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आरती के बाद करते हैं इस मंत्र का जाप, तो जान लीजिये इसका अंजाम

हिंदू धर्म में अलग-अलग आरतियों का महत्व भी अलग-अलग होता है. ऐसे में पूजा-पाठ के समय आरती और उससे जुड़े मंत्रों पर भी विशेष महत्व दिया जाता है. शास्त्रों में ऐसा भी माना जाता है कि आरती से देवी-देवताओं की विशेष कृपा भी बरसती है. घर में दोनों समय आरती करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. जिससे घर के कलेश और लड़ाई-झगड़े दूर हो जाते हैं.

आरती

आरती के बाद आपने अक्सर देखा होगा की लोग कर्पूरगौरं’ मंत्र का जाप करते हैं. क्या आपको पता है कि इस मंत्र का सीधा कनेक्शन शिव जी से है. इस मंत्र शिव जी के दिव्य और शक्तिशाली स्वरूप का जिक्र किया जाता है.  इस मंत्र के जरिये शिव जी से प्रार्थना की जाती है कि वे हमारे मन से मृत्यु का भय दूर करके हमारे जीवन को सुखमय बनाएं.

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‘कर्पूरगौरं’ मंत्र इस प्रकार से है-
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।

अर्थात् जो कर्पूर जैसे गौर वर्ण वाले हैं, करुणा के अवतार हैं, संसार के सार हैं और भुजंगों का हार धारण करते हैं, वे भगवान शिव माता भवानी सहित मेरे ह्रदय में सदैव निवास करें और उन्हें मेरा नमन है.

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हिंदू धर्म में होने वाली किसी भी पूजा से पहले गणेश जी स्तुति करने का विधान है. ठीक इसी प्रकार से पूजा-पाठ में आरती होने के बाद ‘कर्पूरगौरं’ मंत्र का जाप किया जाता है. ऐसा माना जाता है कि शिव-पार्वती विवाह के समय विष्णु ने यह स्तुति गाई थी. ऐसे में इसका महत्व और भी अधिक हो जाता है. मान्यता है कि आरती के बाद ‘कर्पूरगौरं’ मंत्र का जाप करने से शिव जी प्रसन्न होते हैं. और उक्त पूजा का संपूर्ण शुभ फल व्यक्ति को प्राप्त होता है.