Home Religion माता के मंदिर पहाड़ों पर ही क्यों होते हैं, जानिये असली वजह

माता के मंदिर पहाड़ों पर ही क्यों होते हैं, जानिये असली वजह

नवरात्र में लोग मां दुर्गा कि पूजा अर्चना करते हैं. नवरात्र के समय में देवी मंदिरों में भक्तों का जमघट लगता है. लोग बड़ी संख्या में पूजा अर्चना के लिए देवी के मंदिरों में जाते हैं.

देवी मां के ऐसे बहुत से मंदिर हैं जो पहाड़ों पर स्थित हैं. देवी मां के अलावा बहुत सारे देवाताओं के भी मंदिर पहाड़ों पर बने हुए हैं मिसाल के तौर पर बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे मंदिर हैं. आइये जानते हैं पहाड़ों पर मंदिर बनाये जाने कि अहम वजह.

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पहाड़ों पर मंदिर बनाये जाने के कारण-

पहाड़ों पर बने मंदिरों का आकार कुछ पिरामिडों कि तरह का होता है. पिरामिड का मतलब होता है जिसके बीच में अग्नि है. अर्थात कोई वस्तु जो वहां पर विद्यमान है. ग्रीक भाषा में पायर शब्द का अर्थ होता है अग्नि.

अग्नि एक प्रकार कि ऊर्जा है इसलिए पिरामिड का अर्थ हुआ, जिसके मध्य में अग्निमय ऊर्जा का प्रवाह हो. वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि पहाड़ी स्थानों पर सकारात्मक ऊर्जा का स्तर अधिक होता है.

जब इंसान पहाड़ों पर देवी, देवताओं के दर्शन के लिये जाते हैं तो उस सकारात्मक उर्जा का असर इंसानों के मन मस्तिष्क में होता है और इंसान के मन में अध्यात्म के प्रति भाव जागते हैं.

सनातन धर्म को जानने वाले ऋषि और मुनियों को पूर्वाभास था कि आने वाले समय में मनुष्य अपनी सुविधा के लिए पहाड़, जंगल आदि को नष्ट कर देंगे. ऐसी स्थित में योग साधना के लिए एकांत और शांत स्थान शेष नही बचेंगे. इन्ही कारणों कि वजह से मंदिर पहाड़ों और जंगलों में बनाये गये.

ताकि योगी व्यक्ति अपनी साधना को एकांत में कर सके. साधना के लिए मन का एकाग्र होना बहुत आवश्यक होता है और यह काम एकांत में ही संभव है इसलिए मंदिरों को पहाड़ों और जंगलों में बनाया गया.

पहाड़ों पर प्राकृतिक सौन्दर्य अपने मूल रुप मे होता है जो जीवन में ताजगी लाता है जब इंसान पहाड़ों मे जाता है तो उसे प्राकृतिक सौंदर्य देखने को मिलता है. जो उसे अन्यत्र जगह पर नही मिलता है.