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क्यों कहते हैं वरुण को नीला ग्रह, जानिए वरुण ग्रह के बारे में 10 रोचक तथ्य

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खगोल में खोजबीन करने के बाद यह अज्ञात ग्रह 23 सितम्बर 1846 को पहली बार दूरबीन से देखा गया और इसका नाम ‘नॅप्टयून’ रख दिया गया. ‘नॅप्टयून’ प्राचीन रोमन धर्म में समुद्र के देवता थे, जो स्थान प्राचीन भारत में ‘वरुण’ देवता का था. इसलिए इस ग्रह को हिन्दी में वरुण ग्रह कहा जाता है.

वरुण ग्रह के बारे में कुछ रोचक तथ्य…

1. वरुण ग्रह की सूर्य से दूरी लगभग 4. 5 अरब किलोमीटर है. सूर्य की परिक्रमा करते हुए इस नीले रंग के ग्रह की खोज सन 1846 में हो गई थी.

2. इस ग्रह की भू मध्य रेखा का घेरा 155 , 600 किलोमीटर का है और भू मध्य रेखा का व्यास 49 528 किलोमीटर है.

3. यह ग्रह सूर्य की परिक्रमा धरती के हिसाब से 164.79 वर्षों में पूरी करता है और अपनी धुरी पर एक चक्कर पूरा करने के लिए 16 घंटे 7 मिनट का समय लेता है.

4. वरुण ग्रह की बनावट बिल्कुल युरेनस ग्रह की तरह है युरेनस की तरह यह ग्रह भी चटानो और और बर्फ से बना है, और इसी वहज से वरुण का रंग नीला है.

5. इस ग्रह का नाम प्राचीन लोगों के समुद्र देवता नेप्चून पर रखा गया है. प्राचीन भारत में यही स्थान वरुण देवता को मिला था, इसीलिए इसे वरुण ग्रह भी कहा जाता है.

6. इस ग्रह के अभी तक 14 उपग्रह खोजे गए हैं, जिसमें से सबसे बड़ा उपग्रह ट्राइटन है. ट्राइटन हमारे सौरमंडल का सातवां सबसे बड़ा उपग्रह है. यह उपग्रह नाइट्रोजन से बना हुआ है.

7. इस ग्रह के लगभग चार छल्ले हैं पृथ्वी पर इन छल्लों को दुरवीन से देखने पर यह छल्ले टूटे हुए दिखाई देते हैं.

8. सिर्फ एक यान ही अभी तक वरुण ग्रह पर पहुंच पाया है. वायेजर-2 अन्तरिक्ष में इस ग्रह पर छोड़ा गया था जो 1989 में इस ग्रह पर पहुंचा था. इसने इस ग्रह के बारे में बहुत एहम जानकारी प्राप्त की और इसके उपग्रहों की तस्वीरें भी खींची.

9. वरुण की पृथ्वी से दूरी बहुत ज्यादा है, इसी कारण यह ग्रह नंगी आखों से केवल एक टिमटिमाते तारे की तरह देखा जा सकता है.

10. वरुण की सतह का तापमान – 220 डिग्री सेन्टीग्रेड है. इसका अक्ष इसकी परिक्रमा पथ से 30 डिग्री तक झुका हुआ है. इस ग्रह पर 41 सालों तक एक जैसा ही मौसम रहता है.