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चिपको आंदोलन के बारे में कुछ रोचक बातें

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साल 1970 के दशक में भारत में जंगलों के लगातार काटे जाने का विरोध करते हुए लोगों ने चिपको आंदोलन की शुरुआत की. चिपको आंदोलन के दौरान लोग पेड़ों से पूरी तरह से लिपट जाते थे. चिपको आंदोलन के बारे में जानिये कुछ रोचक तथ्य़

Source-wrm.org.uy

1. चिपको आंदोलन की शुरुआत Embrace शब्द से हुई जिसका मतलब था कि गले लगना.

2. गांव के लोग ठेकेदारों को पेड़ काटने से रोकने के लिए पेड़ से पूरी तरह से चिपक जाते थे.

3. चिपको आंदोलन को व्यापक रूप से पहली बार 26 मार्च साल 1974 में वर्तमान उत्तराखण्ड के चमौली में देखा गया था.

4. उत्तराखण्ड के चमौली में बड़ी संख्या में महिलाओं ने ठेकेदारों को पेड़ काटने से रोकने के लिए पेड़ों से लिपट गई थीं.

5. साल 1980 तक पेड़ों और जंगलों को काटे जाने से रोकने के लिए चिपको आंदोलन पूरे देश में चलाया जाने लगा था.

6. उस दौर में लोगों के जीवनयापन का एक बहुत बड़ा हिस्सा जंगलों पर निर्भर था.

7. लोगों के अनुसार यदि हिमालय पर ही जंगल नही रहेंगे तो पूरा भारत जल्द ही एक रेगिस्तान में बदल जाएगा.

8. चिपको आंदोलन का लक्ष्य पेड़ों और जंगलों की रक्षा और उनका संरक्षण था.

9. चिपको आंदोलनों में महिलाओं ने बड़ी मात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था क्योंकि उस दौर में विकास, स्टॉक औऱ बच्चों की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं के ऊपर ही थी.

10. चिपको आंदोलनों में महिलाओं का नेतृत्व करने में प्रमुख भूमिका अमृता देवी सुदेशना देवी, सरला बहन, बचनी देवी और मीरा बहन थीं.

चिपको आंदोलन के
Source-sanantoniopeace.center

चिपको आंदोलन के नेतृत्वकर्ता

चंडी प्रसाद भट्ट

चिपको आंदोलन का नेतृत्व करने वालों में प्रमुख भूमिका चंडी प्रसाद भट्ट ने निभाई थी.

चंडी प्रसाद भट्ट ने पहले वहां के लोगों को जंगलों के नष्ट होने का नुकसान बताकर जागरुक किया और फिर जंगलों के विनाश को रोकने के लिए बड़ी-बड़ी रैलियां आयोजित कीं.

सुदरलाल बहुगुणा

सुंदरलाल बहुगुणा उत्तराखण्ड में टेहरी बांध (Tehri Dam) को बनाने का विरोध करने वाले सबसे पहले व्यक्ति माने जाते हैं.

इन्होंने जंगलों को नष्ट किये जाने के दुष्परिणामों का प्रचार घर-घर में किया था.

चिपको आंदोलन के परिणाम

चिपको आंदोलन के
Source-thehindu.com

1. साल 1980 में उत्तर प्रदेश में पेड़ों को 15 साल के लिए काटना पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया.

2. साल 1981 तक आमजन की सहायता के साथ लाखों की संख्या में पेड़ लगाये गये थे.

3. जंगलों के संरक्षण और रोजगार को पैदा करने के लिए जंगलों में खेती आदि के नये तरीके खोजे गये.

4. आज भी भारत के कुछ हिस्सों में अहिंसक रूप से चिपको आंदोलन का पालन किया जाता है.

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