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Acupressure ही नहीं दिमाग और शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाते हैं खड़ाऊ

हमारे देश की संस्कृति और सभ्यता बहुत पुरानी है और इसे पूरी दुनिया ने माना है. लेकिन आज के समय में हमारे ही देश के लोग अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं. भारत की आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति सैकड़ों साल पुरानी है और आज भी इसके जरिए असाध्य रोगों का इलाज किया जाता है.

पुराने जमाने की बात करें तो उस समय लोग खड़ाऊ पहनते थे. अगर आपको खड़ाऊ नहीं पता है तो हम आपको Simple भाषा में बता दें कि ये लकड़ी की बनी Slippers यानी चप्पलों जैसी होती है. बता दें कि खड़ाऊ Acupressure ही नहीं बल्कि दिमाग के साथ शरीर की कई दूसरी बीमारियों में भी लाभ पहुंचाता है.

भारत में पादुका या खड़ाऊ का चलन प्राचीन काल से होता आ रहा है. पौराणिक  TV Serials जैसे रामायण और महाभारत में भी आपने देखा होगा कि ऋषि पैरों में खड़ाऊ ही पहनते थे. रामायण में जब राम को वनवास हो गया था तो भरत ने उनके खड़ाऊ लेकर ही राज्य को संचालित किया था.

लेकिन हम आपको बताते हैं इसकी Science, अगर आप भारत के Geographical Structure को देखें तो आपको पता चलेगा कि यहां की जमीन पर चलना आसान नहीं. लकड़ी के खड़ाऊ न सिर्फ चलने में मददगार होते थे, बल्कि ये काफी Comfortable भी थे.

Doctors की माने तो खड़ाऊ पहनने से आपके पैरों को काफी आराम मिलता है. खड़ाऊ आपके पैरों में मौजूद कई Acupressure Points को Target करता है, जिससे आपके शरीर और दिमाग को आराम मिलता है. वैसे तो खड़ाऊ लकड़ी की बनाई जाती है, लेकिन लड़की के साथ-साथ हाथी दांत या चांदी के भी खड़ाऊ बनाए जाते थे.

खड़ाऊ पहनने से होने वाले फायदे :-

1. खड़ाऊ पहनने से आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी रहती है और आपका Posture भी Balanced रहता है.

2. खड़ाऊ पैर के कुछ Acupressure Points पर प्रेशर बनाते हैं, जिससे शरीर में सुचारू रूप से रक्त का संचार होता है.

3. खड़ाऊ बनाने में किसी भी जानवर की हत्या नहीं की जाती.

4. खड़ाऊ पहनने से पांव को सर्दी भी नहीं लगती और उबड़-खाबड़ रास्तों पर चलना भी आसान हो जाता है.

5. खड़ाऊ भारतीय सभ्यता का हिस्सा हैं, इसे पहनने में शर्म महसूस नहीं होनी चाहिए.

6. खड़ाऊ पहनने से आपके पैरों की माशपेशियों को आराम मिलता है, जिससे आपका शरीर और दिमाग, दोनों तनावमुक्त होते हैं.

7. खड़ाऊ सस्ते, सुंदर, टिकाऊ होते हैं और इन्हें बनाने में भी अधिक लागत नहीं आती.