारे में कहा जाता है कि इन फिल्मों की शूटिंग के दौरान ही उन्हें सायरा बानो से प्यार हो गया था.

गीता बाली के साथ दोबारा नहीं किया काम-

साल 1956 में आई फिल्म ‘वचन’ में उन्होंने गीता बाली के भाई का रोल प्ले किया था. इस किरदार को राजेंद्र कुमार ने दिल से निभाया था और वह मन से गीता को अपनी बहन मानने लगे.

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इस फिल्म के बाद गीता बाली ने कई बार राजेंद्र कुमार के साथ काम करने की कोशिश की लेकिन राजेंद्र कुमार ने उन्हें हर बार मना कर दिया. उन्होंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह गीता को अपनी बहन मानते थे और फिल्मों में उनके साथ रोमांस करना नहीं चाहते थे.

जब राज कपूर ने निकाल दिया अपनी फिल्म से-

फिल्म सत्यम शिवम सुन्दरम में राज कपूर की पहली पसंद Rajendra kumar थे. राज कपूर ने जब उन्हें फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाई तब उन्होंने कहा कि यह फिल्म नहीं चलेगी, इसे मत बनाओ.

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इस बात से नाराज होकर राज कपूर ने उन्हें अपनी फिल्म से निकाल दिया. राज कपूर ने बाद में शशि कपूर को लेकर यह फिल्म बनायीं, जो बाद में सुपरहिट साबित हुई.

जब काट ली अमृता सिंह की फीस-

जब उन्होंने संजय दत्त’ अमृता सिंह को लेकर नाम फिल्म बनायी तो उन्होंने अमृता सिंह की फीस काट ली. ऐसा उन्होंने इसलिए किये था क्योंकि फिल्म की शूटिंग के दौरान अमृता ने हांगकांग से जमकर फ़ोन कॉल्स किये थे.