Home Entertainment इस फिल्म ने पहले ही दिखा दिया था ‘आरुषि हत्याकांड घटना’ के...

इस फिल्म ने पहले ही दिखा दिया था ‘आरुषि हत्याकांड घटना’ के दोनों पहलुओं को

SHARE

देश की सबसे चर्चित और बड़ी मर्डर मिस्ट्री आरुषि हत्याकांड में इलाहाबाद हाइकोर्ट ने तलवार दंपति यानी डॉ. राजेश तलवार और नूपुर तलवार को बरी कर दिया है. उन पर उनकी खुद की बेटी आरुषि और नौकर को कत्ल करने के इल्ज़ाम में सीबीआई कोर्ट ने उम्र कैद की सजा सुनायी थी.

आरुषि
courtesy-indiatvnews

इस केस की जांच देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई ने की थी. ऐसा लग रहा है कि अभी ये केस सुप्रीम कोर्ट तक जायेगा. क्योंकि सरकारी वकील के मुताबिक सीबीआई ने कहा था कि अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट उन्हें इस केस से बरी करती है तो वो सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे.

हाईकोर्ट ने कहा कि तलवार दंपत्ति के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है और सिर्फ परिस्थितिजन्य साक्ष्य की बुनियाद पर सजा नहीं दी जा सकती. लेकिन इस फैसले से ये बात तो साफ है कि अभी तक ये मर्डर मिस्ट्री ही बना हुआ है. इस बात का जवाब अभी तक नहीं मिला है कि आरुषि हत्याकांड के पीछे किस का हाथ है.

बॉलीवुड निर्देशिका मेघना गुलजार ने साल 2015 में इस पूरे प्रकरण को अपनी नज़रों से उकेरते हुये फिल्म ‘तलवार’ बनायी थी. फिल्म में उन्होंने पूरे प्रकरण को इतने दमदार तरीके से पेश किया था, कि लोगों की जुबां से उतर चुका ये हत्याकांड दोबारा से चर्चा का विषय बन गया था.

फिल्म में उन्होंने इस प्रकरण के दो संभावित पहलुओं को दिखाया. एक पहलू के हिसाब से तलवार दंपति सीबीआई की नज़र में किस तरह से दोषी साबित होती है. और दूसरा पहलू ये कि सीबीआई किस तरह से तलवार दंपति को दोषी साबित करने पर उतारू होती है.

आरुषि
courtesy-Nyooz Flix

हालांकि ये एक फिल्म थी. जो काल्पनिक पात्रों को लेकर रची गयी थी. इसे सिर्फ आरुषि हत्याकांड घटना से प्रेरित होकर बनाया गया था. लेकिन अगर दोनों पहलुओं को देखें तो फिल्म की कहानी का सॉफ्ट कॉर्नर तलवार दंपति के साथ होता है. जिसमें सीबीआई और सिस्टम को सवालों के घेरे में लिया गया है.

हालांकि उन्होंने फिल्म में सीबीआई को पूरी तरह से गलत दिखाने की कोई कोशिश नहीं की थी. उन्होंने उन परिस्थितियों को भी दिखाया, जिनके आधार पर तलवार दंपति को सजा हुयी थी.

और अगर सच्ची घटना और हाल में ही आये इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर नज़र डालें तो फिल्म में पूछे गये सवाल कहीं न कहीं सही साबित होते हैं. क्योंकि माना कि आरुषि और हेमराज की हत्या के पीछे किसका हाथ है, ये अभी भी एक सवाल है. लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं होता कि परस्थितियां जिसके खिलाफ बन जायें, उसी को दोषी मान लिया जाये. भले ही उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत न मिले.

फिल्म की कहानी और उसे दिखाने का ढंग कुछ ऐसा था कि हर अच्छे सिनेमा के प्रेमी दर्शक को उसने प्रभावित किया. फिल्म देखकर आप मेघना गुलजार की मशक्कत और रिसर्च को फिल्मी पर्दे में उतारने की कला से प्रभावित हो जायेेंगे.

आपको बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद इसे सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती दी जा सकती है. क्योंकि सरकारी वकील ने सीबीआई की तरफ से ये बात बोली भी थी. अब आगे केस क्या नया मोड़ लेता है. ये तो समय ही बतायेगा. लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि इस मसले पर बनी फिल्म तलवार  को आप जरूर देखेंगे. और मेघना गुलजार की मेहनत पर पारखी नज़र भी डालेेंगे.

इसे भी पढ़ें-आशीष नेहरा ने की सन्यास की घोषणा, न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलेंगे अंतिम मैच

 

Facebook Comments