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जानिए सिकंदर को टक्कर देने वाले पोरस के बारे में कुछ खास बातें

टीवी पर एक नया शो शुरू होने वाला है, जिसे इतिहास के एक राजा के व्यक्तित्व के आधार पर बनाया जा रहा है. हालांकि की इस राजा का जिक्र ज्यादा नहीं किया जाता लेकिन इन्हें इतिहास के एक पराक्रमी राजा के तौर पर जाना जाता है. हम आपको बता रहें राजा पोरस के बारे में. तो आइए जानते हैं कि कौन थे राजा पोरस, वो कहां के राजा थे और सिकंदर से उनकी लड़ाई की क्या कहानी है.

पोरस के बारे में कुच रोचक बातें

पोरस
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1. पंजाब में झेलम से लेकर चेनाब नदी तक राजा पोरस जिन्हें पुरुवास के नाम से भी जाना जाता था, उनका राज्य था. उनकी राजधानी मौजूदा लाहौर के आस-पास थी. उनका कार्यकाल 340 ईसा पूर्व से 315 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है.

2. इतिहासकार और दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्राचीन इतिहास पढ़ाने वाले प्रोफेसर आर.सी. ठाकरन की माने तो पोरस झेलम नदी के किनारे बसे एक छोटे राज्य का राजा थे. उनका कहना है कि ‘पोरस का शासन क्षेत्र पंजाब में झेलम के आसपास था. लेकिन यहां जितने छोटे-छोटे राज्य थे, उनमें पोरस को काफी शक्तिशाली माना जाता था.’

3. इतिहासकारों की माने तो सिकंदर विश्व विजय पर निकला था. जब वो पोरस के राज्य में पहुंचा तो उन्होंने सिकंदर के आगे आत्मसमर्पण नहीं किया और उससे टकराव किया.

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4. 326 ईसा पूर्व में सिकंदर और पोरस के बीच लड़ाई हुई थी. तक्षशिला के राजा ने सिकंदर के आगे आत्मसमर्पण कर दिया और पोरस पर आक्रमण करने के लिए कहा ताकि उसके राज्य विस्तार हो सके. इस लड़ाई में पोरस ने पराक्रम से सिकंदर का सामना किया. लेकिन काफी पराजय के बाद उनकी पराजय हो गई. लेकिन इस लड़ाई में सिकंदर की सेना को भी खासा नुकसान हुआ था.

5. आंकड़ों की माने तो सिकंदर की सेना में 50 हजार से ज्यादा सैनिक थे, जबकि उनकी सेना में 20 हजार के करीब सैनिक थे. उन्होंने सिकंदर की सेना के सामने अपनी सेना के हाथी खड़े कर दिये थेे, जिससे सिकंदर भी दंग हो गया था.

6. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि जब वो सिकंदर से हार गए तो उन्हें सिकंदर के सामने पेश किया गया. दरबार में जब सिकंदर ने उनसे ये सवाल किया कि उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाए ? तो इस पर बड़े आत्मविश्वास और आत्मसम्मान के साथ उन्होंने कहा कि ठीक वैसा ही, जैसा एक शासक दूसरे शासक के साथ करता है.

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7. सिकंदर को उनका आत्मविश्वास भरा ये जवाब बहुस अच्छा लगा और इसी घटना के बाद सिकंदर ने उनसे दोस्ती का हाथ बढ़ाया, क्योंकि उसको पता था कि इस लड़ाई में उसे काफी नुकसान उठाना पड़ा है और आगे की लड़ाइयों के लिए उसे पोरस की मदद चाहिए होगी.

8. इतिहासकारों की माने तो संधि के बाद सिकंदर जनरल नियाज को जिम्मेदारी सौंप कर अपने प्रदेश वापस चला गया, लेकिन रास्ते में उसकी तबियत बिगड़ गई और रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. इतिहासकारों का दावा है कि 323 ईसा पूर्व में सिकंदर की मौत के बाद ही उसके एक जनरल ने ही पोरस की हत्या करवाई थी.

9. हालांकि पोरस की मौत कब हुई इस बात की कोई ठोस जानकारी नहीं है. उनकी मौत की कोई सटीक तारीख नहीं है. लेकिन ऐसा माना जाता है कि उनकी मृत्यु 321 से 315 ईसा पूर्व के बीच हुई होगी.