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जेल जाने से बचाती हैं इस मंदिर की माता, आज ही करें दर्शन

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ये सुनने में थोड़ा अजीब लगता है लेकिन भारत में देवी मां का एक ऐसा मंदिर है, जहां अगर कोई हथकड़ियां चढ़ाता है तो वो जेल जाने से बच जाता है. वैसे तो आम तौर पर आपने सुना और देखा होगा कि माता को चुनरी, नारियल, सिंदूर, चूड़ियां आदि चीजें भेंट की जाती हैं. लेकिन इस मंदिर में माता हो हथकड़ियां और बेड़ियां अर्पित की जाती हैं. तो आइए आपको बताते हैं इस मंदिर के बारे में

उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के जोलर ग्राम पंचायत में दिवाक माता का एक प्रचीन मंदिर स्थित है. यह मंदिर देवलिया के पास घने जंगल में बना हुआ है. ये मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर बना है जो चारों ओर से घने जंगल से घिरी हुई है.

आपको बता दें कि यहां पहुंचने के लिए भक्तों को छोटी-बड़ी पहाड़ियां पार करना पड़ता है और पैदल ही यहां पहुंचा जा सकता है. माता के मंदिर में लोगों की इतनी श्रृद्धा है कि यहां के जंगल से एक भी पेड़ काटा नहीं जाता है.

मंदिर में चढ़ाई जाती हैं हथकड़ियां

200 साल पुरानी हैं हथकड़ियां

श्रद्धालु दूर-दूर से यहां दिवाक माता के दर्शनों के लिए आते हैं. इनमें से कई श्रद्धालु माता को खुश करने के लिए उनको हथकड़ियां और बेड़ियां अर्पित करते हैं.

मंदिर के अंदर एक त्रिशूल गड़ा हुआ है, जिस पर बहुत सी हथकड़ी चढ़ाई गई हैं. इन हथकड़ियों के बारे में ऐसा कहा जाता है कि कुछ हथकड़ियां तो करीब 200 साल पुरानी हैं.

जेल से मुक्ति के लिए मांगते हैं मन्नत

हथकड़ियां अपने आप खुल जाती हैं

यहां के लोगों का मानना है कि माता के नाम से यहां पर हथकड़ियां चढ़ाने पर वो अपने आप ही खुल जाती हैं. एक समय था, मालवा के इस अंचल में बेहद खूंखार डाकुओं का दबदबा हुआ करता था. यहां के डाकू मन्नत मांगते थे कि अगर वे डाका डालने में सफल रहे और पुलिस के चंगुल से बच गए, तो वे यहां हथकड़ी और बेडिय़ां चढ़ाएंगे.

दूर-दूर से आते हैं भक्त

क्या है इस मंदिर की कहानी

जनश्रुति के अनुसार, रियासत काल के एक नामी डाकू पृथ्वीराणा ने जेल में दिवाक माता की मन्नत ली थी कि अगर वह जेल तोडक़र भागने में सफल रहा, तो वह सीधा यहां दर्शन करने के लिए आएगा.

मंदिर
लगती है भक्तों की भीड़

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि दिवाक माता के स्मरण मात्र से ही उसकी बेडिय़ां टूट गई और वह जेल से भाग जाने में सफल रहा. तब से यह परंपरा चली आ रही है. आज भी अपने किसी रिश्तेदार या परिचित को जेल से मुक्त कराने के लिए परिजन यहां हथकड़ी और बेडिय़ां चढ़ाते हैं.

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