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महादेव कभी भी माफ नहीं करते हैं इन पापों को, सुखी जीवन के लिए दूर रहे इन पापों से

त्रिदेवों में से भगवान शिव सबसे जल्दी प्रसन्न होने वाले कहे जाते हैं लेकिन महादेव गलती हो जाने पर तुरंत रुष्ट भी हो जाते हैं. आज हम आपको शास्त्रों में बताए गये कुछ पापों के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि वर्जित बताए गये हैं. सुखी जीवन के लिए आप इन पापों से दूर रहें-

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औघड़दानी भोलेनाथ

महादेव शिव को औघड़दानी और भोलेनाथ भी कहा जाता है लेकिन शिव जितने भोले और आसानी से प्रसन्न होने वाले हैं, उनका गुस्सा भी उतना ही प्रलयंकारी है.

शिव पुराण

शिव पुराण में कार्य, बात-व्यवहार और सोच द्वारा किए गए पापों का वर्णन है जिसे भगवान शिव कभी क्षमा नहीं करते. ऐसा व्यक्ति हमेशा ही शिव के कोप का भागी होगा और कभी भी सुखी जीवन व्यतीत नहीं कर सकता.

सोच से किए जाने वाले पाप

आप अपने मस्तिष्क में जो सोच रहे होते हैं वह भी भगवान से छुपा नहीं है इसलिए भले ही बात और व्यवहार में आपने किसी को नुकसान ना पहुंचाया हो लेकिन अगर मन में किसी के प्रति कोई दुर्भावना है या आपने किसी का अहित सोचा हो तो यह भी पाप की श्रेणी में आता है.

Source : Rosemeinwonderland

अब आप पुराणों में वर्णित इन पापों के बारे में जानिए-

1. दूसरों के पति या पत्नी पर बुरी नजर रखना या उसे पाने की इच्छा करना भी पाप की श्रेणी में रखा गया है

2. दूसरों का धन अपना बनाने की चाह रखना भी भगवान शिव की नजर में अक्षम्य अपराध और पाप है.

3. किसी भोलेभाले और निरपराध इंसान को कष्ट देना, उसे नुकसान पहुंचाने, या धन-संपत्ति लूटने, उसके लिए बाधाएं पैदा करने की योजना बनाना या ऐसी सोच रखना भगवान शिव की नजरों में हर हाल में माफी ना देने योग्य पाप है.

4. अच्छी बातें भूलकर बुरी राह को स्वयं चुनने वाले के पाप अक्षम्य होते हैं.

बोली के द्वारा किए जाने वाले अक्षम्य पाप

शिव पुराण के अनुसार जिस प्रकार आप किसी का बुरा नहीं करने के बावजूद उसके लिए बुरी सोच रखने के कारण भी पाप के हकदार और दंड की श्रेणी में आ जाते हैं उसी प्रकार भले ही आपने अपने कार्य से किसी का बुरा ना किया हो लेकिन आपकी बोली अक्षम्य पापों का हकदार भी बना सकती है.

1. किसी गर्भवती महिला या मासिक के दौरान किसी महिला को कटु वचन कहना या अपनी बातों से उनका दिल दुखाना शिव की नजरों में अक्षम्य अपराध और पाप है.

2. किसी के सम्मान को हानि पहुंचने की नीयत से झूठ बोलना ‘छल’ की श्रेणी में आता है और अक्षम्य पाप का भागीदार बनाता है.

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आपकी सोच और बातों के अलावा आपके द्वारा जीवन में किए गए ये 5 कार्य भी आपको ऐसे ही पापों का भागी बना सकता है:

1. धर्म अनुसार मना की गई चीजें खाना या धर्म के विपरीत कार्य करना किसी हाल में व्यक्त के लिए स्वीकार्य नहीं होना चाहिए वरना आप भगवान शिव की नजरों में हमेशा ही अपराधी रहेंगे.

2. बच्चों, महिलाओं या किसी भी कमजोर जीव के खिलाफ हिंसा और असामाजिक कार्यों में लिप्तता मनुष्य को पाप का दोषी बनाता है.

3. गलत तरीके से दूसरे की संपत्ति हड़पना, ब्राह्मण या मंदिर की चीजें चुराना या गलत तरीके से हथियाना भी आपको पापों की इस श्रेणी में लाता है.

4. गुरु, माता-पिता, पत्नी या पूर्वजों का अपमान भी आपको भूलकर भी नहीं करना चाहिए.

5. शराब पीना, गुरु की पत्नी के साथ संबंध बनाना, दान की हुई चीजें या धन वापस लेना महापाप माने जाते हैं जिसे भगवान शिव कभी भी क्षमा नहीं करते.