Home Tech 360 आपके मोबाइल में कैसे आया स्माइली, कब और कैसे हुई शुरुआत

आपके मोबाइल में कैसे आया स्माइली, कब और कैसे हुई शुरुआत

विश्व मुस्कान दिवस की शुरुआत साल 1999 से हुई, जिसे अक्टूबर के पहले शुक्रवार को मनाया जाता है. चेहरे पर मुस्कान लाने का जितना बेहतर जरिया स्माइली बना हुआ है, उतना बेहतर और कोई दूसरा विकल्प नहीं है.

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दुनिया का पहला इमोजी

जब लोग सोशल मीडिया पर अपने जज्बातों को बयां करते हैं, तो उसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्माइली की ही होती है.

स्माइली की उत्पत्ति साल 1963 में हुई. एक अमेरिकी इंश्योरेंस कंपनी ने अपने नाराज कर्मचारियों को मनाने और उनमें जोश भरने के लिए एक विज्ञापन और पब्लिक रिलेशन एजेंसी चलाने वाले हार्वी रास बॉल से संपर्क किया.

कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने दूसरी कंपनी के साथ विलय किया है, इससे उनके कर्मचारी नाराज हैं. वह चाहते हैं कि उनके कर्मचारियों की नाराजगी दूर हो. इसके लिए हार्वी ने एक नायाब तरीका निकाला. उन्होंने नाराज कर्मचारियों को मनाने के लिए पीले रंग का एक हंसता हुआ चेहरा बनाया, जिसे आज स्माइली के नाम से जाना जाता है.

ये स्माइली कर्मचारियों को बहुत पसंद आया. तथा दुनिया भर में प्रसिद्ध हो गया. हार्वी ने इसे बनाने के लिए 45 डॉलर लगभग आज कि स्थित में 3100 रुपये लिये थे.

स्माइली कि लोकप्रियता देखते हुए 1971 में पांच करोड़ स्माइली फेस छपे बटन कि बिक्री की गई थी इसकी प्रसिध्दी को देखते हुए 1999 यूएस पोस्टल सर्विस डिपार्टमेंट ने स्माइली फेस स्टांप जारी किया था.

कंप्यूटर की दुनिया में स्माइली-

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19 सितंबर 1982 को अमेरिका के पिट्सबर्ग स्थित कानर्गी मिलॉन यूनिवर्सिटी में प्रो स्कॉट ई फालमैन ने पहली बार इलेक्ट्रॉनिक संदेश के रूप में कुछ चिह्नों का प्रयोग किया. फालमैन के दिशानिर्देश अनुसार बाद में कम्प्यूटर की दुनिया में सैकड़ों स्माइली कि उत्पत्ति हुई.

स्माइली कि लोकप्रियता-

19 से 25 वर्ष की उम्र के 68 प्रतिशत युवा रोजाना स्माइली का प्रयोग करते हैं. 50 से अधिक उम्र के 48 प्रतिशत लोग भी प्रतिदिन बातचीत में स्माइली का प्रयोग करते हैं.