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कुछ ही सेकेड्ंस में रंग बलते हैं ऑक्टोपस, जानिए इसके बारे में 10 रोचक तथ्य

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ऑक्टोपस का नाम आते दिमाग में एक ऐसे जानवर का आकार आंखों के सामने आता है जिसकी 8 भुजाएं होती हैं. यह देखने में बहुत ही डरावना लगता है. लेकिन हम आपको बता दें कि ये जीव बहुत ही डरपोक होते हैं और इंसानों को देखकर भाग जाते हैं. इसी के साथ ही ऑक्टोपस रंग बदलने में माहिर होते हैं और खतरा महसूस होते ही माहौल के हिसाब से अपना रंग बदल लेते हैं.

वैसे तो ये बहुत ही धीमे और सुस्त जान पड़ते हैं, लेकिन जब शिकार की बात हो तो इसके अंदर फुर्ती आ जाती है और ये इंतजार करते हुए अपने शिकार पर अचानक हमला करता है और उसे पकड़ लेता है. तो आइए आपको बताते हैं इसके बारे में कुछ रोचक जानकारी.


ऑक्टोपस के बारे में 10 रोचक तथ्य…

1. आमतौर पर व्ययस्क नर ऑक्टोपस 23 kg के आस पास होता हैं और मादा का वजन 15 kg होता है. ऑक्टोपस की बाहें 2.5 मीटर लंबी होती है.

2. साल 1957 में दक्षिण कनाडा में एक विशाल ऑक्टोपस देखा गया था जिसका वजन 272 kg था और इसकी बाहें 9.6 मीटर लंबी थी.

3. इस तरह के भारी भरकम ऑक्टोपस अलास्का, केलिफोर्निया और पूर्वी एशिया में पाये जाते है. इनके प्रिय शिकार केकड़े और मछलियां होती है. ये रात को ही शिकार करना पसंद करते है.

4. विज्ञान के मुताबिक यह मोलस्क ग्रुप से सम्बन्ध रखते है. इन्हें सिफालोपाड्स भी कहते है. सिफालोपाड्स का अर्थ होता है सर पर पांव वाला प्राणी. इनके आठ बाहें होती है इसलिए इसे ऑक्टोपस कहते है. ये बुद्धिमान प्राणी होते है, इनमें पालतू बिल्ली जितनी बुद्धि होती है.

5. लोग ऐसा मानते हैं कि ये शिकार पर धीरे धीरे हमला करते है. लेकिन हम आपको बता दें कि ये घात लगाकर शिकार करते हैं. ये अपने शिकार का इंतजार करते हैं और अचानक हमला करके उन्हें दबोच लेते हैं. ये शिकार को सिर से पकड़ते है और शिकार के अंदर अपना विष छोड़ देते है, जिससे वो पैरालाइज हो जाता है.

6. इसके अलावा शिकारियों से बचने के लिए भी इसके पास कई हथियार हैं, जैसे जब कोई शिकारी इस पर हमला करता है और इसकी भुजा पकड़ लेता है तो ये अपनी बांह को खुद ही तोड़ देता है. छिपकली की तरह ही इनकी बाहें फिर से उग आती हैं.

7. ये शिकारी से बचने के लिये अपना रंग भी बदल लेते है. ज्यादा भूख लगने पर ये अपने साथियों को भी खा जाता है. इसके अलावा भूख लगने पर ये अपनी बांह को भी खा जाता है.

8. ज्यादातर ऑक्टोपस सर्दियों के मौसम में प्रजनन करते हैं. नर अपनी बांह को जोर से हिलाकर मादा को आकर्षित करता है. मादा चट्टान की दरारों में अंडे देती है.

9. इनके अंडो की संख्या 1 लाख तक होती है. अंडे का वजन चावल के दाने के बराबर होता है. अंडो से बच्चे निकलकर समुद्र में तैरने लग जाते है. इनमें से अधिकांश मर जाते है और केवल 2 या 3 बच्चे ही व्ययस्क हो पाते है.

10. यह जानवर सिर्फ 4 वर्षों तक ही जीवित रह पाता है. इनके खून में चांदी जैसा योगिक होता है जो इनको बहुत जल्द ही थका देता है. इनकी पूरी दुनिया में लगभग 150 प्रजातियां पायी जाती है.