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जानिए शरद पूर्णिमा की रात का महत्व, किन भगवान की पूजा करनी चाहिए

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हमारी भारतीय संस्कृतियों में कई देवी-देवता हैं जिनकी हम पूजा बहुत ही श्रद्धा भाव करते हैं. शरद ऋतु की शुरुआत आते ही इंतजार होता है शरद पूर्णिमा की रात के उस पहर का जिसमें 16 कलाओं से युक्त चंद्रमा अमृत की वर्षा पृथ्वी पर करता है. वक़्त के साथ-साथ बहुत कुछ बदल गया है लेकिन इस पर्व का इंतज़ार आज भी उसी तरह होता है जैसे पहले होता था.

शरद
source: Advait – blogger

रात में खीर रखी जाती है खुले आसमान में

इस दिन हिन्दू धर्म में कई लोग अपने घर के आँगन और छत  पर किसी बर्तन में खीर बना के उसे ऊपर रखते हैं ताकि रात में गिरने वाले अमृत को चख सके. वैसे इससे जुड़ी बहुत सी पौराणिक मान्यताएं और कथाए हैं. जिनके बारे में बहुत ही कम जानते  होगें.

शरद पूर्णिमाका महत्व शास्त्रों में भी लिखा गया है.  इस रात्रि को चंद्रमा अपनी समस्त कलाओं के साथ होता है और धरती पर अमृत वर्षा करता है. रात 12 बजे होने वाली इस अमृत वर्षा का लाभ मानव को मिले इसी उद्देश्य से चंद्रोदय के वक्त गगन तले खीर या दूध रखा जाता है जिसका सेवन रात 12 बजे बाद किया जाता है. कहा तो यहाँ तक जाता है कि खीर को खा कर रोगी रोगमुक्त हो जाता है.  इसके अलावा खीर देवताओं का प्रिय भोजन भी माना जाता है.

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source: Revolt Press Hindi

प्राचीन काल से ही  शरद पूर्णिमा को बेहद महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है. शरद पूर्णिमा से हेमंत ऋतु की शुरुआत होने लगती  है.  यह पर्व 5 अक्टूबर 2017 को धूमधाम से मनाया जाएगा.  इस पर्व को कोजागिरी पूर्णिमा भी कहा जाता है. उस खीर को खाने से मनुष्य की उम्र भी बढ़ जाती है.  इसके बाद हेमंत ऋतु की शुरुआत होती है.

इस दिन महा लक्ष्मी की पूजा होती हैं. वैसे तो उनकी पूजा में रंगोली और उल्लू स्वर को शुभ माना जाता है. कई जगहों पर इस रात को डंडिया और भी कार्यक्रम का भी आयोजन भी जहां होता जहां पर मध्य रात्रि के बाद अमृत खीर का सेवन किया जाता है.

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